IAS Success Story: विदेश से लौटकर शुरू की तैयारी, बिना कोचिंग क्रैक किया एग्‍जाम

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Updated: September 3, 2019, 5:25 AM IST
IAS Success Story: विदेश से लौटकर शुरू की तैयारी, बिना कोचिंग क्रैक किया एग्‍जाम
IAS Success Story: IAS Success Story: विदेश से लौटकर शुरू की तैयारी, बिना कोचिंग क्रैक किया एग्‍जाम

IAS Success Story: जयपुर से ताल्‍लुक रखने वाली अनुकृति शर्मा ((Anukriti Sharma)) कभी भी सिविल सर्विसेज में नहीं जाना चाहती थीं, वे तो हॉयर स्‍टडी के लिए विदेश चली गई थीं.

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  • Last Updated: September 3, 2019, 5:25 AM IST
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IAS Success Story: साल 2017 में यूनियन पब्‍लिक सर्विस कमीशन (Union Public Service Commission,UPSC) की ओर से आयोजित हुई सिविल सेवा परीक्षा में जयपुर की अनुकृति शर्मा (Anukriti Sharma) ने 355th रैंक हासिल की थी. जयपुर से ताल्‍लुक रखने वाली अनु कभी भी सिविल सर्विसेज में नहीं जाना चाहती थीं, वे तो हॉयर स्‍टडी के लिए विदेश चली गई थीं लेकिन तभी एक दिन उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया कि उन्‍होंने सबकुछ छोड़कर इस फील्‍ड में आगे बढ़ने का फैसला कर लिया. अनुकृति ने बिना कोचिंग के इस परीक्षा में सफलता हासिल की.

बता दें कि अनुकृति ने जयपुर के इंडो भारत इंटरनेशनल स्कूल से इंटर कंप्लीट की है. इसके बाद अनुकृति ने साल 2012 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च कोलकाता से BSMS (जियोलॉजिकल साइंसेज) में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद अनुकृति ने नेट क्रैक कर लिया और बाद में उन्‍हें US की यूनिवर्सिटी में आगे पढ़ने का मौका मिला. इसी दौरान उनकी जिंदगी में कुछ ऐसा बदलावा आया कि उन्‍होंने सिविल सर्विसेज में आने का फैसला लिया.

अनुकृति को ऐसे आया ख्‍याल
अनुकृति ने मीडिया रिपोर्ट्स में एक किस्सा शेयर करते हुए बताया कि हमारे यहां एक भईया चाय की दुकान लगाते थे, जिनकी बेटी सिर्फ 14 साल की थी और उसकी शादी कर दी गई. तभी मुझे एहसास हुआ कि इस बच्ची की तुलना में मुझे तो काफी सुविधाएं मिलती हैं, जो करना चाहती हूं वो कर सकती हूं, जहां जाना चाहती हूं वहां जा सकती हूं. फिर मुझे लगा कि ऐसे लोगों के लिए कुछ करना चाहिए जिन्हें ये सुविधाएं नहीं मिल पातीं. इसके बाद से ही सिविल सर्विस का आइडिया आया, जिसके लिए मैंने फिर अपने टीचर से भी बात की.

anukrati sharma
अनुकृति शर्मा


विदेश से लौटकर की तैयारी
हालांकि कुछ वक्‍त के लिए यूपीएससी का आइडिया ड्राप हो गया था. वहां डेढ़ साल रहने बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे वहीं करना चाहती हैं जिसके बारे में उन्होंने पहले सोचा था. उन्हें लगा कि वे लोगों के लिए या समाज के लिए कुछ करना चाहती हैं, जिसके लिए सिविल सर्विस ही वह माध्यम है. ऐसे में वहां से आना और सबकुछ छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करना बहुत बड़ा फैसला था.
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घर ने किया सपोर्ट
अनुकृति कहती हैं कि इस फैसले के लिए घरवालों को समझाना काफी मुश्किल था, थोड़ा वक्त लगा लेकिन सभी मान गए. आज नतीजा सबके सामने हैं. अब सब खुश हैं.

ये हैं टिप्‍स
अनुकृति मानती हैं कि आपको जब भी लगे कि सिविल सर्विस की तैयारी करनी है तो घबराइए मत क्योंकि बहुत से ऐसे लोग हैं जो इसके लिए जॉब छोड़ते हैं या फिर कैंपस प्लेसमेंट को छोड़ देते हैं. ऐसे में जब आपको सफलता नहीं मिल रही हो तो हताश मत होईए बल्कि धैर्य रखिए और सोचिए कि मैं यहां क्यों हूं, और क्या करना चाहता हूं. ये आपको काफी मोटिवेट करेगा और आप फिर से उठ खड़े होंगे.

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First published: September 3, 2019, 5:20 AM IST
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