बड़ी बात: देशभर में लाखों छात्रों को देने ही होंगे एग्जाम, फैसले के बाद बढ़ी चिंता

इस साल कोरोना वायरस के चलते परीक्षा में देरी हुई है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के फाइनल ईयर के एग्जाम (Final Year Exam) रद्द नहीं किए जाएंगे.

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    भुवनेश्वर. यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों (Universities and Colleges) के फाइनल ईयर के एग्जाम (Final Year Exam) रद्द किए जाएंगे या नहीं, इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख अब साफ कर दिया है. इसके तहत परीक्षाएं रद्द नहीं की जाएंगी और देशभर के लाखों छात्र-छात्राओं को एग्जाम देने ही होंगे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट फाइनल ईयर व फाइनल सेमेस्टर के स्टूडेंट्स की चिंताएं बढ़ गईं हैं. वो इसलिए क्योंकि राज्य सरकारों द्वारा जून में ये परीक्षाएं रद्द करने के बाद से स्टूडेंट्स की पढ़ाई की लय टूट चुकी है.

    11 जून को राज्य सरकार ने रद्द कर दी थी परीक्षा
    इस बारे में उत्कल यूनिवर्सिर्टी के अंडरग्रेजुएट कोर्स के फाइनल ईयर के स्टूडेंट श्रीनिवास समल ने कहा, राज्य सरकार द्वारा 11 जून को परीक्षाएं रद्द करने के बाद से ही हम पढ़ाई पर फोकस नहीं कर रहे हैं. राज्य सरकार के अनुसार नतीजों के लिए अन्य विकल्प अपनाए जाने थे. मगर अब सुप्रीम कोर्ट ने ढाई महीने बाद फैसला दिया है कि परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी. ऐसे समय में जब राज्य सरकार के फैसले के बाद स्टूडेंट्स अगली क्लास की पढ़ाई में जुटे हुए थे उन्हें फिर से अब पिछली क्लास की परीक्षा की तैयारी करनी होगी.

    समीक्षा याचिका दायर की जाए
    इस बारे में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन आफ इंडिया के नेता निरंजन दास ने कहा, स्टूडेंट्स फाइनल सेमेस्टर एग्जामिनेशन में हिस्सा लेने की स्थिति में नहीं हैं. स्टूडेंट्स अब कॉमन पीजी एंट्रेंस टेस्ट की तैयारी भी कर रहे हैं. मगर हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं और ऐसे में राज्य सरकार को सुरक्षित परीक्षा की योजना बनानी चाहिए. मैं राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर समीक्षा याचिका दायर करने की अपील भी करता हूं.

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    यूजीसी की गाइडलाइंस के तहत आयोजित हों एग्जाम
    वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के ओडिशा के राज्य सचिव शशिकांत मिश्रा के अनुसार, राज्य सरकार को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन यानी यूजीसी की गाइडलाइंस के तहत फाइनल ईयर की परीक्षाएं आयोजित करनी चाहिए. हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं. हम परीक्षाएं रद्द करने के फैसले का लगातार विरोध कर रहे थे.

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