ग्रेजुएट हैं तो नहीं कर सकते बैंक में चपरासी की नौकरी, जानें HC का ये फैसला

हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान ये आदेश दिया (सांकेतिक फोटो)
हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान ये आदेश दिया (सांकेतिक फोटो)

दास ने चपरासी के पद के लिये आवेदन किया लेकन इसमें यह जानकारी नहीं दी कि उसके पास 2014 से ही स्नातक की डिग्री है और उसने सिर्फ 12वीं पास होने का ही जिक्र किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2020, 2:19 PM IST
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नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने यह दलील अस्वीकार कर दी कि ज्यादा योग्यता, अयोग्यता का आधार नहीं हो सकती और उसने पंजाब नेशनल बैंक के एक चपरासी की सेवायें समाप्त करने का आदेश बरकरार रखा, क्योंकि उसने स्नातक होने का तथ्य छिपाया था.

न्यायालय के दो आदेश निरस्त
शीर्ष अदालत ने उड़ीसा उच्च न्यायालय के दो आदेशों को निरस्त कर दिया. इन आदेशों में न्यायालय ने बैंक से कहा था कि चपरासी को अपनी सेवायें करते रहने दिया जाये. शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने या गलत जानकारी देने वाला अभ्यर्थी सेवा में बने रहने का दावा नहीं कर सकता.’’

अभ्यर्थी स्नातक नहीं होना चाहिए
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह ने बैंक की अपील पर यह फैसला सुनाया और इसमें इस तथ्य को भी इंगित किया कि इसके लिये विज्ञापन में स्पष्ट था कि अभ्यर्थी स्नातक नहीं होना चाहिए.



योग्यता को चुनौती देने की बजाय अपनी योग्यता छिपाई
न्यायालय ने कहा कि अमित कुमार दास ने योग्यता को चुनौती देने की बजाय अपनी योग्यता छिपाते हुये नौकरी के लिये आवेदन किया था. शीर्ष अदालत ने कहा कि दास ने जानबूझकर अपने स्नातक होने की जानकारी छिपायी और इसलिए प्रतिवादी को उसे चपरासी के पद पर अपना काम करते रहने का निर्देश देकर उच्च न्यायालय ने गलती की.

महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई
शीर्ष अदालत ने अपने एक पहले के फैसले का उल्लेख करते हुये कहा कि महत्वर्ण जानकारी छिपाना और गलत बयानी करना कर्मचारी के चरित्र और उसके परिचय पर असर डालता है.

आवेदक 12वीं या इसके समकक्ष उत्तीर्ण हो
पीठ ने इस तथ्य का भी जिक्र किया कि बैंक ने समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर चपरासी के पद के लिये आवेदन मंगाये थे जिसमे स्पष्ट किया गया था कि एक जनवरी, 2016 की तिथि के अनुसार आवेदक 12वीं या इसके समकक्ष उत्तीर्ण होना चाहिए लेकिन वह स्नातक नहीं होना चाहिए.

न्यायालय ने कहा कि विज्ञापन में उल्लिखित पात्रता के अनुसार स्नातक व्यक्ति इस पद के लिये आवेदन के योग्य नहीं था.

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12वीं पास होने का ही जिक्र किया था
न्यायालय ने कहा कि दास ने चपरासी के पद के लिये आवेदन किया लेकन इसमें यह जानकारी नहीं दी कि उसके पास 2014 से ही स्नातक की डिग्री है और उसने सिर्फ 12वीं पास होने का ही जिक्र किया था.
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