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UPSC Exam Preparation Tips: क्या सच में ‘सब कुछ भाग्य का खेल है'

एग्जाम देने वाले कैंडिडेट्स  यह समझ पाने में असमर्थ हैं कि वे अपनी तैयारी करें तो कैसे करें.

एग्जाम देने वाले कैंडिडेट्स यह समझ पाने में असमर्थ हैं कि वे अपनी तैयारी करें तो कैसे करें.

UPSC Exam Preparation Tips: दरअसल, इस बार की प्रारम्भिक परीक्षा के बाद परीक्षार्थी अपने आप को अनाथ जैसा महसूस कर रहे हैं. वे स्वयं को एक अनजाने प्रकार के अवसाद की गिरफ्त में पा रहे हैं. अपनी मेहनत, ज्ञान, सूझबुझ तथा तैयारी एवं परीक्षा में बैठने के अनुभवों पर से उसका विश्वास खत्म हो गया है. वे यह समझ पाने में असमर्थ हैं कि वे अपनी तैयारी करें तो कैसे करें.

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UPSC Exam Preparation Tips: 5 जून को सिविल सर्विस की प्रारम्भिक परीक्षा हुई थी, और इसके सोलह दिन बाद ही अनुमानतः 5 लाख उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करके यूपीएससी ने परिणाम घोषित कर दिये. इसके लिए आयोग की प्रशंसा की जानी चाहिए. लेकिन रिजल्ट के आते ही परीक्षा के बाद बना निराशा का वातावरण अधिक गहरा हो गया. इस बार सामान्य अध्ययन प्रथम और सामान्य अध्ययन द्वितीय के जो पेपर्स आये, वे इतने कठिन और अनपेक्षित थे कि कोई भी अपनी सफलता के बारे में निश्चित नहीं था. चूंकि यह परीक्षा चयन पर आधारित परीक्षा है, इसलिए एक निर्धारित संख्या तक उम्मीदवारों का चयन होना ही था. फलस्वरूप कुल लगभग तेरह हजार युवाओं को मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गई.

प्री के परिणाम चौंकाने वाले
एक मार्गदर्शक के रूप में इस परीक्षा की तैयारी के सभी चरणों से सीधे-सीधे जुड़ा होने के कारण इसमें बैठने वाले हजारों विद्यार्थियों से मेरा सीधा सम्पर्क है. इस बार के प्री के परिणाम इनके लिए चौंकाने वाले रहे हैं. और स्वयं मेरे लिए भी. बहुत से ऐसे उम्मीद्वार, जिनकी तैयारी अच्छी थी, इससे पहले के प्री में सेलेक्ट होते रहे थे, इस बार रह गये. इसके विपरीत कुछ ऐसे उम्मीदवार सफल हुए, जिन्हें न तो स्वयं इसकी आशा थी और न ही दूसरों को.

इस साल के सामान्य ज्ञान के दोनों पेपर्स 
ऐसा नहीं है कि इसी वर्ष ऐसा हुआ है. हर साल ऐसा होता है. लेकिन इस बार यह कुछ ज्यादा ही रहा. यह इतना अधिक रहा है कि उम्मीदवार यह निष्कर्ष निकालने को मजबूर हो रहे हैं कि ‘सब कुछ भाग्य का खेल है.‘ वैसे भी इस साल के सामान्य ज्ञान के दोनों पेपर्स को देखने के बाद इस निष्कर्ष पर अविश्वास कर पाना कठिन मालूम पड़ता है.

निष्कर्ष का सीधा प्रभाव युवाओं की मानसिकता पर 
यहाँ सवाल यह है कि क्या इतनी उच्च स्तर की प्रतियोगी परीक्षा के लिए इस तरह के निष्कर्ष को सही ठहराया जा सकता है? जाहिर है कि इस निष्कर्ष का सीधा प्रभाव युवाओं की मानसिकता पर पड़ेगा. उनकी तैयारी की दृष्टि धूमिल होगी. वे दिग्भ्रमित होंगे.

इस परीक्षा में बैठने की न्यूनतम आयु
इस परीक्षा में बैठने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष रखी गई है. इस उम्र से ही युवा परीक्षा देने लगते हैं. यह उनके ग्रेजुएशन पूरा करने की उम्र है. इस समय तक उनका दिमाग कितना परिपक्व हो सकता है, इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है. लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि अधिकतम आयु सीमा सामान्य श्रेणी के लिए 32 वर्ष तथा अन्य के लिए 35 वर्ष है. ग्यारह से चौदह वर्ष का यह अंतराल किसी भी युवा को प्रौढ़ बनाने के लिए एक पर्याप्त समय है.

प्रश्नपत्रों को इतना अधिक कठिन बनाने की ये है वजह
शायद यह भी एक वह कारण है, जो प्रश्नपत्रों को इतना अधिक कठिन बनाने में अपनी भूमिका निभा रहा है. प्रश्नों के तथ्यों तथा उनके स्वरूप की जटिलता को देखकर यह लगता है कि प्रश्न तैयार करने वाले के दिमाग में 21 वर्ष के उस युवा के स्थान पर तीस वर्ष का युवा मौजूद रहता है. इसके कारण प्रश्नों की सहजता समाप्त हो जाती है.

तैयारी करें तो कैसे करें
दरअसल, इस बार की प्रारम्भिक परीक्षा के बाद परीक्षार्थी अपने आप को अनाथ जैसा महसूस कर रहे हैं. वे स्वयं को एक अनजाने प्रकार के अवसाद की गिरफ्त में पा रहे हैं. अपनी मेहनत, ज्ञान, सूझबुझ तथा तैयारी एवं परीक्षा में बैठने के अनुभवों पर से उसका विश्वास खत्म हो गया है. वे यह समझ पाने में असमर्थ हैं कि वे अपनी तैयारी करें तो कैसे करें.

क्या संघ लोक सेवा आयोग परीक्षार्थियों में व्याप्त इस बेचैनी, मायूसी और अफरातफरी पर ध्यान देकर समाधान के लिए कुछ करेगा? (लेखक डॉ० विजय अग्रवाल पूर्व सिविल सर्वेंट और afeias के संस्थापाक हैं.)

Tags: Examination, Upsc exam, UPSC Exams

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