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UP Board दिलचस्प किस्से: 1992 का वो साल ऐतिहासिक था...देश के सबसे बड़े राज्य में मुट्ठी भर स्टूडेंट हुए थे पास

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Corona Effect : स्टूडेंट के लिए ज़रूरी ख़बर...इस प्रोग्राम के ज़रिए घर बैठे होगी पढ़ाई

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UP Board Results 2020: साल 1992 में पास होने वाले छात्र खोजने से भी नहीं मिल रहे थे. उसमें भी फर्स्ट डिवीजन पास होने वाले छात्र लगभग नदारद थे. लोग उन्हें सेलिब्रिटी वाले भाव से देखते थे.

नई दिल्ली. जब भारत की बात होती है तो उत्तर प्रदेश को नजरअंदाज करना संभव नहीं. और जब यूपी की बात होती है तो भला प्रदेश के एजुकेशन बोर्ड को कैसे भूला जा सकता है. यूपी बोर्ड (UP Education Board) देश ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा संस्था है. लाखों छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षाओं में हिस्सा लेते हैं. यहां तक कि इस साल भी 56 लाख से अधिक स्टूडेंट्स दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में हिस्सा लेने बैठे. अब जबकि इन परीक्षाओं के नतीजों का ऐलान 27 जून को होना है तो हम आपको यूपी बोर्ड के इतिहास वो सच्चाई बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आपको यकीन ही नहीं होगा. बात पुरानी है, लेकिन है सौ फीसदी सच. आइए जानते हैं वो दिलचस्प वाकया.

...तब यूपी बोर्ड रिजल्ट से हर कोई हैरान रह गया
ये बात साल 1992 की है. तब उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह की सरकार (Kalyan Singh Government) हुआ करती थी. मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने नकल विहीन परीक्षा को सख्ती से लागू करने के आदेश दे दिए थे. बस फिर क्या था, नकल पर नकेल कसने की मुहिम प्रदेशभर में शुरू कर दी गई. और इसका जो नतीजा हुआ, उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया. इतना ही नहीं, साल 1992 का वो बोर्ड रिजल्ट यूपी बोर्ड के इतिहास में भी हमेशा के लिए यादगार दिन के तौर पर दर्ज हो गया.

ढूंढने से भी नहीं मिल रहे थे पास होने वाले छात्र
दरअसल, हम बात कर रहे हैं यूपी बोर्ड के इतिहास के उस अनूठे साल की जब बोर्ड का रिजल्ट एक तिहाई से भी कम था. कई स्कूलों में एक भी छात्र पास नहीं हो पाया था. मोहल्लों में पास होने वाले बच्चे ढूंढने से भी नहीं मिल रहे थे. और जो पास हो भी गए थे, वो किसी सेलीब्रेटी से कम नहीं माने जा रहे थे. ऐसा इसलिए क्योंकि उस साल हाईस्कूल में सिर्फ 14.70 फीसदी और इंटरमीडिएट में कुल 30.30 फीसदी छात्र ही पास हो सके थे. उसमें भी फर्स्ट डिवीजन पास होने वाले छात्र लगभग नदारद थे. पूरे राज्य में ऐसे स्कूलों की संख्या काफी थी जिनमें एक भी स्टूडेंट पास नहीं हो पाए थे और कई स्कूलों में तो सिर्फ कुछ गिने चुने छात्र ही पास हुए थे.

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तब से हो चुके हैं कई बदलाव
हालांकि, तब से लेकर अब तक 28 सालों से अधिक का समय बीत चुका है और तब से न जाने कितने बदलाव हो चुके हैं. शायद इन नियमों में बदलाव के कारण ही अब रिजल्ट का प्रतिशत भी ज्यादा देखने को मिलता है और आमतौर पर छात्रों में भी ज्यादा बेहतर अंक मिल रहे हैं. उदाहरण के लिए 1992 में हाईस्कूल में अगर कोई छात्र किसी एक सब्जेक्ट में फेल होता था तो उसे ओवरऑल फेल माना जाता था लेकिन अब अगर कोई छात्र पांच विषयों में भी पास है तो उसे पास मान लिया जाता है. ऐसे ही उस साल ग्रेस मार्क्स के रूप में सिर्फ 5 अंक दिए जाते थे और ये भी सिर्फ दो विषयों में ही मिलता था. लेकिन अब इंटरमीडिएट में 20 और हाईस्कूल में 18 अंक ग्रेस मार्क्स सभी विषयों में मिलाकर मिलता है. इसलिए विद्यार्थी काफी आसानी से पास हो जाते हैं.

Tags: Board result, Board Results, UP Board Class 10th results, UP Board Class 12th results, UP Board Examinations, UP Board Results

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