Success Story: कभी बहुत मुश्किल से जुटाए थे ट्रेन के टिकट के पैसे, आज कमा रहा है लाखों

11वीं के बाद धनंजय जैसे-तैसे किराए का इंतजाम कर पटना सुपर-30 टेस्ट देने पहुंचे.

News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 1:03 PM IST
Success Story: कभी बहुत मुश्किल से जुटाए थे ट्रेन के टिकट के पैसे, आज कमा रहा है लाखों
प्रेरणात्मक कहानियां सुनकर 10वीं में ठाना इंजीनियरिंग करेंगें
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Updated: July 22, 2019, 1:03 PM IST
Success Story: उम्मीद और भरोसे पर तो दुनिया क़ायम है. बिहार के समस्तीपुर जिले के जलालपुर गाँव के धनंजय कुमार को बी खुद पर भरोसा ही था. इसी भरोसे के दम पर वे कामयाब हुए. आज की सक्सेस स्टोरी में जानिए उन्हीं की कहानी.

धनंजय 7 सदस्यों के परिवार का हिस्सा हैं. उनके पिता व्यवसाय के रूप में छोटी सी किराने की दुकान चलाते थे. धनंजय पिता का हाथ बंटाते थे. उन्होंने पांचवी क्लास तक गांव में ही पढ़ाई की. पांचवी के बाद गांव के अच्छे परिवार के बच्चे प्राइवेट स्कूल जाते थे. पर धनंजय ने सरकारी स्कूल में ही दाखिला लिया. स्कूल की हालत खस्ता थी, घर पर किताबें लाकर पढ़ते. पेपर देने के लिए स्कूल जाते. उन्होंने 12वीं तक सेल्फ-स्टडी से पढ़ाई पूरी की.

‘मैथवर्क्स‘ में प्लेसमेंट
भारत में जानी-मानी अमेरिकी कंपनी ‘मैथवर्क्स‘ में प्लेसमेंट पाने वाले धनंजय कुमार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आईआईटी खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने वाले 23 वर्षीय धनंजय जिस परिवार से आते हैं, वहां किसी ने उनसे पहले कभी आईआईटी या इंजीनियरिंग के बारे में सुना भी नहीं था.



‘सुपर 30’ 
अपनी 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई धनंजय ने इसी तरह सेल्फ-स्टडी करते हुए पूरी की. पढ़ाई के साथ-साथ वे दुकान में भी पिता का हाथ बंटाते. उनके यहां टीवी नहीं था. बाहर की दुनिया को रेडियो और अख़बार से जाना, समझा. अख़बार से ही IIT- JEE के बारे में पता चला. रेडियो के ज़रिए प्रेरणात्मक लोगों की कहानियां सुनकर 10वीं में ठान लिया कि वे आगे चलकर इंजीनियरिंग करेंगें. दसवीं पास करने के बाद धनंजय का परिवार उन्हें कोचिंग करवा सकने लायक नहीं था.धनंजय को उस समय ‘सुपर 30’ आशा कि किरण लगा.
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पहले अटेम्पट में टेस्ट क्लियर
11वीं के बाद धनंजय जैसे-तैसे किराए का इंतजाम कर पटना सुपर-30 टेस्ट देने पहुंचे. आनंद कुमार ने उनका इंटरव्यू लिया. सुपर-30 का हिस्सा बनना धनंजय के जीवन का सबसे बड़ा बदलाव था. धनंजय ने पहले अटेम्पट में टेस्ट क्लियर किया. पर दाखिला NIT में मिल रहा था. उन्होंने एक बार फिर तैयारी की. 2015 में अच्छी रैंक से परीक्षा पास करके उन्होंने IIT खड़गपुर में दाखिला लिया.

IIT की परीक्षा तो पास की. लेकिन काउंसलिंग फीस के नहीं थे. उनकी मदद आनंद कुमार ने ही की. IIT में पढ़ाई की फीस के एक लाख रुपये के लिए कैंपस में मौजूद बैंक से ही एजुकेशन लोन मिला. बंगलुरु स्थित अमेरिकी कंपनी ‘मैथवर्क्स’ में जॉब मिली. यह कंपनी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम करती है. धनंजय अभी ट्रेनिंग पीरियड में हैं, शुरूआती पैकेज ही लाखों में है.

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First published: July 22, 2019, 12:36 PM IST
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