देश के कई हिस्सों में छह महीने बाद खुले स्कूल, जानिए कैसा रहा नज़ारा

देश में करीब 6 महीने बाद स्कूल खुले हैं.
देश में करीब 6 महीने बाद स्कूल खुले हैं.

21 सितंबर को कई राज्यों में स्कूलों को खोला गया. लेकिन आमतौर पर स्टूडेंट्स की उपस्थिति कम ही रही. आइए जानते हैं कैसा रहा पहले दिन का स्कूलों में नजारा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 10:35 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के चलते पिछले छह महीने से बंद स्कूल सोमवार को खुले. कन्टेनमेंट जोन वाले इलाकों के अलावा कई राज्यों में स्कूल खुले. ग्यारहवीं और बारहवीं के स्टूडेंट्स के लिए स्कूल खुले. हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, थर्मल स्क्रीनिंग सभी चीजों की अनिवार्यता जारी रही लेकिन काफी कम बच्चे स्कूल में आए. माता-पिता को लिखित में यह देना था कि बच्चों को स्वेच्छा से स्कूल भेज रहे हैं. इसे लेकर अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने में कम ही रूचि दिखाई.

स्कूलों को खोला जरुर गया लेकिन बच्चों की संख्या कम ही रही और शिक्षक उनका इन्तजार ही करते थे. देश के कई राज्यों में स्थिति लगभग यही बनी रही. बिना मास्क वाले स्टूडेंट्स का स्कूल में प्रवेश वर्जित था. थर्मल स्क्रीनिंग में तापमान सामान्य आने पर ही प्रवेश दिया गया. सामाजिक दूरी सहित सभी नियमों का पालन करते हुए स्कूलों को खोला गया लेकिन माहौल एकदम फीका ही रहा. लिखित में देने की बात पर अभिभावकों का भी यही कहना है कि स्कूल जिम्मेदारी नहीं लेता है, तो हम लिखित में देकर बच्चे को स्कूल क्यों भेजें. हालांकि देश के कुछ हिस्सों में अब भी स्कूल खोलने का फैसला नहीं लिया गया है. जिन राज्यों में स्कूलों को मार्गदर्शन के लिए खोला गया, वहां भी नाम मात्र के स्टूडेंट्स आए.

आइए पहले दिन कुछ राज्यों के स्कूलों में कैसी रही रंगत:



हरियाणा
राज्य में स्कूलों को खोला जरुर गया लेकिन उपस्थिति न के बराबर रही. अभिभावकों ने लिखित में देने से मना करते हुए बच्चों को स्कूल नहीं भेजा. हालांकि कितने बच्चे पहले दिन स्कूलों में आए, इसमें कुछ अधिकारियों ने काफी कम संख्या मानी है. उनका यह भी मानना है कि पहला दिन होने के कारण कम संख्या में स्टूडेंट्स आए हैं और आने वाले दिनों में इसमें वृद्धि हो सकती है.

राजस्थान

राजस्थान में सरकारी और निजी स्कूल सोमवार को मार्गदर्शन के लिए खुले जरुर थे लेकिन इक्का-दुक्का स्टूडेंट ही पहुंचे. शिक्षकों को सिर्फ इन्तजार करते हुए ही देखा गया. तमाम नियमों का पालन करते हुए स्कूलों को खोला गया लेकिन स्टूडेंट्स और अभिभावकों ने कम रूचि दिखाई. कई अभिभावकों ने अनुमति के फॉर्म भरे लेकिन बच्चों को स्कूल नहीं भेजा.

जम्मू और कश्मीर

स्वास्थ्य और कोरोना वायरस के खतरे के कारण जम्मू और कश्मीर में भी स्कूलों में स्टूडेंट्स की संख्या काफी कम दिखाई थी. इन्फेक्शन के डर से अभिभावकों ने अपने बच्चों को जोखिम में नहीं डालने का फैसला लिया. हालांकि आगामी कुछ दिनों में स्थिति में बदलाव भी आ सकता है.

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असम

असम में पहले दिन स्कूलों का रंग फीका रहा. गुवाहाटी में एक स्कूल के प्रिंसिपल ने क्लास 11 और 12 में 5 से 10 प्रतिशत स्टूडेंट्स के आने की बात कही है. अभिभावक शुरुआती कुछ दिनों तक रेस्पोंस देखने के बाद बच्चों को भेजने का फैसला ले सकते हैं. ऑनलाइन क्लासें चलने के कारण भी स्टूडेंट्स स्कूलों में नहीं आए.
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