तमिलनाडु सरकार ने खारिज किया 'नई शिक्षा नीति' का तीन भाषा का प्रावधान

तमिलनाडु सरकार ने खारिज किया 'नई शिक्षा नीति' का तीन भाषा का प्रावधान
पलानीस्वामी ने कहा कि राज्य में कई दशक से दो भाषा की नीति का पालन किया जा रहा है

पलानीस्वामी ने कहा, तमिलनाडु कभी केंद्र की तीन भाषा की नीति का पालन नहीं करेगा. राज्य दो भाषा (तमिल और अंग्रेजी) की अपनी नीति पर कायम रहेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 3, 2020, 4:53 PM IST
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नई दिल्ली. तमिलनाडु सरकार ने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (एनईपी) में प्रस्तावित केंद्र के तीन भाषा के प्रावधान को सोमवार को खारिज कर दिया और कहा कि राज्य में दशकों से लागू दो भाषा की नीति पर ही अमल किया जाएगा. अन्नाद्रमुक सरकार ने कहा कि वर्तमान प्रणाली से विचलन नहीं होगा.

एनईपी में तीन भाषा के प्रस्ताव पर आपत्ति
एनईपी में तीन भाषा के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने कहा कि राज्य में कई दशक से दो भाषा की नीति का पालन किया जा रहा है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा.

केंद्र की तीन भाषा की नीति का पालन नहीं
पलानीस्वामी ने कहा, तमिलनाडु कभी केंद्र की तीन भाषा की नीति का पालन नहीं करेगा. राज्य दो भाषा (तमिल और अंग्रेजी) की अपनी नीति पर कायम रहेगा. उन्होंने कहा, एनईपी में तीन भाषा का फॉर्मूला दुखद और पीड़ादायी है. प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) को तीन भाषा की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए.



भाषा नीति पर ही कायम
इससे पहले द्रमुक समेत विपक्ष ने मांग की कि सरकार को एनईपी में प्रस्तावित तीन भाषा प्रावधान को खारिज करना चाहिए और दो भाषा नीति पर ही कायम रहना चाहिए. संयोगवश, मामले पर चर्चा के लिए आज बुलाई गई मंत्रिमंडल की बैठक से पहले द्रमुक के नेतृत्व में विपक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नई एनईपी के विरोध में मंत्रिमंडल में प्रस्ताव स्वीकार करने को कहा था.

राज्यों को अपनी नीति लागू करने दें
पलानीस्वामी ने कहा कि केंद्र सरकार को इस विषय पर राज्यों को अपनी नीति लागू करने देनी चाहिए. विधानसभा में विपक्ष के नेता एम. के. स्टालिन ने इसे हिंदी तथा संस्कृत थोपने का प्रयास बताया.

मुख्यमंत्री ने सचिवालय में मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने कहा, तमिलनाडु कभी केंद्र की तीन भाषा की नीति का पालन नहीं करेगा. राज्य अपनी दो भाषा (तमिल और अंग्रेजी) की नीति पर कायम रहेगा.

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पलानीस्वामी ने कहा, एनईपी में तीन भाषा का फॉर्मूला दुखद और पीड़ादायी है. प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) को तीन भाषा की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए. पलानीस्वामी ने कहा कि केंद्र सरकार को इस विषय पर राज्यों को अपनी नीति लागू करने देनी चाहिए. गौरतलब है कि 1960 के दशक में द्रमुक ने ही हिंदी विरोधी अभियान चलाया था.
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