दिलचस्प खबर: 99 साल का है यूपी बोर्ड, दुनिया में इसलिए है सबसे खास, जानिए 5 बड़ी बातें

दिलचस्प खबर: 99 साल का है यूपी बोर्ड, दुनिया में इसलिए है सबसे खास, जानिए 5 बड़ी बातें
यूपी बोर्ड में इस साल 56 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी है.

UP Board Results 2020 : इस साल हुई यूपी बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं के नतीजे 27 जून को घोषित किए जाने हैं.

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प्रयागराज. यूपी बोर्ड 2020 (UP Board 2020) की दसवीं और बारहवीं की परीक्षा के नतीजों का ऐलान 27 जून को होगा. ऐसे में सभी की निगाहें इस खास दिन पर टिक गईं हैं जब प्रदेश के 56 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं की मेहनत का फल मिलेगा. ऐसे में जबकि यूपी बोर्ड के नतीजों का ऐलान होने ही वाला है, तो उससे पहले यूपी बोर्ड से जुड़े कई अहम तथ्य जानना बेहद जरूरी है. देश ही नहीं, दुनिया के सबसे बड़े एजुकेशन बोर्ड (Education Board) यानी यूपी बोर्ड के ऐसे ही दिलचस्प तथ्यों को जानने के लिए ये खबर जरूर पढ़ें.

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1. सबसे बड़ी परीक्षा संस्था
यूपी बोर्ड (UP Board) देश ही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा संस्था है. दसवीं और बारहवीं की परीक्षा कराने वाली संस्था उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद का मुख्यालय प्रयागराज में है. यह दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा संचालित करने वाली संस्था भी कही जाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया में पांच ही देश ऐसे हैं जो आबादी के लिहाज से उत्तर प्रदेश की जनसख्या से बड़े हैं. यूपी बोर्ड ने 10+2 की शिक्षा प्रणाली अपनाई हुई है. यह दसवीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करता है.

2. अगले साल पूरे हो जाएंगे 100 साल
यूपी बोर्ड वर्ष 2021 में शताब्दी वर्ष पूरे करने जा रहा है. माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश की स्थापना देश की आजादी के पहले वर्ष 1921 में प्रयागराज में संयुक्त प्रांत वैधानिक परिषद यानि यूनाइटेड प्रोविन्स लेजिस्लेटिव काउंसिल के एक अधिनियम द्वारा हुई थी. यूपी बोर्ड ने सबसे पहले साल 1923 में परीक्षा आयोजित की. यह भारत का प्रथम शिक्षा बोर्ड था जिसने सर्वप्रथम 10+2 परीक्षा पद्धति अपनाई थी. इस प्रणाली के तहत प्रथम सार्वजनिक (बोर्ड) परीक्षा का आयोजन दस वर्षों की शिक्षा पूरी होने बाद जिसे हाई-स्कूल परीक्षा और द्वितीय सार्वजनिक परीक्षा 10+2 यानी 12 वर्ष की शिक्षा के बाद दिए जाते हैं, जिसे इंटरमीडिएट परीक्षा कहा जाता है। यूपी बोर्ड की स्थापना के पहले प्रयागराज विश्वविद्यालय "हाई स्कूल" और "इंटरमीडिएट" की परीक्षाएं आयोजित करता था.

