NEET Results 2020: सब्जी और इडली बड़ा बेचने वालों के 19 बच्चों ने NEET में पाई सफलता

नीट रिजल्ट जारी हो चुका है.
नीट रिजल्ट जारी हो चुका है.

ये सारे सफल बच्चे जिंदगी प्रोग्राम का हिस्सा हैं जो कि अजय बहादुर सिंह के एक एनजीओ द्वारा चलाया जा रहा है. वे खुद भी भूख और कमी का शिकार रहे हैं. इसकी वजह से वे खुद कभी डॉक्टर नहीं बन पाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 18, 2020, 2:18 PM IST
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गरीब बच्चों को मेडिकल परीक्षा की तैयारी करने वाले कैंडीडेट्स को सहायता पहुंचाने की अपनी मुहिम को पंख देने के लिए ओडिशा के चैरिटेबल ग्रुप ने कमर कस रखी है. इस साल इस चैरिटेबल ग्रुप के पढ़ाए हुए 19 बच्चों ने नीट परीक्षा में प्रवेश पाया है. शुक्रवार को नीट का रिजल्ट जारी कर दिया गया. ये बच्चे दिहाड़ी मजदूर, सब्जी विक्रेता, ट्रक ड्राइवर और इडली-वडा सेलर के बच्चे हैं.

ये सारे सफल बच्चे जिंदगी प्रोग्राम का हिस्सा हैं जो कि अजय बहादुर सिंह के एक एनजीओ द्वारा चलाया जा रहा है. वे खुद भी भूख और कमी का शिकार रहे हैं. इसकी वजह से वे खुद कभी डॉक्टर नहीं बन पाए. इस प्रोग्राम के तहत पूरे ओडिशा से प्रतिभाशाली बच्चों को चुना जाता है और उन्हें भोजन के साथ साथ फ्री कोचिंग भी उपलब्ध कराई जाती है. इस बार भी न तो भूख और न ही कोरोना उन्हें डॉक्टर बनने से रोक पाई. जिंदगी फाउंडेशन के 19 के 19 बच्चे नीट परीक्षा में सफल पाए गए.

जिंदगी फाउंडेशन के बच्चों में एक है खिरोदिनी साहू जो कि अंगुल जिले की रहने वाली हैं. खिरोदिनी के पिता एक खेतिहर मजदूर हैं. कोरोना के समय में उनकी नौकरी चली गई और खिरोदिनी बताती हैं कि 'मैं बीमार हो गई. इसके बाद मैं एंबुलेंस से भुवनेश्वर आईं और अजय सर को सारी बात बताई. उन्होंने मुझे सारी सहायता पहुंचाई. खिरोदिनी को ऑल इंडिया 2594 रैंक मिली.



वहीं सत्यजीत साहू के पिता साइकिल पर रखकर सब्जियां बेचते हैं. सत्यजीत को 619 अंक मिले हैं. निवेदिता पांडा के पिता की पान की दुकान है. निवेदिता को 591 अंक मिले हैं. स्मृति रंजन सेनापति एक ट्रक ड्राइवर की बेटी हैं. नीट परीक्षा में स्मृति को 59044 रैंक आई है.
अजय बहादुर सिंह ने यह फाउंडेशन साल 2017 में शुरू किया था. उन्होंने बताया कि वे इस सारे काम को करने के लिए किसी से भी डोनेशन नहीं लेते बल्कि अपने खुद के संसाधनों से इसका प्रबंधन करते हैं. उनका कहना है कि इसमें वे अपना बचपन देखते हैं. उन्होंने कहा कि पढ़ाई को जारी रखने के लिए मुझे चाय बेचना पड़ता था. इस प्रोजेक्ट के जरिए गरीब घर के बच्चों को सेलेक्ट किया जाता है और फ्री में उनके रहने खाने की व्यवस्था की जाती है.
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