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उत्तराखंडः राजकीय शिक्षक संघ की प्रांतीय कार्यकारणी को भंग करने का टीचर्स ने शुरू किया विरोध

Bharti Saklani | News18Hindi
Updated: May 21, 2020, 8:13 PM IST
उत्तराखंडः राजकीय शिक्षक संघ की प्रांतीय कार्यकारणी को भंग करने का टीचर्स ने शुरू किया विरोध
कोरोना वायरस महामारी के कारण अभी चुनाव कराना मुश्किल है.

राजकीय शिक्षक संघ का प्रांतीय कार्यकारणी का कार्यकाल दो साल का होता है जो नवम्बर 2019 में पूरा हो गया था.

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नई दिल्लीः राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड की प्रांतीय कार्यकारणी को भंग करने का टीचर्स ने विरोध करना शुरू कर दिया है. प्रांतीय कार्यकारणी के महामंत्री रहे सोहन मांजिला का कहना है कि शिक्षा निदेशक आर के कुंवर ने साज़िश के तहत कार्यकारिणी को भंग किया है, जबकि फरवरी में ही उन्होंने चुनाव कराने की परमिशन मांगी थी, तब उनकी बात को नहीं माना गया. राजकीय शिक्षक संघ की तरफ से कहा गया कि कोराना काल में टीचर्स की ड्यूटी लगाई लगी है, मगर उनके काम की सराहना करने के बजाय शिक्षा विभाग उनका मनोबल गिरा रहा है.

शिक्षकों के मुद्दे को सरकार के सामने रखती है कार्यकारिणी
दरअसल कार्यकरणी का कार्य शिक्षकों के मुद्दों को शिक्षा विभाग के साथ शासन स्तर तक उठाने का है. लेकिन 31 मार्च को कार्यकारिणी का कार्यकाल खत्म हो गया जिसके बाद शिक्षा निदेशक आर के कुंवर ने आदेश जारी कर राजकीय शिक्षक संघ की कार्यकारिणी को भंग करने का आदेश जारी कर दिया है. दरअसल टीचर्स के मुद्दे को उठाने के लिए कार्यकारिणी काम करती है लेकिन अब शिक्षा निदेशक आर के कुंवर के आदेश के बाद प्रांत से लेकर मंडल और जिला कार्यकारणी को भी भंग माना जाएगा है. नई कार्यकारणी के गठन के बाद ही राजकीय शिक्षक संघ फिर से शिक्षकों के मुद्दो को उठा पाएंगा. हालांकि विरोध इसी बात का है कि नई कार्यकरणी के गठन तक शिक्षकों के मुद्दों को शिक्षा विभाग के साथ शासन स्तर पर कौन उठाएंगा ये बड़ा सवाल है.

कोरोना के कारण कार्यकारिणी चुनाव कराना मुश्किल



खामियाजा कार्यकारणी के द्वारा समय पर चुनाव न करा पाने का भी है जिसकों लेकर प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्यों का कहना है कि जब चुनाव कराने की परमिशन मांगी थी तब दी नहीं गई अब साजिश के तहत कार्यकारिणी भंग कर दी गई है,और अब नई कार्यकारणी कब तक अस्तित्व में आएंगी इसको लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता है क्योंकि कोराना वायरस महामारी के दौरन नई कार्यकारणी के लिए चुनाव सम्पन्न कराना मुश्किल नजर आ रहा है.



दो साल का होता है कार्यकाल
शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने कार्यकरणी को भंग करने के आदेश में इसका जिक्र भी किया था कि जब तक कोराना वायरस को लेकर स्थिति सामान्य नहीं हो जाती है तब तक चुनाव या अधिवेशन नहीं कराए जा सकते है. आपको बता दे कि राजकीय शिक्षक संघ का प्रांतीय कार्यकारणी का कार्यकाल दो साल का होता है जो नवम्बर 2019 में पूरा हो गया था, लेकिन विशेष परिस्थितियों को देखते हुए कार्यकाल को एक सत्र बढ़ाया जा सकता है, तो ऐसे में 31 मार्च 2020 को शैक्षणिक सत्र समाप्त हो चुका है. इसकी वजह से कार्यकारणी का कार्यकाल बढ़ाया नहीं जा सकता है. इसलिए कार्यकारणी को भंग कर दिया गया है. ऐसे में टीचर्स के बीच में चर्चा भी यही है कि आखिर किस की लापरवाही से समय पर कार्यकारणी का चुनाव नहीं हो सका जिसकी वजह से आज ये नौबत आ गई है कि सबसे बड़ा शिक्षक संगठन अस्तित्व में नहीं है.

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First published: May 21, 2020, 8:13 PM IST
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