अलविदा प्रणब मुखर्जी: आपको पता है कितने पढ़े लिखे थे हमारे पूर्व राष्ट्रपति

अलविदा प्रणब मुखर्जी: आपको पता है कितने पढ़े लिखे थे हमारे पूर्व राष्ट्रपति
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सोमवार को निधन हो गया.

प्रणब मुखर्जी ने जुलाई 2012 में भारत के 13वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी. उन्हें 26 जनवरी 2019 में भारत रत्न (Bharat Ratna) से सम्मानित किया गया.

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  • Last Updated: August 31, 2020, 7:07 PM IST
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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) का 84 साल की उम्र में, 31 अगस्त 2020 को निधन हो गया. उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी (Abhijit Mukherjee) ने ट्वीट कर निधन की पुष्टि की. प्रणब मुखर्जी लंबे समय से बीमार थे. 31 अगस्त की सुबह ही उनके फेफड़ों में इंफेक्शन की पुष्टि हुई, जिसके बाद से उनकी हालात बिगड़ती गई.



2012 में बनें थे देश के राष्ट्रपति
प्रणब मुखर्जी ने जुलाई 2012 में भारत के 13वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी. 25 जुलाई 2017 तक इस पद पर रहे. प्रणब मुखर्जी को 26 जनवरी 2019 में भारत रत्न (Bharat Ratna) से सम्मानित किया गया. जानिए कितने पढ़े लिखे थे हमारे पूर्व राष्ट्रपति.



प्रणब मुखर्जी की एजुकेशन
11 दिसम्बर 1935, को पश्चिम बंगाल (West Bengal) के वीरभूम जिले में प्रणब मुखर्जी का जन्म हुआ था.  प्रणब मुखर्जी ने सूरी (बीरभूम) में सूरी विद्यासागर कॉलेज से पढ़ाई की, जो कि कलकत्ता विश्वविद्यालय (Calcutta University) से मान्यता प्राप्त था. बाद में उन्होंने राजनीति विज्ञान और इतिहास में एम.ए. और एल.एल.बी. की डिग्री हासिल की.

प्रणब मुखर्जी का करियर
वह कलकत्ता में डिप्टी अकाउंटेंट-जनरल (पोस्ट और टेलीग्राफ) के कार्यालय में अपर-डिविजन क्लर्क थे. 1963 में, वे कोलकाता के विद्यानगर कॉलेज में राजनीति विज्ञान के लेक्चरर (सहायक प्रोफेसर) बने. राजनीति में प्रवेश करने से पहले उन्होंने देशर डाक (Call of Motherland) के साथ पत्रकार के रूप में भी काम किया.

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मुखर्जी का राजनीति करियर
वह पहली बार 1969 में राज्यसभा पहुंचे थे. तत्कालीन प्रधानमंत्री, इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने इनकी योग्यता से प्रभावित होकर मात्र 35 वर्ष की उम्र में, 1969 में कांग्रेस पार्टी की ओर से राज्य सभा का सदस्य बना दिया. वे, 1975, 1981, 1993 और 1999 में राज्यसभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए. प्रणब मुखर्जी अपनी योग्यता के चलते सन् 1982 से 1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे और और सन् 1984 में भारत के वित्त मंत्री बने.
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