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बागपत: टीन के नीचे शूटिंग प्रैक्टिस करते हैं ये बच्चे लेकिन नज़रें ओलंपिक मेडल पर

सौरभ चौधरी (फाइल फोटो)

कई बच्चे आस-पास के जिलों से आकर भी यहां किराए पर मकान लेकर शूटिंग सीख रहे हैं. UP Board Result, UP Board Result 2019, UP Result 2019, UP Board 10th Result, UP Board 12th Result, UP Board Ka Result, यूपी बोर्ड रिजल्ट, यूपी बोर्ड रिजल्ट २०१९

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    शनिवार को उत्तरप्रदेश का 10वीं और 12वीं का रिजल्ट आने वाला है. 12वीं के बाद से जिंदगी में करियर के लिए पढ़ाई और तैयारी की ढंग से शुरुआत हो जाती है लेकिन बागपत जिले की इस शूटिंग रेंज में शूटिंग करने वाले बच्चों के पास पहले से ही अपने करियर ही नहीं जीवन का लक्ष्य भी है. बागपत जिले के इस छोटे से कस्बे बिनौली में शूटिंग सीखने के लिए कुछ बच्चे आसपास के दूसरे जिलों से भी आए हुए हैं और यहां किराए पर रहकर प्रैक्टिस कर रहे हैं. शूटिंग भी भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहे खेलों में एक है. खेलों में करियर बनाने वालों के लिए इन बच्चों की कहानी एक प्रेरणा हो सकती है.

    इस शूटिंग रेंज से सीखकर कुछ बच्चे मेडल्स ला भी चुके हैं. मेडल्स लाने का यह सफर टीन शेड से शुरू हुआ था. उस वक्त यहां प्रैक्टिस करने वाले खिलाड़ियों को यह कोशिश करनी पड़ती थी कि तेज हवाएं शांत हो जाएं और उड़ती धूल बैठ जाए. कई बार ऐसा भी होता है कि आसपास के पेड़ों पर मौजूद बंदर उनके टिफिन चुरा ले जाते थे. लेकिन यही वो जगह थी जहां से 2015 की सर्दियों में एशियन गेम्स में 10 मी. एयर पिस्टल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने सौरभ चौधरी ने अपनी प्रैक्टिस की थी.

    टीनशेड में प्रैक्टिस से शुरू हुआ था शूटिंग क्लब
    यह दृश्य बागपत जिले के मंदिरों से घिरे बिनौली कस्बे का है. जहां 40 वर्षीय पूर्व शूटर अमित श्योराण अपना शूटिंग क्लब चलाते हैं. इस शूटिंग क्लब का नाम है वीर शाहमल राइफल क्लब. वे याद करके बताते हैं कि जहां सौरभ प्रैक्टिस करते थे वहां कोई पंखा नहीं था. बच्चे गर्मियों की सुलगती दोपहर में अपनी प्रैक्टिस बंद कर देते थे लेकिन सौरभ ऐसा नहीं करता था. वह तब केवल 13 साल का था. वह पूरी तरह से पसीने से तरबतर होता तब भी अपनी प्रैक्टिस जारी रखता था. वह पूरी तरह से अपने लक्ष्य पर फोकस रहता था जैसे कोई साधु हो.

    2016 में शूटिंग रेंज को तब आधे किमी दूर बना दिया गया जब वहां प्रैक्टिस करने वाले बच्चों के परिजनों ने श्योराण को एक जमीन का टुकड़ा गिफ्ट कर दिया. यह नया राइफल क्लब 15x12 वर्ग किमी का था और इसमें दो पंखें भी थे.

    सभी का लक्ष्य है ओलंपिक
    यह बहुत ज्यादा नहीं था लेकिन यहां प्रैक्टिस करने वाले 26 लड़कों के लिए, यह क्लब ही सपनों का थियेटर और तरक्की का रास्ता है. श्योराण बताते हैं कि उनके यहां ज्यादातर प्रैक्टिस करने वाले छोटे-छोटे किसानों के बच्चे हैं. हालांकि उनमें से कुछ बड़े किसानों के बच्चे भी हैं और एक घर बनाने वाले मिस्त्री का बच्चा भी है. ये सारे बच्चे जाट, मुस्लिम और ओबीसी जातियों से आते हैं.

    श्योराण बताते हैं कि ज्यादातर बच्चे किशोर हैं. कुछ 16 साल के सौरभ से भी छोटे हैं. ये सारे आस-पास के गांवों से आते हैं और रोज यहां 12 से 14 घंटे प्रैक्टिस करते हैं. इनमें से एयर राइफल शूटर मुजफ्फरनगर के शूटर महमूद वसीम, अमरोहा से आने वाले विशाल पन्नू जैसे लड़के भी हैं जो आस-पास किराए पर घर लेकर रह रहे हैं. वसीम कहता है कि मेरे लिए शूटिंग ही सबकुछ है. सभी लोगों ने शूटिंग रेंज में हमारा लक्ष्य ओलंपिक है का पोस्टर लगा रखा है और उसी पर निशाना लगाते हैं.

    रात में सोने से पहले कमरे में करते हैं प्रैक्टिस
    ये बच्चे पूरी तरह से फोकस हैं और रात-दिन तबतक प्रैक्टिस करते हैं जबतक लाइट नहीं चली जाती है. श्योराण कहते हैं कि योगी सरकार में हमें कम से कम 16 घंटे लाइट मिलने लगी है. पहले के दौर में हमें करीब 12 घंटे बिजली मिला करती थी. श्योराण बताते हैं कि पहले तो वे यह भी सिखाया करते थे कि अंधेरे में अपने कमरे में शूट कैसे करें. ऐसी ट्रेनिंग वे सोने से पहले बच्चों को कराते थे. ये था इसका तरीका-

    "अपने कमरे का दरवाजा बंद करें. लाइट भी बंद कर दें. खड़ें हों और अपने हाथ को आगे बढ़ाएं. यह सोचें कि आप अपने हाथों में एक बंदूक पकड़े हुए हैं. अपने दिमाग को अपने शरीर पर फोकस करें. देखें आपका शरीर बंधा हुआ तो नहीं है. शांति को महसूस करें लेकिन पानी जैसा महसूस करें."

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