अब शिक्षकों को देनी होगी 'सेल्फी हाजिरी',बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किए नए निर्देश

सरकारी स्‍कूलों में शिक्षकों की लेटलतीफी से निपटने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एक अनूठा प्रयास खोज निकाला है.अब शिक्षकों को अपनी क्‍लास शुरू करने से पहले अपनी क्‍लास से सेल्‍फी खींचकर अफसर को पोस्‍ट करनी होगी.

News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 11:12 AM IST
अब शिक्षकों को देनी होगी 'सेल्फी हाजिरी',बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किए नए निर्देश
अब शिक्षकों को को सेल्‍फी से देनी होगी अटेडेंस
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Updated: July 18, 2019, 11:12 AM IST
सरकारी स्‍कूलों में शिक्षकों की लेटलतीफी से निपटने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एक अनूठा प्रयास खोज निकाला है.अब शिक्षकों को अपनी क्‍लास शुरू करने से पहले अपनी क्‍लास से सेल्‍फी खींचकर अफसर को पोस्‍ट करनी होगी. टीचर को ये काम सुबह आठ बजे से पहले करना होगा.ऐसा नहीं करने पर शिक्षकों की उस दिन की सैलरी कट जाएगी. विभाग ने इस प्रक्रिया को ‘सेल्फी अटेंडेंस मीटर’ का नाम दिया है. इसमें टीचरों को स्कूल पहुंचकर सबसे पहला काम एक सेल्फी लेकर विभाग के वॉट्सऐप ग्रुप पर पोस्ट करना है. इसी से उनकी स्कूल में उपस्थिति दर्ज मानी जाएगी.  शिक्षा का स्‍तर सुधारने के लिए उत्‍तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में ये कदम अपनाया गया है. इस जिले के बीएसए यानी कि बेसिक शिक्षा अधिकारी वीपी सिंह ने ये पहल की है.

बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देशानुसार बाराबंकी के स्‍कूलों में सुबह-सुबह तमाम टीचर हाथों में सेल्फी स्टिक लेकर सेल्‍फी पोस्‍ट करते हैं. कई बार वे अकेले-अकेले भी सेल्फी लेते हैं, तो कभी अपने साथी टीचरों के साथ, फिर उसे बीएसए के वेब पेज पर पोस्ट करते हैं, जिनकी नजर हर सेल्फी पर होती है. अगर वे ऐसा समय पर नहीं करते हैं तो उनकी उस दिन की सैलरी कट जाती है.  मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 700 शिक्षकों की तनख्‍वाह कट चुकी है.

वहीं इस नियम के जारी होने के बाद शिक्षकों में काफी नाराजगी है. उनका कहना है कि ये नियम सरासर गलत है. कभी कोई भी टीचर ट्रैफिक जाम में फंस सकता है. ज्‍यादातर टीचर्स ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, वहां पब्‍लिक ट्रांसपोर्ट आसानी से उपलब्‍ध नहीं होते. इंटरनेट की कनेक्टिविटी बेहद खराब होती है. ऐसे में शिक्षकों को बेहद समस्‍या होती है. वहीं एक महिला शिक्षक ने कहा कि मेरा ऑटो रेलवे क्रांसिग में फंस गया, जिसकी वजह से मैं लेट हो गया.

गौरतलब है कि दूरदराज़ के इलाकों में रहने की सुविधाएं न होने की वजह से तमाम टीचर शहरों में रहते हैं. वहां से स्कूल देर से जाते हैं. कई टीचर स्कूल नहीं जाते और अपनी जगह कम पैसे में गांव के किसी लड़के को पढ़ाने का काम दे देते हैं. कई महिला टीचर वक्त से नहीं पहुंचतीं. इन सबसे निपटने के लिए विभाग ने ये कदम उठाया है.

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First published: July 18, 2019, 11:06 AM IST
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