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इंटरनेट की स्पीड से पढ़ाई पर ना लगे ब्रेक, इसलिए नीम के पेड़ पर चढ़कर इतिहास पढ़ाता ये टीचर

कोलकाता से करीब 200 किलोमीटर दूर एक टीचर छात्रों को ऑनलाइन इतिहास पढ़ा रहा है.

कोलकाता से करीब 200 किलोमीटर दूर एक टीचर छात्रों को ऑनलाइन इतिहास पढ़ा रहा है.

मौजूदा समय में इंटरनेट की ज्यादा खपत के कारण कई बार टीचर्स को इंटरनेट की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है. इसी बीच एक टीचर ने इस समस्या का अलग तरह का समाधान निकाला है.

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    नई दिल्ली. देश भर में जारी लॉकडाउन के बीच कई स्कूल और कॉलेज पढ़ाई के हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए ऑनलाइन क्लासेस का सहारा ले रहे है. ऐसे में मौजूदा समय में इंटरनेट की ज्यादा खपत के कारण कई बार टीचर्स को इंटरनेट की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है. इसी बीच एक टीचर ने इस समस्या का ऐसा समाधान निकाला है, जो इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है.

    दरअसल 35 साल के सुब्रत पति इतिहास के शिक्षक हैं और कोलकाता से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित अपने गांव में नीम के पेड़ पर बैठकर अपने छात्रों को ऑनलाइन इतिहास पढ़ा रहे हैं.पश्चिम बंगाल के बनकुरा जिले के अहंदा गांव के रहने वाले सुब्रत पति के लिए इन दिनों क्लास का अनुभव काफी अलग हो गया है. कोलकाता के दो शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाने वाले सुब्रत के लिए ऑनलाइन क्लास लेना किसी जंग से कम नहीं है.

    उन्हें मोबाइल से क्लास लेनी होती है, लेकिन इंटरनेट की स्पीड ठीक नहीं होने के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामने करना पड़ रहा हैं. ऐसे में वह अच्छे नेटवर्क की तलाश में वह पेड़ पर चढ़ गए और यहां उन्होंने पाया कि इंटरनेट की स्पीड पहले से बेहतर है.

    पेड़ पर ही बनाया बैठने के लिए स्टैड
    अडामास यूनिवर्सिटी और आरआईसीई एजुकेशन से जुड़े सुब्रत रोजाना पेड़ पर चढ़ कर अपनी इतिहास की क्लास ले रहे हैं. उन्हें रोज दो से तीन क्लासेस लेनी होती है, इसलिए उन्होंने पेड़ की डालियों के बीच ही एक स्टैंड बना लिया और अब वहीं खाना और पानी साथ लेकर जाते हैं. सुब्रत बताते हैं कि वह लॉकडाउन के कारण परिवार के साथ रहने के लिए गांव आ गए हैं, लेकिन टीचर के रूप में अपनी जिम्मेदारी छोड़ी नहीं है.

    स्टूडेंट्स का मिल रहा पूरा सहयोग
    सुब्रत कहते हैं कि 'बढ़ती गर्मी से परेशानी होती है, तो कभी बारिश भी परेशान करती है. कई बार शौचालय भी नहीं जा पाता. पानी, धूप से बांस का बना प्लेटफॉर्म भी खराब हो जाता है, लेकिन मैं उसे फिर से ठीक कर एडजस्ट करने की कोशिश करता हूं. वह कहते हैं कि उनकी कक्षाओं में आम तौर पर छात्रों की उपस्थिति अधिक होती है. वह चाहते थे कि उनके छात्रों को नुकसान नहीं हो. स्टूडेंट्स मेरा आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और हमेशा बहुत सहयोग करते रहे हैं.

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