UGC की गाइडलाइन्स के खिलाफ पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों ने की भूख हड़ताल

 यूजीसी द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों से छात्र बहुत असंतुष्ट थे. (तस्वीर- प्रतीकात्मक)
यूजीसी द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों से छात्र बहुत असंतुष्ट थे. (तस्वीर- प्रतीकात्मक)

यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने सोसाइटी के लिए एक बयान जारी करते हुए कहा, यूजीसी ने छात्रों को बिना किसी आश्वासन के अस्पष्ट निर्देश जारी किए हैं.

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (university Grants Commission, UGC) फाईनल ईयर के एग्जाम को लेकर नई गाइडलाइन्स जारी की है. आयोग ने कहा, भारत भर में विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष की परीक्षा आयोजित कर सकते हैं. लेकिन पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा फैसला अच्छी तरह से नहीं लिया गया है. दरअसल 7 जुलाई 2020 को छात्रों ने कहा कि वे यूजीसी के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और अपनी मांगों को मानने तक भूख हड़ताल पर बैठे हैं.

UGC द्वारा 6 जुलाई, 2020 को जारी किए नए दिशानिर्देशों के अनुसार, भारत भर के सभी विश्वविद्यालयों को ऑफ़लाइन, ऑनलाइन या दोनों मोड में सितंबर तकअंतिम वर्ष की परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दी गई है.

दरअसल छात्र ये जानना चाहते हैं कि परीक्षा के समय वे किसी भी संक्रमण के करीब आते हैं तो कौन जिम्मेदार होगा, यूजीसी या कॉलेज. नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया, NSUI ने चंडीगढ़ के सेक्टर 35 में भूख हड़ताल शुरू की. यूजीसी द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों से छात्र बहुत असंतुष्ट थे.



छात्रों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए यूजीसी से, महामारी के बीच परीक्षा आयोजित करने के अपने फैसले को वापस लेने की मांग की. इसी दौरान वे भूख हड़ताल पर बैठे.
छात्रों में से एक ने कहा, “भारत में COVID में दुनिया में तीसरे नंबर पर है. क्या होगा अगर हम में से किसी को परीक्षा के समय संक्रमण हो जाए ? क्या सरकार कोरोना सकारात्मक मामलों में नंबर एक बनना चाहती है?

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यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने सोसाइटी के लिए एक बयान जारी करते हुए कहा, यूजीसी ने छात्रों को बिना किसी आश्वासन के अस्पष्ट निर्देश जारी किए हैं. लॉकडाउन लगाए जाने के बाद से कोई कक्षाएं नहीं लगाई गई हैं और छात्रों के पास अपर्याप्त अध्ययन सामग्री है. हम मांग करते हैं कि सभी सेमेस्टर की परीक्षा बिना शर्त रद्द कर दी जाए. असाइनमेंट और प्रोजेक्ट के लिए बराबर क्रेडिट दिया जाए.
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