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Success Story: 12वीं में थे महज 39% नंबर, फिर IIT से की ग्रेजुएशन अब स्वीडन में करता है काम

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Updated: October 24, 2019, 4:34 AM IST
Success Story: 12वीं में थे महज 39% नंबर, फिर IIT से की ग्रेजुएशन अब स्वीडन में करता है काम
राजीव की कहानी साबित करती है, मेहनत से सब बदल जाता है.

राजीव ने 12वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए विकल्प तलाशे तो नंबर कम होने की वजह से ग्रेजुएशन मे दाखिला नहीं ले सके.

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Success Story:  आज की सक्सेस स्टोरी में न्यूज18 हिंदी पर एक ऐसे शख्स की कहानी से रूबरू होंगे जो साबित करती है, मेहनत से सब बदल जाता है. वर्तमान में स्थिति जो भी हो, यदि हम एक बार कुछ ठान लें और मेहनत के दम पर उसे पाने का भरोसा रखें तो सब मुमकिन है. सिर्फ खुद पर भरोसा ही ऐसा विश्वास है जो हमें हर ना-मुमकिन को मुमकिन करने की हिम्मत देती है. आज की कहानी में मिलिए राजस्थान के राजीव दांतोड़िया से.

राजस्थान के मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे राजीव दांतोड़िया की पढ़ाई सामोद और धौलपुर में हुई. राजीव उस दौर में बड़े हुए हैं, सालान एग्जाम परीक्षा का इंतजार इसलिए किया जाता ताकि किताबें बेचकर मिलने वाले पैसे से क्रिकेट बॉल खरीद सकें. सालाना पेपरों के खत्म होने के इंतजार के पीछे की वजह जाहिर करती है वे पढ़ाई के लिए कितने गंभीर थे.

पढ़ाई के लिए ऐसी लापरवाही के चलते साल 1995 में राजीव 12वीं में 39% नंबरों से पास हुए. इसमें भी कैमिस्ट्री में कुछ नंबर की ग्रेस मिली थी. आगे की पढ़ाई के लिए विकल्प तलाशे तो नंबर कम होने की वजह से ग्रेजुएशन मे दाखिला नहीं ले सके. इसी दौरान राजीव का का भाई आईआईटी परीक्षा के लिए फॉर्म भर रहा था. राजीव ने भी एग्जाम देने का फैसला किया.

राजीव ने आईआईटी-जेईई देने का फैसला तो किया लेकिन हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़ने की वजह से इंग्लिश लैंग्वेज पर उनकी पकड़ कमजोर थी. तैयारी के लिए कोचिंग सेंटर का रुख किया. पर वहां उनसे कहा गया कि आपके नंबर इतने नहीं कि यह टेस्ट दे सकें. फिर वे पढ़ाई के लिए गंभीर हुए. इसकी शुरुआत स्थानीय बुक सेलर की तरफ से सजेस्ट की कुछ कितबों को पढ़ने से की.

राजीव ने इंग्लिश बेहतर करने के लिए हिंदी टू इंग्लिश की डिक्शनरी से मदद ली. घर से ही पढ़ाई शुरू की. पढ़ाई में मज़ा आने लगा, उनकी हिम्मत भी बढ़ने लगी. 1995 में 12वीं करने वाले राजीव ने 2000 में आईआईटी-जेईई क्रैक किया. इसके बाद राजीव ने आईआईटी-खड़गपुर से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट में 5 साल की डुअल डिग्री हासिल की. स्वीडन की Lulea यूनिवर्सिटी से पीएचडी में दाखिला लिया. वे स्वीडन की Tetra Pak कंपनी में बतौर सीनियर एनालिटिक्स रिलायबिलिटी इंजीनियर काम कर रहे हैं. (कहानी- द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक)

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First published: October 24, 2019, 4:34 AM IST
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