Success Tips: पिता थे ऑटो ड्राइवर, किताबों की जिल्द बांधने वाले लड़के ने क्रैक किया एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस एग्जाम

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Updated: August 27, 2019, 1:49 PM IST
Success Tips: पिता थे ऑटो ड्राइवर, किताबों की जिल्द बांधने वाले लड़के ने क्रैक किया एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस एग्जाम
सुरेश सिंह ने कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस एग्जाम क्रैक किया है.

Success Story: लएग्जाम की तैयारी के लिए अपना संघर्ष बयां करते हुए सुरेश ने बताया कि पिता की मौत के बाद किताबों पर जिल्द चढ़ाने के काम क‍िया.

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Success Story: न्यूज18 हिंदी पर आप हर दिन एक ऐसी हस्ती की कहानी पढ़ते हैं जिसने विषम परिस्थितियों से लड़कर अपने फील्ड में कामयाबी हासिल कर मिसाल कायम की. आज की कहानी जम्मू-कश्मीर के एक जिल्द बांधने वाला लड़के की है. जिसने कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस एग्जाम क्रैक कर 10वीं रैंक हासिल की. सुरेश सिंह जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के रामनगर तहसील के इंचा गांव से हैं. सुरेश के पिता ऑटो रिक्शा ड्राइवर हैं.

सुरेश ने ANI को इंटरव्यू में बताया कि एग्जाम क्लीयर करना उनके लिए सामान्य परेशानियां झेलने से बहुत मुश्किल था. लेकिन उनके पिता का सपना था कि बेटा अच्छी नौकरी पाए. सुरेश के लिए उनकी प्रेरणा, उनके पिता ही थे. उन्होंने पिता को ख्वाब को पूरा करने के लिए दिन-रात जी-तोड़ मेहनत कर इस एग्जाम को क्लीयर कर दिखाया.

कश्मीर प्रशासनिक सेवा में 10वीं रैंक हासिल करने से सुरेश सिंह के परिवार वाले उनकी सफलता से खुश हैं. सफलता के पीछे सिर्फ और सिर्फ उनकी तैयारी है. किताबों पर जिल्द चढ़ाते चढ़ाने काम करते करते, किताबों से उनकी दोस्ती हो सी गई. उन्होंने अपने काम के साथ-साथ परीक्षा की तैयारी करी. किताबों से प्यार का परिणाम उन्होंने परीक्षा पास करके दिखाया.

सुरेश मानते हैं सफलता के पीछे माता-पिता की दुआएं हैं, मैंने उनकी प्रेरणा से सफलता पाई. पिता का सपना था उन्हें अच्छी नौकरी मिले और आज जब सुरेश ने उनके सपने को पूरा कर दिया तो वे उसे देखने, महसूस करने के लिए नहीं हैं.

एग्जाम की तैयारी के लिए अपना संघर्ष बयां करते हुए सुरेश ने न्यूज एजेंसी को बताया कि पिता की मौत के बाद किताबों पर जिल्द चढ़ाने के काम में मां ने मदद की. इस काम से साथ सुरेश ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना भी शुरू किया. वे जम्मू यूनिवर्सिटी जाकर पढ़ाई करते थे. उन्होंने कोचिंग भी नहीं ली. उनके लिए पढ़ाई के स्रोतों में से एक इंटरनेट रहा. आज सुरेश की मां बेहद खुस हैं कि उनके बेटे ने अपने पिता के ख्वाब को पूरा किया.

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First published: August 27, 2019, 5:08 AM IST
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