SUCCESS STORY: हर दिन 2 रुपये कमाने वाली महिला आज है 2 हजार करोड़ की मालकिन

पुरुष प्रधान देश में दलित महिला का बिल्डर बनना लोगों को रास नहीं आया. मेरे नाम की सुपारी तक दी गई.

News18Hindi
Updated: July 11, 2019, 5:43 AM IST
SUCCESS STORY: हर दिन 2 रुपये कमाने वाली महिला आज है 2 हजार करोड़ की मालकिन
पद्मश्री कल्‍पना सरोज
News18Hindi
Updated: July 11, 2019, 5:43 AM IST
SUCCESS STORY: ये कहानी है एक ऐसी लड़की की जिसकी शादी बचपन में 12 साल की उम्र में कराई गई. उसके गांव में पक्के रास्ते तक नहीं थे. आज मुंबई में उसके नाम से, उसकी कंपनी के नाम से दो रोड हैं. जब उसने संघर्ष शुरू किया तो सपनों की नगरी में उसके पास रहने के लिए घर नहीं था. वह दूसरों के घर में, एक गुजराती फैमली के घर में रही. लेकिन बिल्डर बनकर घर बेच रही है. पढ़िए पद्मश्री कल्‍पना सरोज की कहानी उन्हीं की जुबानी.

भारतीय व्यवसायी कल्‍पना सरोज ने 2 रुपये रोज की कमाई से काम शुरू किया था. आज वे 2 हजार करोड़ रुपए की कंपनी की मालकिन हैं. कल्‍पना अपनी ये कहानी यू-ट्यूब प्लेटफॉर्म जोश Talks के साथ शेयर की. कल्‍पना को अच्छी एजुकेशन नहीं मिली. उनके मामा कहते थे, लड़कियों को पढ़ाकर करेगें क्या. उन्हें कुछ करना नहीं है. चूल्हा चौका ही करेंगी.

12 साल की उम्र उनकी शादी हुई. शादी के बाद भी ससुराल अच्छा नहीं मिला. उनके ससुराल में वहां बहुओं को मारा पीटा जाता है, गालियां दी जाती हैं. वे काम में गलती कर दें, खाने में नमक तेज हो जाए तो मां के लिए गालियां दी जातीं कि यही सिखाया है.

12 साल की कल्‍पना घर का सारा काम करती फिर भी गालियां खातीं. वे बताती हैं, उस घर में अगर हमने अपने बाल बांधने के लिए भी समय निकाल लिया तो ताने मिलते. जेठ बोलते कहां, नाचने जा रही हो. शादी के बाद किसी तरह छह महीनें बीत गए थे. फिर पिताजी मिलने आए तो मैं उनसे मिलकर बहुत रोई. इतने दिन बाद किसी अपने को करीब देखा. अपनी चंचल सी बेटी को खामोश देख बाबा फट पड़े. बोले मैं अब तुम्हें यहां एक पल भी रहने नहीं दूंगा. बाबा वहां से ले गए.



वो बोले सब एक बुरे सपने की तरह भूल जाओ. पिता ने फिर मुझे पढ़ाया. लेकिन समाज ने पिता की बुराई की. खराब आदमी है, बेटी को ससुराल से लाया. लोग मां-बाप को ताने मारते. मुझे कोसते. इन सभी बातों से इतना दम घुटा कि मर जाने का मन किया. एक रोज मैंने जहर पी लिया था. लेकिन फिर भी बच गई. कल्पना के बाबा पुलिस हवलदार थे.

जब कल्पना ने ज़हर खाया और वे बच गईं तो लोग उनसे मिलने आए. लेकिन उस समय उनसे मिलने आए लोगों ने भी ऐसी बातें बोलीं कि मर जाती तो लोग क्या कहते. महादेव की बेटी ने कुछ किया होगा तभी मरी. कल्पना बताती हैं कि यही वो समय था जब मैंने ठाना, कुछ कर के मरना है तो जीना क्यों नहीं. अब मैं जी कर दिखाऊंगी. फिर मैंने नौकरी ढूंढने की कोशिश की. सोचा पुलिस बन जाऊंगी लेकिन एजुकेशन कम थी. नहीं बन पाई. नर्स भी नहीं बन पाई. मां से कहा मुंबई भेज दो. सोचा बड़ी कंपनी में, Mil में काम कर लूंगी.
Loading...



कल्पना बताती हैं कि वह मुंबई आई. हौजरी कंपनी, सन मिल कंपाउंड लोरपरेल में काम पे लगी. वहां 2 रुपए रोज, 60 रुपए महीना से काम शुरू किया. 2-3 साल ऐसे ही बीते. बाबा मेरे पास आए. बहन बीमार हुई. उसकी मौत हो गई. तब पैसे कि अहमियत पता चली कि पैसे न हो तो हमारे अपने हमारे सामन दम तोड़ देते हैं. तब मैंने पैसे कमाने की ठानी. फिर मैंने सरकारी पॉलीसी के बारे में जाना. 50 हजार का लोन लिया. बुटीक के लिया. लेकिन बुटीक के साथ फर्नीचर का काम भी शुरू किया.

सुशिक्षित बेरोजगार संगठन योजना बनाई. मैंने अशिक्षित बच्चों को रोजगार देने की ठानी. लोग मुझे जानने लगे. लोग अपनी परेशानियां हल कराने के लिए मेरे पास आने लगे. इसी तरह एक बार एक प्लॉट का मसला हल करने के लिए लोग मेरे पास आए. इसी से मैं बिल्डर बनी. पुरुष प्रधान देश में दलित महिला का बिल्डर बनना लोगों को रास नहीं आया. मेरे नाम की सुपारी तक दी गई. लेकिन मैंने उसी वक्त वहां के पुलिस कमिशनर के पास गई. उन्होंने सिक्योरिटी ऑफर की. मैंने कहा, देना है तो रिवॉलवर लाइसेंस दे दीजिएगा. मैं अपनी रक्षा खुद करूंगी. फिर मैंने रिवॉलवर ली.

बिल्डर के बाद, मैं शुगर फैक्ट्री की डायरेक्टर बनी. कमानेटिव लिमिटेड के वर्कस मेरे पास आए. मैं वहां काम करने गई. कोर्ट ने वर्कर्स को मालिक बनाया और मालिक को साइड में खड़ा कर दिया. मैं मजदूरों के साथ रही. फिर 2006 में कोर्ट ने कंपनी मुझे चलाने के लिए दे दी. कोर्ट की शर्त थी 2011 में मुझे वहां से अलग होना है.

मुंबई में कल्‍पना सरोज के नाम पर दो रोड हैं, एक रामजीबाई कमानी और दूसरा रोड पुरला कमानी. ये वही रोड हैं जिनपर वे कभी पैदल चला करती थीं. क्योंकि बस में जाने के लिए पैसे नहीं हुआ करते थें. फिर वे iimt गवर्नर भी बनी. कभी नौकरी की तलाश में भटकने वाली लड़की आज पद्मश्री कल्‍पना सरोज बन हजारों लोगों को नौकरी दे रही है.


ये भी पढ़ें-
Bihar Animal Science University Recruitment 2019: 152 फैकल्टी पोस्ट्स के लिए 10 जुलाई तक करें अप्लाई
BPSC Mains 2019: बीपीएससी मुख्य परीक्षा की Answer Key जारी, ऐसे करें डाउनलोड
UPSSSC calendar 2019: 5709 पोस्ट के लिए UPSSSC के एंट्रेंस एग्जाम 28 जुलाई से, देखें पूरा कैलेंडर
First published: July 11, 2019, 5:43 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...