UPSC Tips: आई.ए.एस. की नींव है पढ़ने में रुचि, पढ़ें तैयारी करने के टिप्स

UPSC Exam preparation tips

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‘पढ़ने में रुचि‘ से मेरा मतलब रोजाना 15-15 घण्टे और इस तरह लगभग तीन-चार साल तक पढ़ते रहने की क्षमता से नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 9:51 PM IST
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नई दिल्ली. लोगों को मैंने अक्सर यह कहते हुए सुना है कि ‘आई.ए.एस. में बैठने का गलत निर्णय हो गया.‘ निर्णय गलत नहीं होते हैं. निर्णयों को सही सिद्ध करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया गलत होती है. यदि आप में इतना दम नहीं है कि आप इस सही प्रक्रिया को जानकर उसे निभा सकें, तो बेहतर है कि इसका निर्णय ही न लें. यदि आप निर्णय ही नहीं लेते हैं, तो कोई आपसे यह नहीं कहेगा कि ‘देखो, यह कैसा लड़का है. इसने आईएएस की परीक्षा ही नहीं दी,‘ लेकिन यदि आपने देने का निर्णय ले लिया और उसके अनुकूल कर्म नहीं कर पाए, तो पक्का है कि असफलता हाथ लगेगी, और तब लोग कहेंगे कि ‘बच्चू, और दो आईएएस की परीक्षा. बड़े बनने चले थे आईएएस.‘ इसलिए इस बारे में निर्णय बहुत सोच समझकर ही लिया जाना चाहिए. अन्यथा मगन रहिए अपनी वर्तमान दुनिया में. सोच-समझकर लिया गया निर्णय ही आपको मानसिक मजबूती दे सकता है.

तो अब सवाल यह है कि सोचा-समझा कैसे जाए. इस बारे में मैं आपसे कुछ बातें करना चाहूँगा. ये बातें मेरे अपने अनुभव, मेरे प्रयोग, मेरे निरीक्षण तथा अध्ययन पर आधारित हैं. इसलिए मैं इनके व्यावहारिक होने का दावा कर सकता हूँ.

1) आंतरिक जरूरत

आपको बड़ी बारीकी के साथ इस तथ्य की जाँच-पड़ताल करनी पड़ेगी कि आईएएस बनना आपका ऊपरी दिखावा भर है या आपकी आंतरिक जरूरत है। यह वैसी ही बात है कि आपको किसी से सच्चा प्रेम है या केवल ऊपरी आकर्षण भर। यदि यह आपकी आंतरिक जरूरत है, यदि आपको किसी से सच्चा प्रेम है, तो आपको अपने प्रेमी की हर चीज सुहावनी लगने लगती है, वह चीज भी, जिससे दूसरे लोग चिढ़ते हैं। आप उससे मिलने को बेचैन रहते हैं और आपको लगता है कि यदि वह नहीं मिली/मिला, तो पूरी जिंदगी अधूरी रह जाएगी। इसलिए आप उसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। नहीं क्या ?
2) पढ़ने में रुचि

आईएएस बनने के लिए आपको ग्रेजुएट होना होता है यानी कि इसकी पढ़ाई करने से पहले आप कम से कम चौदह सालों तक पढ़ाई कर चुके हैं. पढ़ाई के अनुभव की यह पूँजी आपके पास मौजूद है. आप जानते हैं और आप ही अच्छी तरह से जानते हैं कि पढ़ने में आपको मजा आता है या नहीं. यदि यह आपको बोझ लगता है, तो फिर यह आपके लायक नहीं है.

‘पढ़ने में रुचि‘ से मेरा मतलब रोजाना 15-15 घण्टे और इस तरह लगभग तीन-चार साल तक पढ़ते रहने की क्षमता से नहीं है. मेरा मतलब तो सिर्फ इस बात से है कि फिलहाल आप इसको एन्जॉय करते हैं या नहीं. बाद में भले ही जिन्दगी भर किताबों का मुँह मत देखिएगा, लेकिन फिलहाल तो आपकी उनसे मुहब्बत होनी ही चाहिए और उनमें स्वाद भी आना ही चाहिए, क्योंकि यही काम तो आपको मुख्य रूप से करना है. आईएएस बनने का सारा काम ही पढ़ना और पढ़े हुए को लिखने का है. यह कतई जरूरी नहीं है कि आप खूब पढ़ें और पढ़ते ही रहें. यह फालतू की बात है और जो लोग ऐसा कहते हैं, वे मूलतः अपनी बातों से स्टूडेन्ट्स के दिमाग में एक आतंक पैदा करना चाहते हैं. मैं समझता हूँ कि यदि कोई प्रतियोगी पूरी गम्भीरता और प्रतिबद्धता के साथ रोजाना पाँच से छह घंटे पढ़ता है, तो वह पर्याप्त है. हाँ, यह पढ़ाई पूरी रुचि के साथ होनी चाहिए, खानापूर्ति के रूप में नहीं.



(लेखक पूर्व सिविल सर्वेंट और afeias के संस्थापक हैं।)

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