3. ये काम भी करता है यूपी बोर्ड
उत्तर प्रदेश बोर्ड का मुख्य कार्य राज्य में हाई स्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षा आयोजित करना होता है. इसके साथ ही राज्य में स्थित विद्यालयों को मान्यता देना, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के लिए पाठ्यक्रम एवं पुस्तकें निर्धारित करना भी यूपी बोर्ड का ही प्रमुख कार्य है. साथ ही बोर्ड अन्य बोर्डों द्वारा ली गई परीक्षाओं को तुल्यता प्रदान करता है. यूपी जैसे बड़े प्रदेश में छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यूपी बोर्ड ने कई क्षेत्रीय कार्यालय भी खोले हैं. हांलाकि प्रयागराज मुख्यालय से ही क्षेत्रीय कार्यालयों की समस्याओं का नियंत्रण और संचालन किया जाता है. बोर्ड के पांच क्षेत्रीय कार्यालयों की स्थापना अलग-अलग शहरों में की है. मेरठ में 1973, वाराणसी में 1978, बरेली में 1981, प्रयागराज में 1987 और गोरखपुर में 2016 में की गई है. इन कार्यालयों में क्षेत्रीय सचिवों की नियुक्ति की गई है. जिनके ऊपर प्रयागराज स्थित मुख्यालय के सचिव प्रधान कार्यपालक के रूप में कार्यरत रहते हैं. कुछ वर्ष पूर्व रामनगर नैनीताल स्थित कार्यालय को उत्तराखंड राज्य के गठन के समय यू.पी.बोर्ड से अलग कर दिया गया. यूपी बोर्ड के पहले सचिव अभय चरन मुखर्जी बने थे, जिनका कार्यकाल 1922 से 1934 तक रहा. अब तक यूपी बोर्ड के इतिहास में 37 सचिवों की नियुक्ति हो चुकी है. आजाद भारत के पहले सचिव परमानंद थे. जिनका कार्यकाल 1946 से लेकर 1950 तक रहा. मौजूदा समय में यूपी बोर्ड के सचिव के पद पर नीना श्रीवास्तव कार्यरत हैं. जिनका कार्यकाल इसी माह 30 जून को समाप्त हो रहा है.यूपी बोर्ड के पहले अध्यक्ष एच. ए.मेकेन्जी रहे, जिनका कार्यकाल 1924 से लेकर 1934 तक रहा. यूपी बोर्ड के अध्यक्ष के पद पर अब तक 44 लोग काबिज रह चुके हैं. मौजूदा समय में यूपी बोर्ड के 44वें अध्यक्ष के पद पर विनय कुमार पाण्डेय की तैनाती है.

4. यूपी बोर्ड परीक्षा 2020
कोरोना वायरस महामारी के बीच यूपी बोर्ड की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का रिजल्ट 27 जून शनिवार को घोषित होना है. ऐसी संभावना है कि सूबे के डिप्टी सीएम और शिक्षा मंत्री डॉ दिनेश शर्मा ही वीडियो कांफ्रेन्सिंग से लखनऊ से रिजल्ट घोषित करेंगे. जबकि यूपी बोर्ड के मुख्यालय प्रयागराज में यूपी बोर्ड की सचिव और अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे. यूपी बोर्ड की परीक्षाएं इस साल 18 फरवरी से 06 मार्च के बीच आयोजित की गई थी. यूपी बोर्ड की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में इस बार 56 लाख सात हजार 118 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, लेकिन नकल की सख्ती के चलते चार लाख 70 हजार 846 परीक्षार्थियों ने परीक्षा बीच में ही छोड़ दी थी. इस बार हाईस्कूल की परीक्षा 12 कार्य दिवसों में तीन मार्च को सम्पन्न हुई थी. यूपी बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में कुल 395 नकलची पकड़े गए हैं. जबकि 230 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है. परीक्षा के लिए प्रदेश भर में 7784 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे. इस बार की परीक्षा में हाईस्कूल में 30 लाख 22 हजार 607 परिक्षार्थी,तो वही इंटर में 25 लाख 84 हजार 511 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। जबकि पिछले वर्ष हाई स्कूल में 31 लाख 92 हजार 587 परीक्षार्थी और इंटर में 26 लाख तीन हजार 169 परीक्षार्थी परीक्षा में बैठे थे. इस तरह से इस साल पिछले साल की तुलना में पहले से ही एक लाख 88 हजार 638 परीक्षार्थी कम सम्मिलित हो रहे थे.

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5. नकल पर नकेल
प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद यूपी बोर्ड में नकल रोकने को लेकर सख्ती का दौर भी शुरू हो गया. वर्ष 2018 में जहां परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाये गए, वहीं अगले साल 2019 में सीसीटीवी कैमरों के साथ ही वॉयस रिकार्डर लगाए गए. जबकि 2020 की बोर्ड परीक्षा में ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किया गया, जिससे परीक्षा केंद्रों की संख्या भी काफी कम हो गई. वहीं परीक्षा केंद्रों को ऑनलाइन करने के लिए राउटर और ब्रॉडबैंड से जोड़ दिया गया. यूपी बोर्ड अब नई तकनीक के सहारे बोर्ड परीक्षा को कुशलता से संचालित कर रहा है. कोरोना को लेकर लागू किए गए लॉकडाउन से पहले ही यूपी बोर्ड की परीक्षायें सम्पन्न हो गई थी. मगर कापियों के मूल्यांकन को दो बार स्थगित करना पड़ा.

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