बड़ी खबर: सरकार अगर परमिशन दे तो भी बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं पैरेंट्स

कोरोना संकट के कारण मार्च के महीने से ही पूरे देश के स्कूल-कॉलेज बंद हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)

कोरोना संकट के कारण मार्च के महीने से ही पूरे देश के स्कूल-कॉलेज बंद हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)

कोरोना संकट (Corona Crisis) के कारण बच्चों के स्कूल (Schools) लंबे समय से बंद हैं. माता-पिता और अभिभावकों का कहना है कि वो स्कूल खुलने के बावजूद अपने बच्चों को नहीं भेजने जा रहे हैं.

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बैंगलुरू. देश के कई राज्यों में स्कूलों और कॉलेजों को फिर से खोलने (Opening of Schools and Colleges) की लगातार चर्चा चल रही है. लेकिन बच्चों के माता-पिता का कहना है कि वो अपने बच्चों को किसी भी हालत में स्कूल नहीं भेजने जा रहे हैं. अगर सरकार इसके लिए अनुमति दे तो भी नहीं. इस संबंध में कर्नाटक के एजुकेशन मिनिस्टर सुरेश कुमार का कहना है कि इस बाबत किसी भी तरह का निर्णय लेने से पहले पैरेंट्स और इससे संबंधित अन्य लोगों की राय ली जाएगी. दरअसल, मंगलवार को कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) प्रदेश के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को दोबारा खोलने के संभावित तारीखों के साथ सामने आई. जबकि मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने साफ कर दिया गया है सभी पक्षों से बातचीत के बाद ही इसपर अंतिम निर्णय जुलाई के महीने में लिया जा सकता है.

'जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा निर्णय'

इस संबंध में स्थिति साफ करने के लिए प्रदेश के शिक्षा मंत्री एस सुरेश कुमार गुरुवार को सोशल मीडिया पर सामने आए. उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्कूलों को दोबारा खोलने से संबंधित निर्णय लेने के लिए पैरेंट्स और अन्य सभी पक्षों से राय ली जा रही है. साथ ही कहा कि इस संबंध में किसी भी तरह का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा.

गुरुवार को फेसबुक के माध्यम से मंत्री ने कहा कि मैं ये साफ कर देना चाहता हूं कि शिक्षा विभाग को स्कूलों को खोलने के लिए किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं है.
स्कूलों के संगठन ने कही ये बात

कर्नाटक के प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों से संबंधित संगठन ने इस तरह की जानकारी मिलने पर हर्ष जताया है. इस संबंध में संगठन के महासचिव डी शशि कुमार ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि इस तरह का कदम स्वागतयोग्य है. लेकिन बिना किसी प्लानिंग के वो चुनौती स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा कि जिस शिफ्ट सिस्टम के बारे में बात की जा रही है वो पूरी तरह अव्यवहारिक है.

उनका यह भी कहना है कि सबसे बड़ा मुद्दा ये है कि पैरेंट्स को इस बात का विश्वास नहीं है कि उनके बच्चे स्कूल में सेफ रह पाएंगे या नहीं. इस मुद्दे पर पैरेंट्स और अभिभावकों ने Change.org पर एक पिटीशन डाल रखा है.



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