UPSC Success Story: आईएएस बनने 6 महीने के लिए कर लिया था खुद को कमरे में बंद, पढ़ें निधि की कहानी

83वीं रैंक हासिल करके आईएएस बनने वाली निधि सिवाच सक्सेस स्टोरी

UPSC Topper: आज आपको यूपीएससी परीक्षा 2019 में 83वीं रैंक हासिल करके आईएएस बनने वाली निधि सिवाच के बारे में बताएंगे.

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    Success Story Of IAS Topper Nidhi Siwach: आज आपको यूपीएससी परीक्षा 2019 में 83वीं रैंक हासिल करके आईएएस बनने वाली निधि सिवाच के बारे में बताएंगे. जिसके रास्ते में न जाने कितनी परेशानियां आईं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने अपना सपना पूरा करके दिखाया.

    उन्होंने बिना कोचिंग ज्वाइन किए यूपीएससी परीक्षा की तैयारी किये सफलता हासिल की. एक समय ऐसा भी आया जब डिस्ट्रेक्शन से बचने के लिए 6 महीनों के लिए उन्होंने अपने आप को कमरे में बंद कर लिया था.

    मैकेनिकल इंजीनियरिंग में हासिल की डिग्री

    हरियाणा के गुरुग्राम में जन्मी निधि अपने माता-पिता की पहली औलाद हैं. इंटरमीडिएट के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की थी. उसके बाद 2 साल तक उन्होंने हैदराबाद की कंपनी में जॉब किया. जहाँ उन्हें यह आभास हुआ कि उनकी मंजिल जॉब करना नहीं है. यहीं से उन्होंने यूपीएससी में सफलता प्राप्त करने का मन बना लिया और तीसरे प्रयास में आईएएस बन कर अपना सपना पूरा किया.

    डिफेंस छोड़कर शुरू की सिविल सर्विसेज की तैयारी 

    आपको यह बता दें कि हैदराबाद में दो साल काम करने के बाद भी निधि ने कभी सिविल सर्विसेस के बारे में नहीं सोचा था. निधि देश की सेवा करना चाहती थी इसलिए वह एएफसीएटी (AFCAT) परीक्षा में बैठीं और लिखित परीक्षा में सफलता भी हासिल की. लेकिन जब  वह एसएसबी इंटरव्यू में गई तब उन्हें कहा गया कि उन्हें डिफेंस की जगह सिविल सर्विसेज के बारे में सोचना चाहिए. यहाँ से उन्होंने यूपीएससी क्रैक करने के बारे में सोचना शुरू किया.

    घरवालों करना चाहते थे उनकी शादी

    निधि का मन नौकरी में नहीं लग रहा था और दूसरी तरफ उनके पिता शादी करने के लिए प्रेशर बना रहे थे. निधि को जिंदगी के इस पड़ाव पर शादी नहीं करनी थी इसलिए उन्होंने अपनी जिंदगी का मकसद ढूंढना शुरू किया और आखरी में सिविल सर्विसेज ट्रैक करने का मन बनाया. यूपीएससी में दो बार उन्हें असफलता मिली के बाद तीसरे प्रयास से पहले घर वालों ने उनके सामने एक शर्त रख दी. घरवालों ने निधि से कहा कि अगर इस प्रयास में वह सफलता हासिल नहीं कर पाई तो उन्हें शादी करनी पड़ेगी. उन्होंने यह शर्त मान ली और यूपीएससी के लिए मेहनत करना शुरू कर दिया. तीसरी बार में किस्मत ने भी उनका साथ दिया और उन्होंने सफलता प्राप्त कर अपना सपना पूरा कर लिया.

    6 महीने के लिए खुद को कमरे में बंद कर लिया

    निधि ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने खुद को 6 महीने तक के लिए कमरे में बंद कर लिया था. उनके मुताबिक घर में पढ़ना आसान नहीं होता क्योंकि आपको खुद को परिवार द्वारा होने वाले डिस्ट्रक्शन से बचाना पड़ता है. निधि ने पुरे तरीके से खुद को पढ़ाई में झोंक दिया था. उन्होंने किसी भी कोचिंग की मदद नहीं ली और न हीं किसी सोशल ग्रुप का हिस्सा बनीं. आखरी में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 83वीं रैंक हासिल किया.

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    निधि की दूसरे कैंडिडेट्स को सलाह

    यूपीएससी की तैयारी करने वाले कैंडिडेट को निधि लगातार मेहनत करने की सलाह देती हैं. वे कहती हैं कि हर बार कैंडिडेट का लक्ष्य परीक्षा में सफलता प्राप्त करना होता है लेकिन छोटी-छोटी गलतियाँ हमारी राह का रोड़ा बन जाती हैं. जब आप अपनी गलतियों को सुधार कर पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ परीक्षा में बैठेंगे तो आपको सफलता जरूर हासिल होगी. उन्होंने यह भी बताया कि यूपीएससी परीक्षा के दौरान आपको कई बार असफलता प्राप्त होगी मगर उससे निराश होने की जगह उससे सीख लेने की जरूरत होती है.

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