UPSC Preparation Tips: मुख्‍य परीक्षा की तरह करें प्री एग्‍जाम की तैयारी, तभी कर पाएंगे एग्‍जाम क्रैक

कोटा के विपिन गर्ग ने सिविल सर्विसेज एग्जाम में बीसवीं रैंक हासिल की है.

UPSC Preparation Tips: प्रारंभ‍िक परीक्षा की तैयारी में रखें इन बातों का ध्‍यान रखना जरूरी है. क्‍योंकि मेहनत के साथ परीक्षा की तैयारी की रणनीत‍ि भी उतनी ही जरूरी है.

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UPSC Preparation Tips: संघ लोक सेवा आयोग की स‍िव‍िल सेवा परीक्षा क्रैक करने के ल‍िये क्या-क्या पढ़ें, यह जानना जितना आवश्‍यक है, उससे भी महत्‍वपूर्ण बात यह है कि‍ पढ़ाई कैसे करें. यहां मैं व‍िशेषकर, वो बातें आपके सामने रख रहा हूंं, जो प्रारंभ‍िक परीक्षा की तैयारी की दृष्टि से आपके लिए सहायक हो सकती हैं. ये कुछ महत्वपूर्ण बातें यहां नीचे दी गई हैं:

1. प्रारंभ‍िक परीक्षा की तैयारी मेन एग्‍जाम की तरह:
प्रारंभ‍िक परीक्षा की तैयारी कभी प्रारंभ‍िक परीक्षा की पद्धति के अनुसार न करें. आपको मुख्य परीक्षा की तैयारी करनी है, उसी से प्रारम्भिक परीक्षा की तैयारी हो जाएगी. यदि आप ऐसा नहीं करेंगे, तो आप स्वयं को धोखा देंगे.

2. कंफ्यूज कर देंगे आसान सवाल:
आप अनसाॅल्वड पेपर्स उठाकर देखें. आप पाएंगे कि प्रश्‍न तो बहुत आसान हैं, लेकिन उनके जो विकल्प दिए गए हैं, वे कतई आसान नहीं हैं. हो सकता है कि चार विकल्पों में से दो विकल्प आसान भी हों, लेकिन दो विकल्पों के बीच का सूक्ष्म अन्तर ही आपकी सफलता को संदिग्ध कर देगा.

व‍िषय की समझ अच्‍छी हो:
धीरे-धीरे यू.पी.एस.सी. में समूह विकल्पों की प्रवृत्‍त‍ि बढ़ती जा रही है. समूह विकल्प कहने का अर्थ है - शुरू में चार विकल्प देना और उसके बाद फिर से चार विकल्प देकर उनमें भी अलग-अलग तरह के विकल्पों के समूह बना देना. इससे तो उलझन और भी ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसे प्रश्‍न अपने उत्‍तर के लिए अधिक समय की मांग करते हैं. ऐसे प्रश्‍नों को आप तभी हल कर पाएंगे, जब आपके पास उस विषय की बहुत अच्छी समझ हो. इसलिए मैं यह बात कह रहा हूंं कि आप प्रारम्भिक परीक्षा की तैयारी मुख्य परीक्षा के अनुसार करें.

शब्‍दावली मजबूत करें:
पढ़े हुए अंशों पर आप सूक्ष्मता से ध्यान दें और उन पर थोड़ी देर विचार भी करें. यह नियम आधारभूत तथ्यों को समझने पर विशेष रूप से लागू होता है. उदाहरण के लिए यदि आप कोई परिभाषा पढ़ रहे हैं, तो आपको देखना होगा कि उस परिभाषा की शब्दावली क्या हैं.

सोचने की गत‍ि करें तेज:
प्रारंभ‍िक परीक्षा विषय की स्पष्ट जानकारी के साथ-साथ समय का भी खेल है. आपकी सोचने की गति तेज होनी चाहिए. इस क्षमता को आप अभ्यास करके ही प्राप्त कर सकते हैं. इसलिए समय पर वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्‍नों की प्रैक्टिस करते रहना चाहिए. आपकी यह प्रैक्‍ट‍िस केवल यह देखने के लिए न हो कि आपका स्कोर कितना हो रहा है, बल्कि आपको इससे भी आगे सोचना पड़ेगा. यहांं आपको अपना उल्टा मूल्यांकन करना होगा. इस बारे में आपको निम्‍न बिन्दुओं पर ध्यान देना चाहिए.

- जिन प्रश्‍नों को आप बिना किसी भ्रम के हल नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें छोड़ दीजिए और उन पर निषान लगा दीजिए. बाद में विचार कीजिए कि वे प्रश्‍न आपसे हल क्यों नहीं हो रहे थे. अपनी इस कमजोरी को पकड़िए.

- जिन्हें आपने पूरे विश्‍वास के साथ हल कर दिया है, लेकिन वे गलत हो गए तो उस पर सोचिए कि ऐसा क्यों हुआ. यह सबसे खतरनाक स्थिति होती है जो अधिकांश स्टूडेन्ट्स की असफलता का मूल कारण होती है. जब आप समझ ही नहीं पाएंंगे कि आपसे गलती हुई कहां है, तो फिर आप उसे सुधारेंगे कैसे? ऐसे स्टूडेन्ट्स की संख्या कम नहीं होती, जो परीक्षा देने के बाद कम से कम 75 प्रतिशत नम्बर लाने का दावा करते हैं, लेकिन क्‍वालीफाई नहीं कर पाते. मुझे शक रहता है कि अगले वर्ष भी उनके साथ कहीं यही दुर्घटना न घट जाए. ज्यादातर के साथ घट ही जाती है.

- जो प्रश्‍न आपसे हल नहीं हो पा रहे हैं, उन पर निशान लगा दें और बाद में विचार करें कि ऐसा क्यों हुआ. क्या आपने उसके बारे में पढ़ा नहीं था. यदि पढ़ा था, तो क्या समझा नहीं था? यदि समझा था, तो प्रश्‍न हल क्यों नहीं हो पाया? क्या विकल्पों में उलझ गए? यदि विकल्पों में उलझ गए, तो इसका अर्थ हुआ कि आपने विषय को समझा तो था, लेकिन उसकी सूक्ष्मता को पकड़ नहीं पाए थे.
अब यह प्रश्‍न आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण हो गया है. आपको चाहिए कि इससे संबंधित चैप्टर को आप फिर से पूरे मनोयोग के साथ पढ़ें, ताकि इस पर आपकी पकड़ अच्छी बन जाए.

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