15 अगस्त विशेष: पिंगली वेकैंया ने डिजाइन किया था भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा

पिंगली ने 1916 में ऐसे झंडे के बारे में सोचा जो भारतवासियों को एक धागे में पिरोकर रखें.

News18Hindi
Updated: August 15, 2019, 6:23 AM IST
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Updated: August 15, 2019, 6:23 AM IST
देशभर में स्वतंत्रता दिवस पूरे जोश-ओ-ख़रोश से मनाया जा रहा है. आज देश में हर संस्थान, स्कूल, कॉलेज के साथ-साथ मोहल्ले में, घरों की छतों पर तिरंगा लहराता दिखेगा. आज देश को आजाद हुए 72 साल पूरे हुए. हम सभी देशवासी 72 सालों से तिरंगे को अपनी आन बान शान बनाए हुए हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, ये तिरंगा बनाया किसने. आइए जानते हैं उसी शख्स के बारे में.

तिरंगे को पिंगली वेंकैया नामक शख्स ने डिजाइन किया था. वेंकैया का जन्म 2 अगस्त 1876 को हुआ था. वेंकैया ने प्रारंभिक शिक्षा भटाला पेनमरू और मछलीपट्टनम से प्राप्त की. 19 साल की उम्र में मुंबई चले गए. 19 साल की उम्र में ही ब्रिटिश आर्मी से जुड़े. अफ्रीका में एंग्लो-बोएर जंग में हिस्सा लेने के दौरान महात्मा गांधी से मिले. वहां उन्‍होंने सेना में नौकरी कर ली, और वहीं से उन्हें दक्षिण अफ्रीका भेज दिया गया.

गार्ड की नौकरी भी की
1899 से 1902 के बीच दक्षिण अफ्रीका के "बायर" युद्ध में भाग लिया. महात्मा गांधी उनके विचारों से प्रभावित हुए, स्वदेश लौटने पर मुंबई में रेलवे में गार्ड की नौकरी मिली.  इसी बीच मद्रास (अब चेन्नई) में प्लेग महामारी से बहुत से लोगों की मौत हुई. फिर उन्‍होंने गार्ड की नौकरी छोड़ी और मद्रास में प्लेग रोग निर्मूलन इंस्‍पेक्‍टर के पद पर काम करने लगे.

नेशनल फ्लैग मिशन
पिंगली ने 1916 में ऐसे झंडे के बारे में सोचा जो भारतवासियों को एक धागे में पिरोकर रखें. इस पहल को एस.बी. बोमान और उमर सोमानी का साथ मिला. तीनों ने मिल कर "नेशनल फ्लैग मिशन" की स्थापना की. वैकेंया ने राष्ट्रीय ध्वज के लिए महात्मा गांधी से सलाह ली. गांधी ने ध्वज के बीच में अशोक चक्र रखने की सलाह दी जो संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का संकेत है.

राष्ट्रीय ध्वज में रंग को लेकर तरह-तरह के वाद-विवाद चलते रहे थे. पिंगली लाल और हरे रंग की पृष्ठभूमि पर अशोक चक्र बना कर लाए. गांधी जी को वह ध्वज संपूर्ण भारत का प्रतिनिधित्व कर सकने वाला नहीं लगा.
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1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर, आजादी की घोषणा से कुछ दिन पहले ये प्रश्न आया अब राष्ट्रीय ध्वज को क्या रूप दिया जाए. इसके लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई. इस कमेटी ने तीन सप्ताह बाद 14 अगस्त को अखिल भारतीय कांग्रेस के ध्वज को ही राष्ट्रीय ध्वज के रूप में घोषित करने की सिफारिश की. 15 अगस्त 1947 को तिरंगा हमारी आजादी और हमारे देश की आजादी का प्रतीक बन गया.

डाक टिकट
तिरंगे का डिजाइन बनाने वाले पिंगली के सम्मान में भारत सरकार ने उनके नाम पर डाक टिकट जारी किया था. राष्ट्रीय ध्वज बनाने के बाद पिंगली वेंकैया का झंडा "झंडा वेंकैया" के नाम से लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया. 4 जुलाई, 1963 को पिंगली वेंकैया का निधन हो गया.

भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज को इसके वर्तमान स्‍वरूप में 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक में अपनाया गया. 15 अगस्‍त 1947 और 26 जनवरी 1950 के बीच तिरंगे भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाया गया था.

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First published: August 15, 2019, 6:23 AM IST
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