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SSC पेपर लीक मामला: अपॉइंटमेंट लेटर पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर

News18Hindi
Updated: November 7, 2019, 7:17 PM IST
SSC पेपर लीक मामला: अपॉइंटमेंट लेटर पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर
प्राथमिक जांच के आधार पर सीबीआई ने 22 मई 2018 को कई लोगों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया था.

याचिका के जरिये मामले के सभी शेष आरोपियों के खिलाफ अरोप पत्र दाखिल करने का सीबीआई को निर्देश देने की मांग की गई है.

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  • Last Updated: November 7, 2019, 7:17 PM IST
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कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की विवादों में रही 2017 की संयुक्त स्नातक स्तर (सीजीएल) परीक्षा में चयनित हुए उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगाने के लिये उच्चतम न्यायालय में एक नयी याचिका दायर की गई है. याचिका में शीर्ष न्यायालय द्वारा गठित सात सदस्यीय समिति के अपनी रिपोर्ट सौंपने तक सफल उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है.

न्यायालय ने नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिये भरोसेमंद परीक्षा कराने के उपाय सुझाने के लिये यह समिति गठित की थी. सरकारी नौकरी पाने के लिये हर साल एसएससी की परीक्षाओं में लाखों छात्र शामिल होते हैं. यह आयोग केंद्र सरकार के नियंत्रण क्षेत्र में आता है और विभिन्न मंत्रालयों एवं सरकारी विभागों में ‘ग्रुप सी’ तथा ‘ग्रुप डी’ श्रेणी में भर्तियों के लिये परीक्षाएं आयोजित करता है.

नयी याचिका शांतनु कुमार ने दायर की है. उन्होंने शीर्ष न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी की अध्यक्षता वाली समिति से एसएससी पर्चा लीक मामले में सीबीआई द्वारा सौंपी गई ‘केस डायरी’, आरोप पत्रों और एक निचली अदालत के जमानत आदेशों पर गौर करने का अनुरोध किया है.

याचिका में कहा गया है कि एसएससी के वार्षिक कैलेंडर से पता चलता है कि आयोग अगले चार-पांच महीनों में कई परीक्षाएं आयोजित करने जा रहा है. याचिका के जरिये आयोग को रिपोर्ट सौंपे जाने तक और समिति द्वारा कोई रिपोर्ट सौंपे जाने की स्थिति में उसे लागू किये जाने तक सीजीएल की कोई और परीक्षा लेने से रोकने का भी अनुरोध किया गया है.

अधिवक्ता गौरव गुप्ता के मार्फत दायर याचिका में कहा गया है कि एसएससी द्वारा ली गई सीजीएल-2017 परीक्षा में कदाचार के कई दृष्टांत प्रकाश में आए हैं. याचिका में कहा गया है कि 21 फरवरी 2018 को ली गई इस परीक्षा के दौरान कदाचार और अनियमितता बरते जाने के कई दृष्टांत प्रकाश में आए. परीक्षा से पहले उत्तर कुंजी सोशल मीडिया पर साझा किये जाने से जुड़ी अनियमितताएं भी दर्ज की गई.

याचिका में कहा गया है कि प्राथमिक जांच के आधार पर सीबीआई ने 22 मई 2018 को कई लोगों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया था. याचिका में कहा गया है कि सीबीआई की विस्तृत जांच के आधार पर मुख्य आरोपी अक्षय कुमार मलिक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जाना अब भी बाकी है और इसलिए निचली अदालत ने उसे जमानत दे दी.

इसमें कहा गया है कि सीबीआई को गिरफ्तारी की तारीख से 60 दिनों के अंदर सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करना था लेकिन प्रथम दृष्टया साक्ष्य के आधार पर सिर्फ दो आरोपियों के खिलाफ आंशिक आरोप पत्र दाखिल किया गया.
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याचिका के जरिये मामले के सभी शेष आरोपियों के खिलाफ अरोप पत्र दाखिल करने का सीबीआई को निर्देश देने की मांग की गई है. गौरतलब है कि इससे पहले कुमार ने याचिका दायर कर कथित पेपर लीक की जांच कराने और 2017 की परीक्षा रद्द करने की मांग की थी. (इनपुट-भाषा)

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First published: November 7, 2019, 7:17 PM IST
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