83 साल की उम्र में इंग्लिश में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले सोहन सिंह की ऐसी है कहानी

83 साल की उम्र में इंग्लिश में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले सोहन सिंह की ऐसी है कहानी
कहावत को एक 83 साल के बुजुर्ग ने साकार करके दिखा दिया है. सोहन सिंह गिल नाम के इस सख्श ने 83 साल की उम्र में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है.

Motivational Story: सोहन सिंह गिल नाम के इस सख्श ने 83 साल की उम्र में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है. सोहन सिंह को वार्षिक दीक्षांत समारोह में स्टर की डिग्री से सम्मानित किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2020, 5:26 PM IST
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नई दिल्ली. एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती. इस कहावत को एक 83 साल के बुजुर्ग ने साकार करके दिखा दिया है. सोहन सिंह गिल नाम के इस सख्श ने 83 साल की उम्र में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है. सोहन सिंह को वार्षिक दीक्षांत समारोह में स्टर की डिग्री से सम्मानित किया गया है. वह 61 साल से मास्टर की पढ़ाई पूरी करना चाहते थे.

कौन हैं सोहन सिंह, जिन्होंने बनाया रिकार्ड
सोहन सिंह गिल का जन्म 15 अगस्त, 1936 को होशियारपुर के गांव दात्ता कोट फतूही में हुआ था. उन्होंने प्राइमरी स्कूल पंडोरी गंगा सिंह में पहली से तीसरी कक्षा, मिडिल स्कूल खैरड अच्छरवाल में 6वीं उर्दू की पढ़ाई की. खालसा हाईस्कूल माहलपुर में 1953 में दसवीं कक्षा पास की. इसके बाद श्री गुरु गोबिंद सिंह खालसा स्कूल माहिलपुर में चार वर्षों की 1957 में बीए पास की. उसके बाद 1957-58 में बैचलर टीचिंग खालसा कॉलेज अमृतसर से की. उस समय बीएड नहीं हुआ करता था.

होशियारपुर के सोहन सिंह गिल एक समय लेक्चरर भी रहे. सोहन सिंह ने 83 साल की उम्र में एमए इंग्लिश की डिग्री हासिल कर इसी जज्बे का परिचय दिया. वह पूर्वी अफ्रीकी केन्या में शिक्षा के क्षेत्र में 33 साल तक सेवाएं देकर देश लौटे और फिर यहां की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करके अपनी 61 साल पुरानी इच्छा पूरी की. 2019 में उन्हें लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मास्टर की डिग्री दी गई.



बता दें कि होशियारपुर के सोहन सिंह इंटरनेशनल हॉकी में ग्रेड अपांयर भी रहे हैं. उन्होंने केन्या हॉकी अंपायर्स एसोसिएशन में 6 साल काम किया और उसके सचिव पद पर भी रह चुके हैं. कोस्ट हॉकी एसोसिएशन के चेयरमैन के दौर पर भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं. सोहन सिंह कहते हैं कि 1958 में केन्या के लिए वीजा खुला था. तब वे अपने साडू सेवा सिंह बड़ैच के साथ वहां चले गए थे. उस समय चार रुपये किराया हुआ करता था. वाइस प्रिंसिपल वरियाम सिंह कहते थे कि एमए इंग्लिश लें.



उनके मन में भी इंग्लिश में एमए की डिग्री लेने की इच्छा थी. ऐसे में केन्या में रहते हुए भी एमए इंग्लिश के सपने आते थे. एक तरह से अधूरी ख्वाहिश का सपना रह रहकर सताता था. रिटायरमेंट के बाद देश लौटेने पर यहां के स्कूलों में पढ़ाने लगे.

रिटायरमेंट के बाद की पढ़ाई
सोहन साल 2017 में रिटायर हो गए. रिटायरमेंट के बाद गांव में बैठे-बैठे अधूरी ख्वाहिश पूरी करने का विचार आया. इसे पूरा करने के लिए पत्नी जोगिंदर कौर ने भी हौसला दिया. बेटा अमेरिका में बतौर इंजीनियर सेटल है. वहां से बेटे ने भी हिम्मत बढ़ाई.

इसके बाद 10 अक्टूबर को 1958 में समुद्री जहाज से वह केन्या के लिए रवाना हो गए. 18 अक्टूबर मुंबासा (केन्या) पहुंचे. दो महीने नवंबर-दिसंबर रेस्ट किया जिसके बाद इंडियन प्राइमरी स्कूल में नौकरी मिली. केन्या में उस समय 7वीं तक प्राइमरी हुआ करती थी, जो अब बढ़कर 8वीं तक हो गई है.

उन्होंने 6 साल तक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाया, दो साल मिडिल स्कूल में पढ़ाया और उसके हेड मास्टर बने. उसके बाद टीचर कॉलेज केन्या में 25 साल तक सेवाएं दी. 31 अगस्त 1991 में वे रिटायर हुए और फिर तीन अक्टूबर, 1991 को वापस भारत लौट आए. आपको बता दें, सोहन सिंह गिल हॉकी और फुटबॉल के कॉलेज टाइम से ही खिलाड़ी रहे हैं.

वे इंडियन हॉकी टीम के कैप्टन जरनैल सिंह के साथ भी खेल चुके हैं. आज वह मास्टर की डिग्री हासिल करके काफी खुश है. एक स्वस्थ जीवन शैली और सकारात्मक सोच ने उन्हें आगे बढ़ाया है. उनका कहना है जो मैं चाहता था वो पूरा कर लिया है. अब मैं बच्चों के लिए किताबें लिखना चाहता हूं.

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