बड़ी बात: जिस कॉलेज में शिक्षा मंत्री ने लिया एडमिशन, उसके टीचर्स को 4 महीने से नहीं मिली सैलरी!

बड़ी बात: जिस कॉलेज में शिक्षा मंत्री ने लिया एडमिशन, उसके टीचर्स को 4 महीने से नहीं मिली सैलरी!
कोरोना वायरस की वजह से पांच महीने से देशभर के स्कूल बंद हैं.

नाम जाहिर ने करने की शर्त पर स्कूल की टीचर ने किया सैलरी न मिलने का खुलासा, लॉकडाउन के बाद से ही देश के सभी स्कूल और कॉलेज बंद हैं, जिन्हें दोबारा खोले जाने को लेकर चर्चाएं तेज हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 12, 2020, 12:05 PM IST
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नई​ दिल्ली. झारखंड के शिक्षा मंत्री (Jharkhand Education Minister) जगरनाथ महतो से जुड़े इंटरमीडिएट कॉलेज को लेकर अहम जानकारी सामने आई है. दरअसल, महतो ने जिस कॉलेज में 11वीं क्लास में एडमिशन लिया है, उसके बारे में बताया जा रहा है कि उसने चार महीनों से टीचर्स को कथित रूप से सैलरी नहीं दी है. ये बात इसलिए और भी हैरान करती है क्योंकि इस सरकारी सहायता प्राप्त इंटरमीडिएट कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन भी खुद राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ही हैं और उन्होंने दावा किया है कि कॉलेज के लिए अनुदान को वे काफी समय पहले ही मंजूरी दे चुके हैं.

11वीं क्लास में एडमिशन के लिए शिक्षा मंत्री ने किया आवेदन
दरअसल, बोकारो जिले में स्थित देवी महतो मेमोरियल इंटरमीडिएट कॉलेज सोमवार को तब सुर्खियों में आया जब झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने इस कॉलेज में 11वीं क्लास में दाखिले के लिए आवेदन किया. इसी कॉलेज के कुछ टीचर्स ने आरोप लगाया है कि उन्हें इस साल अप्रैल के बाद से सैलरी नहीं मिली है.

17 क्लासरूम, 16 टीचर्स और 850 स्टूडेंट्स
देवी महतो मेमोरियल इंटरमीडिएट कॉलेज में करीब 16 टीचर्स हैं, जो 17 क्लासरूम के इस कॉलेज में लगभग 850 छात्र-छात्राओं को पढ़ाते हैं. इस कॉलेज के एक टीचर ने बताया, सैलरी न मिलने को लेकर काफी निराशा जताई. बता दें कि जानलेवा महामारी कोरोना वायरस के चलते स्कूल और कॉलेज समेत देशभर के शिक्षण संस्थान पिछले पांच महीने से बंद हैं. केंद्र सरकार ने गत 16 मार्च को ही सभी शिक्षण संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया था.



इसलिए नहीं हो सकी पेमेंट
इंटर कॉलेज कर्मचारी महासंघ के महासचिव रघुनाथ सिंह ने बताया कि सरकार ने कॉलेज को मार्च में ही अनुदान जारी कर दिया था, लेकिन इसे कॉलेज गवर्निंग बॉडी की मंजूरी के बाद ही वितरित किया जाता है. मगर लॉकडाउन के चलते गवर्निंग बॉडी की बैठक नहीं हो सकी. जब इस बारे में कॉलेज के प्रिंसिपल से बात की गई तो उन्होंने कहा, कॉलेज पिछले तीन महीनों से बंद था. इसके अलावा कॉलेज कैंपस को क्वारंटीन सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था. यही वजह रही कि पेमेंट में देरी हुई.

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हर साल 50 करोड़ रुपये का अनुदान
उन्होंने बताया कि झारखंड में 170 सरकार से संबद्ध इंटर कॉलेज हैं जो सरकारी अनुदान से चलते हैं. राज्य सरकार अनुदान के तौर पर इन कॉलेजों को 50 करोड़ रुपये सालाना देती है. इसके अलावा करीब 25 करोड़ रुपये एडमिशन, फीस व अन्य स्रोतों से कॉलेज को मिलते हैं.
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