दिल्ली शिक्षा बोर्ड और नए पाठ्क्रम से जुड़ी समितियां अगले महीने देंगी रिपोर्ट: सिसोदिया

सिसोदिया ने दिल्ली के स्कूलों को लिये 'देशभक्ति' पाठ्यक्रम के विषयों की समीक्षा की (सांकेतिक तस्वीर)

अगले साल तक दिल्ली अपना खुद का शिक्षा बोर्ड (Delhi Education Board) शुरू कर सकता है. हालांकि, दूसरे राज्यों की तरह यह सरकारी स्कूलों पर बाध्यकारी नहीं होगा.

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    नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा दिल्ली के शिक्षा बोर्ड और नए स्कूली पाठ्यक्रम पर काम करने के लिये गठित दो समितियां अगले महीने तक अपनी अपनी रिपोर्ट पेश कर सकती हैं. उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को यह जानकारी दी.

    समितियों की तीसरी संयुक्त बैठक
    सिसोदिया ने दिल्ली के स्कूलों को लिये 'देशभक्ति' पाठ्यक्रम के विषयों की समीक्षा की और अब तक हुई प्रगति का जायजा लेने के लिये हुई समितियों की तीसरी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता की. दिल्ली में 'देशभक्ति' पाठ्यक्रम पेश करने पर पिछले साल काम शुरू हुआ था.

    नए पाठ्यक्रम पर सलाह
    चौदह साल तक के बच्चों के लिये नए पाठ्यक्रम पर सलाह देने और एक शिक्षा बोर्ड गठित करने के लिये जुलाई 2020 में दो समितियों दिल्ली शिक्षा समिति और दिल्ली पाठ्यक्रम सुधार समिति का गठन किया गया था. सिसोदिया के अनुसार दोनों समिति अगले महीने तक अपनी-अपनी रिपोर्ट पेश कर सकती हैं.

    दिल्ली का अपना शिक्षा बोर्ड
    बता दें कि अगले साल तक दिल्ली अपना खुद का शिक्षा बोर्ड (Delhi Education Board) शुरू कर सकता है. हालांकि, दूसरे राज्यों की तरह यह सरकारी स्कूलों पर बाध्यकारी नहीं होगा. दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Delhi Deputy Chief Minister Manish Sisodia) ने इस बात की जानकारी दी थी. उन्होंने कहा था कि अगले सत्र से दिल्ली का अपना शिक्षा बोर्ड काम करने लगेगा, जिसमें सिर्फ बोर्ड परीक्षा नहीं होगी बल्कि स्टूडेंट्स के लगातार मूल्यांकन की व्यवस्था की जाएगी. इस तरीके से पता लगाया जा सकेगा कि बच्चे ने जो पढ़ा है वह उसे कितना समझ में आया है.

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    नई शिक्षा पॉलिसी से होगा सुसंगत

    मनीष सिसौदिया ने ये भी कहा कि दिल्ली राज्य शिक्षा बोर्ड केंद्र सरकार द्वारा लाई गई नई शिक्षा पॉलिसी से सुसंगत होगा. उन्होंने कहा कि हमने इसके लिए हाल ही में दो कमेटियां बनाई थीं. इस अगले साल लॉन्च करने का समय सबसे बेहतर है. शुरुआत में करीब 40 स्कूल इससे जुड़ेंगे जो कि सरकारी या प्राइवेट कोई भी हो सकते हैं.

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