हौंसले और जज्बे की कहानी, अनिशा ने थर्ड स्टेज के कैंसर से जूझकर क्रेक किया AIPMT

अनीशा अग्रवाल।
अनीशा अग्रवाल।

हौंसला किसे कहते हैं और जज्बा क्या होता है ? अगर ये देखना हो तो मिलिए अनिशा से. कैंसर जैसी बीमारी से जूझते हुए मेडिकल परीक्षा क्वालीफाई करना और लगातार आगे बढ़ते रहने की ललक रखने वाली अनीशा आज युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

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हौंसला किसे कहते हैं और जज्बा क्या होता है ? अगर ये देखना हो तो मिलिए अनीशा से. कैंसर जैसी बीमारी से जूझते हुए मेडिकल परीक्षा क्वालीफाई करना और लगातार आगे बढ़ते रहने की ललक रखने वाली अनिशा आज युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन चुकी है. थर्ड स्टेज के कैंसर को मात देकर मेडिकल लाइन में अपना मुकाम बनाने वाली अनिशा अब अब कैंसर में विशेषज्ञता हासिल करना चाहती है. उसने कैंसर के इलाज के दौरान नसों के सिकुड़ने पर शोध करने का मन बनाया है. अनिशा वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अजमेर में एमबीबीएस फाइनल ईयर की स्टूडेंट है.

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अनिशा की कहानी शुरू होती है कोटा से. वर्ष 2013 में अनीशा यहां एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में कक्षा 11 के साथ एआईपीएमटी की तैयारी कर रही थी. कोचिंग टेस्ट में टॉपर्स में शामिल रहने वाली अनिशा  के 90 प्रतिशत से अधिक अंक आते थे. लेकिन इसी दरम्यिान उसकी तबीयत खराब रहने लगी. चैकअप करवाया तो तो ट्यूमर सामने आया. पेट से ट्यूमर निकाला गया. बायोप्सी जांच में ट्यूमर कैंसर का होने का पता चला. इससे परिवार सकते में आ गया और सबकुछ थम सा गया.



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थर्ड स्टेज का कैंसर
विशेषज्ञों इसे थर्ड स्टेज का कैंसर बताया. अनिशा का अहमदाबाद इलाज चला. वहां जांच में पता चला कि शरीर में अभी भी कैंसर की कोशिकाएं हैं. इसके बाद चार कीमोथैरेपी दी गई. कीमोथैरेपी के बाद अनीशा की तबीयत बहुत बिगड़ गई. वह कमजोर हो गई, लेकिन अनिशा ने हिम्मत नहीं हारी और फिर से कोटा जाकर पढ़ाई करने की इच्छा जताई.

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पांच माह के ब्रेक के बाद फिर की शुरुआत
कोटा वापस आकर कॉचिंग ज्वॉइन की. पांच माह के ब्रेक के बाद फिर से वह पढ़ाई में जुटी. स्पेशल ट्यूटर के सहारे पिछे के सिलेबस को कवर किया. अनिशा के हौंसले को देखते हुए मां ने साए की तरह उसका साथ दिया. 2015 में एआईपीएमटी में 73 प्रतिशत का स्कोर प्राप्त किए. ऑल इंडिया स्तर 3862 तथा प्रदेश स्तर पर 721 रैंक प्राप्त की. काउंसलिंग में अजमेर मेडिकल कॉलेज मिला तो उसने यहां एमबीबीएस में प्रवेश लिया.

माता-पिता के साथ अनिशा।


मां गृहिणी और पिता व्यवसायी हैं
अनिशा वर्तमान में एमबीबीएस फाइनल में है और पीजी के लिए यूएस-एमएलई का एग्जाम दिया है. वे प्रथम चरण में क्वालीफाई हो चुकी हैं. अभी भी अनिशा  के कैंसर के फोलोअप चल रहे हैं. अनीशा की मां अंजु अग्रवाल गृहिणी हैं तथा पिता मुकेश अग्रवाल अजमेर में व्यवसायी हैं.

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जुनून और हार्ड वर्क जरूरी है
बकौल अनिशा सफलता के लिए जुनून और हार्ड वर्क जरूरी है. अगर आप फेल होते हैं तो चुपचाप नहीं बैठें. अपने कार्य में निरंतरता रखें. फेलियर को सक्सेस में बदलने के तरीके खोजें. निराश तो कतई नहीं हों. अगर निराशा हावी भी हो जाए तो परिवार और दोस्तों को साथ लें. उनसे अपने पॉजिटिव-नेगेटिव पहलुओं पर बात करें. मोटिवेशनल विचारों को पढ़ें और उन्हें समझें.

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