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UP Board Result 2019: बच्‍चों पर ना डालें अपनी उम्‍मीदों का बोझ

प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो

राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार साल 2015 में करीब 9 हजार छात्रों ने परीक्षा का रिजल्‍ट आने के बाद आत्‍महत्‍या की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 16, 2019, 12:29 PM IST
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UP Board Result 2019: उत्‍तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा हिन्‍दी प्रदेश है. 20 से 25 अप्रैल के बीच यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के नतीजे घोषित करने वाला है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह देखा जा रहा है कि छात्र, परीक्षा के नतीजे आने से पहले या बाद में असफलता के डर से अपनी जिन्‍दगी खत्‍म कर देते हैं. राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े भी कुछ ऐसा ही बताते हैं. एनसीआरबी की रिपोर्ट की मानें तो सिर्फ साल 2014 में 18 वर्ष से कम उम्र के 1284 छात्रों ने परीक्षा में असफल होने पर अपनी जिन्‍दगी खत्‍म कर ली. इसमें 14 साल के 163 छात्र भी शामिल थे. साल 2015 में ये आंकड़ा और बढ़ गया. साल 2015 में करीब 9 हजार छात्रों ने आत्‍महत्‍या की थी.

कहीं इसके पीछे हमारी उम्‍मीदों का बोझ तो नहीं है. कहीं ऐसा तो नहीं है कि हम अपने बच्‍चों पर इतना दबाव डाल रहे कि असफल होने पर वह भयभीत होकर आत्‍महत्‍या कर रहे हैं.

परीक्षा में कुछ बच्‍चे पास होते हैं तो कुछ असफल हो जाते हैं. यह बहुत ही सामान्‍य बात है. परीक्षाओं का दौर सभी के जीवन में आता है. हमारे जीवन में भी था. लेकिन क्‍या आपने हर कक्षा में अव्‍वल स्‍थान हासिल किया. क्‍या आप जीवन में कभी भी किसी भी परीक्षा में फेल नहीं हुए... परीक्षा में तो कुछ ही बच्‍चे टॉप करते हैं, सामान्‍य अंक पाने वाले छात्रों की संख्‍या ज्‍यादा होती है. पर हमारे अंकों को लेकर हमारे पेरेंट्स का व्‍यवहार बेचैन करने वाला नहीं होता था. वह बहुत ही भरोसे से भरे होते थे. तो हम अपने बच्‍चों पर अपनी उम्‍मीदों का इतना बोझ क्‍यों डालते हैं.



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अपनी उम्‍मीदों का बोझ:
बच्‍चों के नाजुक कंधों पर अपने भारी-भरकम उम्‍मीदों का बोझ ना लादें. परीक्षा में अगर कम मार्क्‍स आ गए हैं तो भी उसमें यकीन रखें. यकीन इस बात पर कि आपका बच्‍चा अपने जीवन के साथ कुछ ना कुछ तो अच्‍छा कर ही लेगा. उसे डरना नहीं, जीना सिखाएं.

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अपनी ख्‍वाहिशें बच्‍चों में देखते हैं:
दरअसल, हम अपने बच्‍चों पर इतना दबाव इसलिए डालते हैं, क्‍योंकि हम उनके जरिये अपनी उन ख्‍वाहिशों को पूरा करना चाहते हैं, जो हम कभी पूरा नहीं कर सके. ये गलत है. बच्‍चों को अपने सपने जीने दीजिए. अगर बच्‍चा असफल हो रहा है तो भी उसके साथ खड़े रहें.

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परिश्रम और अनुशासन के समर्थक बनें, परिणाम के नहीं:
आप अपने बच्‍चों को परिश्रम करना और अनुशासित रहना सिखाएं. उनके रिजल्‍ट के आधार पर अपनी क्षमता, योग्‍यता का आकलन ना करें. बल्‍क‍ि इस बात पर जोर दें कि वह कितनी कोशिश कर रहा है. फिर चाहे परिणाम कैसे भी आएं.

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