Success Story: कभी साइकिल का पंचर ठीक करता था ये IAS ऑफिसर

Success Story: बचपन में साइकिल का पंचर ठीक करने वाले वरुण आज एक IAS ऑफिसर है. ये उनकी अटूट मेहनत का नतीजा है कि उन्‍होंने साल 2013 में यूपीएससी की परीक्षा में 32वां स्थान हासिल किया.

News18Hindi
Updated: August 11, 2019, 4:13 PM IST
Success Story: कभी साइकिल का पंचर ठीक करता था ये IAS ऑफिसर
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Updated: August 11, 2019, 4:13 PM IST
Success Story: इरादे मजबूत हों तो कामयाबी कदम जरूर चूमती है. इस बात को सच कर दिखाया है महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर बोइसार के रहने वाले वरुण बरनवाल ने. बचपन में साइकिल का पंचर ठीक करने वाले वरुण आज एक IAS ऑफिसर है. ये उनकी अटूट मेहनत का नतीजा है कि उन्‍होंने साल 2013 में यूपीएससी की परीक्षा में 32वां स्थान हासिल किया. पिता की मौत और आर्थिक तंगी के इन हालातों में आखिर वरुण ने कैसे पाई सफलता आइए जानते हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स में वरुण ने बताया कि, ये उस वक्‍त की बात है, जब मैं दसवीं क्‍लास में था. मेरे पिता का निधन हो गया था. बस उसके बाद से ही मैंने सोच लिया था कि अब पढ़ाई नहीं करूंगा. पैसे कमाने के लिए साइकिल की दुकान पर काम करूंगा, क्‍योंकि मेरे पास पैसे नहीं थे लेकिन तभी दसवीं का रिजल्‍ट आया और मैंने  स्‍कूल में टॉप किया था. इसके बाद से मेरे घर वाले चाहते थे कि मैं पढ़ाई करूं. उनहोंने कहा कि तुम पढ़ाई करो. मां ने कहा, हम सब काम करेंगे, तुम पढ़ाई करो.



पढ़ाई के साथ दुकान

वरुण ने बताया कि 11वीं-12वीं मेरे जीवन के सबसे मुश्‍किल भरे साल रहे हैं. मैं सुबह 6 बजे उठकर स्कूल जाता था, जिसके बाद 2 से रात 10 बजे तक ट्यूशन लेता था और उसके बाद दुकान पर काम करता था.

प्रिसिंपल ने फीस की माफ

वरुण बताते हैं कि, इन हालातों में मैंने और ज्‍यादा मेनहत करनी शुरू की. मैंने ठान लिया था कि इतनी अच्‍छी तरह पढ़ाई करनी है कि प्रिसिंपल मेरी फीस माफ कर दें. आखिरकार हुआ भी वही मेरे मार्क्‍स अच्‍छे आए और प्रिसिंपल से रिक्वेस्ट की और उन्‍होंने फीस माफ कर दी. इस तरह से स्‍कूल की पढ़ाई पूरी हुई.
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दोस्‍तों ने भरी फीस

स्‍कूल की पढ़ाई पूरी करने  के बाद मैंने इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा  पास कर ली थी, जब इसकी फीस भरने की बारी आई तो मेरे परिवार, दोस्‍त, पिता के दोस्‍त सबने मिलकर मेरी मदद की. इंजीनियरिंग पास करते ही यूपीएससी की परीक्षाओं की तैयारी शुरू की.



ऐसे शुरू की सिविल सर्विसेज की तैयारी 

वरुण कहते हैं कि इंजीनियरिंग खत्‍म होने के बाद मेरी प्लेसमेंट अच्‍छी कंपनी में हुई लेकिन जब तक सिविल सर्विसेज परीक्षा देने का मन बना लिया था. मैंने मन तो बना लिया था लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि तैयारी कैसे करनी है, जिसके बाद  भाई ने मदद की.

आंखों में आ गए थे आंसू 

मीडिया रिपोर्ट्स में  वरुण ने बताया , जब यूपीएससी प्रिलिम्स का रिजल्ट आया तो 'मैंने भइया से पूछा कि मेरी रैंक कितनी आई है- जिसके बाद उन्होंने कहा 32. ये सुनकर वरुण की आंखों में आंसू आ गए हैं. उन्हें यकीन था अगर मेहनत और लगन सच्ची हो बिना पैसों के भी आप दुनिया का हर मुकाम हासिल कर सकते हैं.

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First published: August 11, 2019, 4:13 PM IST
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