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UP: अब निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस तय करेगी सरकार, समित ऐसे रखेगी निगरानी

News18Hindi
Updated: February 3, 2020, 12:12 PM IST
UP: अब निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस तय करेगी सरकार, समित ऐसे रखेगी निगरानी
चिकित्सा विभाग ने नई दिल्ली की केपीएमजी कन्सलटेंट एजेन्सी को फीस निर्धारण पर अपनी रिपोर्ट देने का जिम्मा सौंपा है.

उत्तर प्रदेश निजी व्यवसायिक शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश का विनियमन और फीस का नियतन ) अधिनियम-2006 के तहत 27 निजी मेडिकल कॉलेजों की पहले निर्धारित की गई फीस की दो साल की अवधि खत्म हो गई है.

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  • Last Updated: February 3, 2020, 12:12 PM IST
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नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश सरकार(UP Government) निजी मेडिकल कॉलेजों (Medical Colleges) की फीस बढ़ने की मनमानी को खत्म करने के लिए कदम उठा रही है. सरकार ने तय किया है कि इस बार वह शैक्षणिक शुल्क के साथ ही निजी मेडिकल कॉलेजों के सभी तरह के शुल्क निर्धारित करेगी. इस मामले को लेकर कल यानी चार फरवरी को चिकित्सा शिक्षा विभाग (Medical Education Department) के प्रमुख सचिव फीस निर्धारण पर अपनी राय देने के लिए कन्सलटेंट की रिपोर्ट पर विचार करेंगे.

नहीं चलेगी निजी कॉलेजों की मनमानी
उत्तर प्रदेश निजी व्यवसायिक शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश का विनियमन और फीस का नियतन ) अधिनियम-2006 के तहत 27 निजी मेडिकल कॉलेजों की पहले निर्धारित की गई फीस की दो साल की अवधि खत्म हो गई है. आगे से यह काम नेशनल मेडिकल कौंसिल (एनएमसी) को करना था, लेकिन एनएमसी ने अभी काम करना ही नहीं शुरू किया है. इसीलिए मेडिकल कॉलेजों के जुलाई से शुरू होने वाले नए सत्र में प्रवेश लेने वाले एमबीबीएस छात्रों की फीस प्रदेश सरकार ही तय करेगी.

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मेडिकल कॉलेजों के जुलाई से शुरू होने वाले नए सत्र में प्रवेश लेने वाले एमबीबीएस छात्रों की फीस प्रदेश सरकार ही तय करेगी.निजी एजेंसी सौंपेगी अपनी रिपोर्ट
चिकित्सा विभाग ने नई दिल्ली की केपीएमजी कन्सलटेंट एजेन्सी को फीस निर्धारण पर अपनी रिपोर्ट देने का जिम्मा सौंपा है. एजेन्सी ने गुजरात और मध्यप्रदेश की सरकारों द्वारा निजी मेडिकल कॉलेज की फीस नियंत्रण के बारे में अपनाए गए तरीकों का अध्यन्न किया है.इसके बाद एजेंसी रिपोर्ट सौंपेगी. सरकार इस पर अमल कर सकती है.

मैनेजमेंट कोटे की हो सकती हैं कुछ सीटेंचिकित्सा शिक्षा विभाग फीस नियंत्रण को व्यवहारिक बनाने के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों को मैनेजमेंट कोटे की कुछ सीटें देने पर भी विचार कर रहा है. इससे उन सीटों पर अपने हिसाब से शुल्क लेकर कॉलेज अपने खर्चों की भरपाई कर सकेंगे.

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प्रतीकात्मक फोटो.


अभी तक मेडिकल कॉलेज सरकार द्वारा तय किए गए शैक्षणिक शुल्क साढ़े आठ लाख से लेकर साढ़े 11 लाख सालाना फीस लेने के लिए बाध्य थे, लेकिन ये कॉलेज शैक्षणिक शुल्क तो सरकार के मुताबिक लेते थे, जबकि हॉस्टल फीस व सिक्योरिटी रकम सरीखे शुल्क मनमाने ढंग से बढ़ाकर सरकार द्वारा कम किए शैक्षणिक शुल्क की भरपाई करने के लिए छात्रों का उत्पीड़न करते थे. छात्रों की शिकायत पर ही पिछले साल चिकित्सा शिक्षा विभाग को हॉस्टल शुल्क एक लाख सालाना और सिक्योरिटी की रकम एक बार ढाई लाख लेने का अलग से आदेश जारी करना पड़ा था.

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First published: February 3, 2020, 12:08 PM IST
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