RAS बनने के लिए 17 साल किया संघर्ष, सात बार दी परीक्षा, 7वीं बार में मिली सफलता

RAS डॉ. गोरधनलाल शर्मा।
RAS डॉ. गोरधनलाल शर्मा।

यह कहानी है एक ऐसे संघर्षशील अधिकारी की जो अपने जुनून को पूरा करने के लिए 17 वर्ष तक जूझता रहा, लेकिन हार नहीं मानी. गरीबी और तमाम तरह की बाधाओं को पार करते हुए इस अधिकारी ने आखिरकार 42 वर्ष की उम्र में अपने सपने को साकार कर दिखाया.

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यह कहानी है एक ऐसे संघर्षशील अधिकारी की जो अपने जुनून को पूरा करने के लिए 17 वर्ष तक जूझता रहा, लेकिन हार नहीं मानी. गरीबी और तमाम तरह की बाधाओं को पार करते हुए इस अधिकारी ने आखिरकार 42 वर्ष की उम्र में अपने सपने को साकार कर दिखाया. हम बात कर हैं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी डॉ. गोरधनलाल शर्मा की, जिन्होंने अपने जुनून को पूरा करने के लिए सात बार आरएएस की परीक्षा दी. हर बार साक्षात्कार तक पहुंचने वाले डॉ. शर्मा ने आखिरकार सातवीं बार अपनी मंजिल को पा ही लिया.

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अलवर जिले के सोखर गांव निवासी सूरजमल शर्मा व शांति देवी शर्मा के घर में 15 जुलाई 1970 को जन्मे डॉ. गोरधनलाल शर्मा ने बचपन से प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखा था. पढ़ने-लिखने के शौकिन डॉ. गोरधनलाल शर्मा ने इसे पाने के लिए शुरू से ही मन में जुनून पाल लिया. माता-पिता का भी सपना था कि बेटा पढ़ लिखकर बड़ा अफसर बने. डॉ. गोरधनलाल ने अपने जुनून के साथ माता-पिता के इस सपने को भी आत्मसात कर लिया. अपने मुकाम को पाने लिए उन्होंने वर्ष 1995 से अपना संघर्ष शुरू किया.



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हर बार साक्षात्कार तक पहुंचे
वर्ष 1995 से वर्ष 2012 तक डॉ. गोरधनलाल शर्मा ने सात बार राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) का एग्जाम दिया. खास बात यह रही कि वे हर बार साक्षात्कार तक पहुंचे. लेकिन इनमें से छह बार वे अधीनस्थ सेवाओं के लिए ही चुने गए. हालांकि इस दरम्यिान गोरधनलाल शर्मा ने नौकरी तो ज्वॉइन कर ली, लेकिन सीधे आरएएस बनने की कसक ने चैन से नहीं बैठने दिया. राजस्थान आबकारी सेवा व राजस्थान वाणिज्य कर सेवा समेत अन्य सेवाओं रहते हुए डॉ. गोरधनलाल शर्मा ने आरएएस परीक्षा देना नहीं छोड़ा. पिता उन्हें मोटिवेट करते रहे. वर्ष 2012 में वे सातवीं बार साक्षात्कार में पहुंचे और सीधे आरएएस के रूप में चयनित होकर अपना सपना पूरा कर लिया. लेकिन दुखद पहलू यह रहा है कि उनकी इस सफलता को देखने के लिए पिता इस दुनिया में नहीं रहे. बेटे के इस मुकाम तक पहुंचने से एक साल पहले ही उनका निधन हो गया.

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पांच विषयों में स्नाकोत्तर की उपाधि प्राप्त हैं
वर्तमान में डॉ. गोरधनलाल शर्मा दौसा में उप जिला कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. डॉ. शर्मा समाजशास्त्री, कानूनविद्, लेखक, काउंसलर, मोटिवेशनल गुरु एवं प्रशासक के रूप में बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. उन्होंने समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, राजनीतिशास्त्र, मानव अधिकार एवं विधि में स्नाकोत्तर की उपाधि प्राप्त की. समाजशास्त्र में उन्होंने नेट स्लेट एवं पीएचडी की.

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50 से अधिक लेख एवं शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं
उनके 50 से अधिक लेख एवं शोध पत्र विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नल तथा पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं. सामाजिक मुद्दों एवं अन्य विभिन्न विषयों पर आयोजित दो दर्जन से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सेमिनारों में शोध-पत्रों का वाचन कर चुके हैं. डॉ. शर्मा स्वीडन, डेनमार्क, नार्वे, फिनलैंड एवं नेपाल की यात्राएं भी कर चुके हैं.

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