बड़ी खबर : UP शिक्षक भर्ती के नतीजे अपलोड, जानिए आपका सेलेक्शन हुआ या नहीं, इस लिंक पर करें क्लिक

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अपना रोल नंबर डालकर डायरेंक्ट यहां दिए गए लिंक से चेक कर सकते हैं.

यूपी असिस्टेंट टीचर रिक्रूटमेंट परीक्षा (UP assistant teacher recruitment exam) का रिजल्ट बुधवार को अपलोड कर दिया है. रिजल्ट की घोषणा मंगलवार को की गई थी.

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नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकरण (Uttar Pradesh Exam Regulatory Authority) ने यूपी असिस्टेंट टीचर रिक्रूटमेंट परीक्षा का रिजल्ट बुधवार को अपलोड कर दिया है. रिजल्ट की घोषणा मंगलवार को की गई थी. जो कैंडीडेट परीक्षा में शामिल हुए थे वे प्राधिकरण की वेबसाइट - atrexam.upsdc.gov.in - पर जाकर अपना रिजल्ट डाउनलोड कर सकते हैं. इस परीक्षा के लिए कुल 1.4 लाख कैंडीडेट्स पास हुए हैं. उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकरण ने 6 जनवरी, 2019 को इसकी परीक्षा करवाई थी.

परीक्षा परिणाम देखने के लिए कैंडीडेट को नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके अपना रोल नंबर डालना होगा, इसके बाद वे अपना रिजल्ट डाउनलोड कर पाएंगे. पास हुए कैंडीडेट में 36,614 सामान्य श्रेणी के, 84,868 ओबीसी श्रेणी के, 24,308 एससी और 270 कैंडीडेट एसटी श्रेणी के हैं.

विवादित हो गया था मामला-
पिछले हफ्ते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कट-ऑफ को सामान्य वर्ग के लिए 65 प्रतिशत और ओबीसी के लिए 60 प्रतिशत रखा था. साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि तीन महीने के अंदर भर्ती प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाए लेकिन यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे महज़ एक हफ्ते में पूरा करने का आदेश दे दिया. इसके बाद पिछले शनिवार को आयोग ने आंसर की रिलीज़ की थी और मंगलवार को रिजल्ट की घोषणा कर दी थी.



फैसले के खिलाफ शिक्षामित्रों ने सुप्रीम कोर्ट में की थी अपील-


इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ यूपी प्राथमिक शिक्षामित्र एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट (SC) में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी. अपील में हाइकोर्ट (HIGH COURT) के फैसले पर रोक लगाने या रद्द करने की मांग की गई है. इससे पहले यूपी (UTTAR PRADESH) सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दाखिल की जा चुकी है, जिसमें कहा गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट बिना उसका पक्ष सुने कोई आदेश जारी न करे.

क्या हैं शिक्षामित्र का पक्ष-
शिक्षामित्रों का कहना है कि सरकार को परीक्षा के पहले ही कटऑफ को जारी करना चाहिए थे. ताकि वे उसी के अनुरूप तैयारी करते. लिखित परीक्षा के बाद उत्तीर्ण प्रतिशत तय होने से अधिकांश शिक्षामित्र भर्ती से बाहर हो जाएंगे. इस पर सरकार को फिर से विचार करना चाहिए. उनका कहना है कि अगर कटऑफ हटा दिया जाए तो शिक्षामित्रों का चयन आसानी से हो जाएगा.

क्या था पूरा मामला-
दरअसल, भर्ती विज्ञापन में कहा गया था कि अभ्यर्थियों को न्यूनतम कट ऑफ अंक अर्जित करना होगा. हालांकि उस वक्त यह नहीं बताया गया था कि यह कट-ऑफ अंक कितना होगा. शासनादेश में इसका जिक्र नहीं किया गया था. बाद में शासन द्वारा कट-ऑफ अंक की घोषणा की गई. जिसके तहत सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 150 में से 97 (65 फीसदी) और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 150 में 90 अंक (60 फीसदी) लाने की बात कही गई. इसी कट ऑफ को लेकर परीक्षार्थियों ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की थी. जिसकी सुनवाई के बाद 3 मार्च 2020 को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था.

कैंडीडेट्स अपना रिज़ल्ट यहां क्लिक करके देख सकते हैं.
First published: May 13, 2020, 2:05 PM IST
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