Success Story: इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर तीसरे अटेंप्ट में क्लीयर किया IAS एग्जाम

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Updated: September 11, 2019, 4:34 PM IST
Success Story: इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर तीसरे अटेंप्ट में क्लीयर किया IAS एग्जाम
पढ़ें IAS दिलीप प्रताप सिंह की कहानी.

पूरी जी-जान से तैयारी करने के बाद, प्रीलिम्स भी क्लीयर नहीं होने पर दिलीप मन ही मन डर रहे थे. लेकिन उन्होंने अगले अटेंप्ट की तैयारी बिना वक्त ज़ाया किए, शुरू कर दी.

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IAS Success Story: आज की सक्सेस स्टोरी के ज़रिए मिलिए दिलीप प्रताप सिंह से. दिलीप जोधपुर (राजस्थान) के गांव से हैं. ये साल 2018 की सिविल सर्विस परीक्षा में 72वीं रैंक हासिल कर आईएएस बने. जोधपुर के एक छोटे से गांव के दिलीप बचपन से मस्तमौला किस्म के छात्र रहे. स्कूल के दौरान उन्होंने अपने दिन खूब खेल-कूद और घूमने-फिरने में बिताए. खेल-कूद उन्हें बेहद पसंद था.

स्कूल के बाद दिलीप ने इंजीनियरिंग की डिग्री ली. कोर्स पूरा करने के बाद उन्हें नौकरी भी मिली. कॉलेज से पहले उन्हें UPSC के बारे में कुछ भी नहीं पता था नौकरी पाकर वे खुश तो थे, पर मन ही मन यूपीएससी एग्जाम देने का प्लान चल रहा था. इंजीनियरिंग फील्ड में मिली नौकरी जॉइन करने से पहले घर. घरवालों से शेयर किया कि उन्हें यूपीएससी एग्जाम देना है. परिवार ने उनके प्लान को पॉजिटिव लिया और उनका पूरा साथ दिया.

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया यूपीएसस की तैयारी शुरू करने से पहले वे अपने एजुकेशन बैकग्राउंड को लेकर कॉन्फीडेंट नहीं थे. उन्हें डर था वो परीक्षा क्रैक कर भी पाएंगे या नहीं. परिवार की रजामंदी और उनके साथ से दिलीप को बहुत हिम्मत मिली. परिवार ने उन्हें घर की जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए कहा, वो यूपीएससी की तैयारी करना चाहते हैं तो पूरे मन से करे.घर की चिंता ना करें. परिवार का साथ पाते ही वो हर चिंता से मुक्त होकर दिल्ली गए.

घर से सबकुछ छोड़कर तैयारी के लिए खुशी-खुशी दिल्ली आए दिलीप को यहां पहुंचकर अहसास हुआ कि तैयारी करने वाले वे इकलौते नहीं हैं. उन जैसे लाखों पहले से मौजद हैं. तैयारी कर रही भीड़ में खुद को बहुत पीछे पाकर उन्होंने अपनी कमर कस ली. दिलीप ने ठाना, भले ही यहां भीड़ में लाखों की लोग हैं पर वे बिना परीक्षा दिए नहीं जाएंगे. पहले अटेम्प्ट के लिए उन्होंने जमकर तैयारी की, लेकिन तब प्रीलिम्स भी क्लीयर नहीं हुआ.

पूरी जी-जान से तैयारी करने के बाद, प्रीलिम्स भी क्लीयर नहीं होने पर दिलीप मन ही मन डर रहे थे. लेकिन उन्होंने अगले अटेंप्ट की तैयारी बिना वक्त ज़ाया किए, शुरू कर दी. इस बीच दिलीप को निगेटिव और पॉजिटिव दोनों तरह के लोग मिले. कुछ ने हिम्मत दी तो कुछ ने तोड़ी. लोगों की सुनने के बाद उन्होंने तय किया चाहे जो हो जाए परीक्षा क्रैक करके रहेंगे.

अगले अटेम्प्ट की तैयारी की. दूसरी बार में वे प्रीलिम्स पास कर इंटरव्यू तक पहुंचे. लेकिन एग्जाम के अगले स्टेप के लिए उनके मन में डर था. डर के आगे उनकी हिम्मत ने घुटने टेक दिए और दिलीप इंटरव्यू क्रैक ही नहीं कर पाए. इसस बार की असफलता से उनके साथ-साथ परिवार भी टूटा. दिलीप की हिम्मत जवाब दे रही थी. उन्हें ऐसा लगने लगा था कि वे एग्जाम पास नहीं कर पाएंगे. लेकिन इन नकारत्मक ख़यालों को उनकी मां ने दूर किया.

दिलीप की मां ने उन्हें समझाया कि यहां तक आए हो तो कामयाबी भी मिलेगी. पीछे पलटना नहीं है. मां के शब्दो से उन्हें ऐसी हिम्मत मिली कि उन्होंने खुद को आखिरी अटेंप्ट देने के लिए तैयार किया. इस अटेंप्ट में पिछली बार की अपनी गलतियों से सीखा और पहले से ज्यादा फोकस रहकर एग्जाम दिया. तीसरी बार में परीक्षा को पास करने में सफल हुए.
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First published: September 11, 2019, 4:34 PM IST
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