IAS Preparation : कितनी सही है IAS की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग ! जान लें इसके सभी पक्ष

ऑनलाइन कोचिंग की फीस ऑफलाइन के मुकाबले करीब 20 फीसदी होती है.

ऑनलाइन कोचिंग की फीस ऑफलाइन के मुकाबले करीब 20 फीसदी होती है.

IAS Preparation : सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने वाले अभ्यर्थियों के सामने इस वक्त एक चुनौती ऑनलाइन कोचिंग और ऑफलाइन कोचिंग में से एक का चुनाव भी है. अच्छी तैयारी के लिए सही विकल्प का चुनाव बेहद जरूरी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 23, 2021, 4:14 AM IST
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नई दिल्ली. देश के लाखों युवा आईएएस बनने के सपने देखते हैं. लेकिन मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले ऐसे युवाओं की बड़ी संख्या है जिनके के लिए दिल्ली जैसे महानगरों में जाकर आईएएस की कोचिंग कर पाना बेहद मुश्किल है. कोचिंग की फीस के अलावा इन शहरों में में रहने का खर्च भारी पड़ता है. लेकिन ऑनलाइन शुरू होने के बाद आर्थिक समस्याएं कुछ हद तक सुलझती नजर आती हैं. कोरोना महामारी की वजह से भी ऑनलाइन कोचिंग के ट्रेंड ने जोर पकड़ा है. हालांकि इसके कई सकारात्मक पक्ष भी हैं तो नकारात्मक भी. आइए देखते हैं इन पक्षों को. ताकि छात्र अपने हिसाब से सही विकल्प का चुनाव कर सकें

कोचिंग की कम फीस और रहने के खर्च की बचत

ऑनलाइन कोचिंग का सबसे पॉजिटिव पक्ष यही है कि इसकी फीस काफी कम होती है. कमजोर आर्थिक स्थिति वाले अभ्यर्थी भी फीस चुका सकते हैं. यह ऑफलाइन कोचिंग के मुकाबले करीब 20 फीसदी होती है. यानी दो लाख के स्थान पर सिर्फ 40 हजार में ही हो सकती है. इसके अलावा घर से दूर किसी बड़े शहर में जाकर कमरा लेकर रहने का खर्च भी बच सकता है. ऑनलाइन कोचिंग के जरिए घर बैठे ही पढ़ाई हो सकती है.

लेक्चर कभी भी सुनने की सुविधा
पारंपरिक कोचिंग क्लास में समय को लेकर एक पाबंदी होती है. जिसकी वजह से कई बार नौकरी करते हुए कोचिंग कर पाना संभव नहीं हो पाता. लेकिन ऑनलाइन कोचिंग में रिकॉर्डेड लेक्चर मिल जाते हैं. इसे अभ्यर्थी जब भी वक्त मिले, सुनन सकते हैं. ज्यादातर ऑनलाइन कोचिंग इस तरह के कंटेंट उपलब्ध कराती हैं.

क्वॉलिटी लर्निंग मॉड्यूल

ऑनलाइन कोचिंग शुरू होने के बाद इस इंडस्ट्री में जबर्दस्त स्पर्धा बढ़ी है. इस होड़ के कारण कई कोचिंग संस्थान लर्निंग के कई बेहतर मॉड्यूल लेकर आ रहे हैं. इसके अलावा अभ्यर्थी एक साथ अलग-अलग सब्जेक्ट्स की अलग-अलग कोचिंग आसानी से ज्वाइन कर सकते हैं. अभ्यर्थियों के पास बेहतर चुनने का विकल्प बढ़े हैं.



ऑनलाइन कोचिंग की सीमा

- ऑनलाइन कोचिंग की सबसे बड़ी दिक्कत सेल्फ मोटिवेशन की है. सिविल सेवा की तैयारी शुरू करने वाले अभ्यर्थियों को लगातार स्वयं को ही मोटिवेट करना पड़ता है. जबकि ऑफलाइन क्लास में मोटिवेट करने का कार्य शिक्षक करते हैं.

- ऑनलाइन कोचिंग क्लास में शिक्षक व्यक्तिगत तौर पर छात्रों पर ध्यान नहीं दे सकते. प्रत्येक छात्र अलग तरह की समस्याओं का सामना करते हैं. इसका निदान नहीं हो पाता. हालांकि ऑनलाइन क्लास में भी कई शिक्षक छात्रे को व्यक्तिगत रूप से डाउट क्लीयर करते हैं. कोचिंग का चुनाव करते समय यह ध्यान रखना चाहिए.

- तीसरी सबसे बड़ी समस्या है छात्र के आइसोलेशन में चले जाने की. पारंपरिक क्लासरूम में छात्र शिक्षकों और क्लासमेट्स से मिलते हैं. डिस्कसन करते हैं. लेक्चर के दौरान समझ न आने वाली कई बातें क्लासमेट्स से बातचीत में ही क्लीयर हो जाती हैं.

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