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...तो इस वजह से परमाणु परीक्षण नहीं कर पाए थे पीवी नरसिम्‍हा राव, पढ़ें

28 जून को हुआ था नरस‍िम्‍हा राव का जन्‍म

28 जून को हुआ था नरस‍िम्‍हा राव का जन्‍म

17 भाषाओं के ज्ञाता जिन्हें अटल जी भी मानते थे अपने पिता समान, अटल जी ने कहां था, मैंने जो कुछ राजनीति में सीखा है इन्हीं से सीखा.

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    17 भाषाओं के जानकार और देश के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का जन्म 28 जून, 1921 को हुआ था. उनका जन्‍म तेलंगाना के एक छोटे से गांव करीमनगर में हुआ था. उन्‍होंने पुणे के फरग्यूसन कॉलेज में पढ़ाई की और यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई से लॉ की डिग्री हासिल की. इसके अलावा उन्‍होंने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय और नागपुर विश्वविद्यालय से भी पढ़ाई की.

    पीवी नरसिम्‍हा राव का पूरा नाम पामुलापति वेंकट राव था. पेशे से कृषि विशेषज्ञ और वकील नरसिम्‍हा राव राजनीति में आए. इस दौरान उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला.

    देश का पहला परमाणु बम  

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    ‘सामग्री तैयार है तुम आगे बढ़ सकते हो’ राव ने यह बात अटल बि‍हारी बाजपेयी से कही थी. असल में राव दिसंबर, 1995 में परीक्षण की तैयारी कर चुके थे, लेकिन तब उन्हें किसी वजह से अपना मंसूबा मुल्तवी करना पड़ा. इसके पीछे कई थ्योरी गिनाई जाती हैं. लेकिन, एक किस्सा यह भी है कि राव की मौत से कुछ महीने पहले जब पत्रकार शेखर गुप्ता उनका इंटरव्यू ले रहे थे तो उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों आप परमाणु परीक्षण नहीं कर पाए. इस पर राव ने अपने पेट पर थपकी मारते हुए कहा था, ‘अरे भाई, कुछ राज़ मेरी चिता के साथ भी तो चले जाने दो.’

    विनय सीतापति ने अपनी किताब ‘हाफ लॉयन’ में भी इस किस्से का ज़िक्र करते हुए वो तीन थ्योरी बताई हैं, जिनके कारण राव के परीक्षण पर रोक लग गई थी.

    17 भाषा बोलने में थी महारथ हासिल... 

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    17 भाषाओं के जानकार थे पी. वी. नरसिम्‍हा राव


    देश के एक मात्र प्रधानमंत्री जिन्हें एक साथ 17 भाषा बोलने में महारत हासिल की. इनकी मातृभाषा तेलुगु थी, लेकिन मराठी भाषा में भी इनकी अच्छी पकड़ थी. इन्हें भारतीय भाषाओं के साथ स्पेनिश और फ्रांसीसी भाषा का भी ज्ञान था. राव संगीत, सिनेमा व नाट्यशाला में भी रुचि रखते थे. राजनीतिक टिप्पणी लिखने, भाषाएंं सीखने, तेलुगू और हिंदी में कविताएं लिखने व साहित्य में उनकी विशेष रुचि थी. उन्होंने स्वर्गीय विश्वनाथ सत्यनारायण के प्रसिद्ध तेलुगु उपन्यास ‘वेई पदागालू’ के हिंदी अनुवाद ‘सहस्रफन’ और केंद्रीय साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित स्वर्गीय हरि नारायण आप्टे के प्रसिद्ध मराठी उपन्यास “पान लक्षत कोन घेटो” के तेलुगू अनुवाद ‘अंबाला जीवितम’ को सफलतापूर्वक प्रकाशित किया.

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