Success Story: 10 KM चलकर जाती थी स्‍कूल, पढ़ें- MBBS AIIMS परीक्षा पास करने वाली J&K की इस लड़की की कहानी

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Updated: August 26, 2019, 10:43 AM IST
Success Story: 10 KM चलकर जाती थी स्‍कूल, पढ़ें- MBBS AIIMS परीक्षा पास करने वाली J&K की इस लड़की की कहानी
जम्‍मू-कश्‍मीर के राजौरी से पहली बार किसी महिला को एमबीबीएस एम्‍स में दाखिला प्राप्‍त हुआ है. (फोटो-ANI)

Success Story: देश की सीमा से सटे राजौरी में अच्‍छा स्‍कूल ना होने के कारण शमीम हर द‍िन दस क‍िलोमीटर का फासला तय कर स्‍कूल जाती थीं. जानिये, एम्‍स के एमबीबीएस कोर्स में कैसे मिला इन्‍हें दाखिला.

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Success Story: देश में स्‍कूलों और कॉलेजों की कमी नहीं है. लेकिन, 21वीं सदी के भारत में कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां अच्‍छी शिक्षा के लिये 10 किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है. सवाल यह है कि इस 10 किलोमीटर के फासले को कितने बच्‍चे पार कर पाते हैं. इसके लिये जुनून होना जरूरी है. आज हम जो सफलता की कहानी आपको बता रहे हैं, वह एक ऐसी ही लड़की की कहानी है, जिसने पढ़ाई पूरी करने के लिये, हर दिन पैदल चलकर इस 10 किलोमीटर की दूरी को पार किया और अपने सपनों को हकीकत में बदल द‍िया.

यह कहानी है जम्‍मू कश्‍मीर के राजौरी जिले की रहने वाली अर्हिम शमीम की, जिन्‍हें देश के प्रतिष्‍ठ‍ित संस्‍थान ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी एम्‍स (AIIMS) में दाखिला मिला है. शमीम ने जून में AIIMS MBBS की प्रवेश परीक्षा पास की और ऐसा करने वाली वह जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले की पहली गुर्जर लड़की बन गई हैं. शमीम के गांव का नाम धनौर है. धनौर बिलकुल देश की सीमा से सटा हुआ है. इसलिये, उनकी सफलता के मायने और भी बड़े हो जाते हैं. आए द‍िन आतंकी घुसपैठ और असुरक्षा के एहसास के बीच एम्‍स में उनका दाखिला, किसी सपने के पूरा होने जैसा ही तो है.

शमीम के ल‍िये एम्‍स की दहलीज तक पहुंचना बड़ी चुनौती थी, लेकिन उससे भी बड़ी मुश्‍कि‍ल थी, स्‍कूल की पढ़ाई, ज‍िसके ल‍िये उन्‍हें घंटों चलना पड़ता था. उनके गांव में या गांव के आसपास कोई अच्‍छा स्‍कूल नहीं था. इसलिये उन्‍हें गांव से दूर जाना पड़ता था. घर की खराब माली हालत भी रास्‍ते की बड़ी रुकावट थी. लेकिन उन्‍होंने इन मुश्‍कि‍लों के सामने कभी खुद को सरेंडर नहीं क‍िया. शमीम कहती हैं कि मुश्‍किलें और चुनौतियां तो हर किसी के जीवन में हैं. लेकिन सफलता सिर्फ उन्‍हें ही मिलती है, जो उन चुनौतियों को स्‍वीकार करते हैं और उनके लड़ते हैं. मैं भी बस वही किया.

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, शमीम का परिवार उनकी कामयाबी से बहुत खुश है और उन्‍हें एक कामयाब डॉक्‍टर बनते देखना चाहता है. शमीम के अभिभावक चाहते हैं कि वह एक अच्‍छी डॉक्‍टर बनकर जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों की मदद करें और देश की सेवा करें. शमीम के चाचा, उनकी इस सफलता पर बहुत खुश हैं. कहते हैं कि एम्‍स में पढ़ाई करने वाली इस क्षेत्र की वह पहली डॉक्‍टर होगी. शमीम ने सिर्फ अपने परिवार का ही नहीं, बल्‍क‍ि पूरे धनौर का नाम रौशन किया है. उनके चाचा ने बताया कि शमीम, सिर्फ पढ़ने में ही बल्‍क‍ि दूसरे क्षत्रों में भी उतनी ही अच्‍छी हैं. उनकी इस उपलब्‍ध‍ि पर जिला विकास आयुक्त, एजाज असद ने भी खुशी जाहिर की और उनकी सफलता की बधाई दी.

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First published: August 26, 2019, 10:34 AM IST
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