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UPSC IAS Exam Tips: IAS परीक्षा के डरावने आंकड़ों का सच

IAS की तैयारी कर रहे उम्‍मीदवारों के ल‍िये जरूरी ट‍िप्‍स

IAS की तैयारी कर रहे उम्‍मीदवारों के ल‍िये जरूरी ट‍िप्‍स

UPSC IAS Exam की तैयारी कर रहे उम्‍मीदवार, पदों के ल‍िये अप्‍लाई करने वाली भीड़ को देखकर पहले ही उम्‍मीद छोड़ देते हैं. अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो डॉ. व‍िजय अग्रवाल के ये टिप्‍स आपके काम आ सकते हैं.

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UPSC IAS Exam Tips: मैं साल 1979 से इस सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा हुआ हूं. जब इस वर्तमान पद्धति की शुरूआत हुई थी. सेवा में आ जाने के बाद भी अपनी अकादमिक रूचि के कारण सैकड़ों व्यवस्ताओं के बावजूद मैं कभी भी इससे अलग नहीं हो सका. इसलिए मैं स्वयं को उन सौभाग्यशाली लोगों में मानता हूं, जो अनुभव एवं शिक्षण के स्तर पर इसके जीवंत गवाह हैं.

अंग्रेजी के साथ-साथ संविधान में उल्लेखित सभी भारतीय भाषाओं को परीक्षा का माध्यम बनाये जाने के बाद से इसमें बैठने वाले छात्रों की संख्या हजारों से उछलकर अब कई लाखों में पहुंच गई है. लेकिन इसके समानान्तर कुल पदों की संख्या अभी भी लगभग वही बनी हुई है, जितनी वह साल 1980 में हुआ करती थी. इसके कारण सफलता की संभावना का प्रतिशत लगातार कम होता चला गया.

पिछले साल दस लाख परीक्षार्थियों ने आवेदन किया. लगभग साढ़े चार लाख युवा प्री में बैठे. एक हजार लोगों को अंतिम सफलता मिल सकी. यदि हम आवेदकों और सफल प्रतियोगियों का परस्पर अनुपात निकालें, तो यह एक हजार में एक परीक्षार्थी का होगा. निश्चित ही यह आंकड़ा डराने वाला तो है, लेकिन क्या सचमुच यह इतना भयावह है, जितना हमें सीधे तौर पर दिखाई दे रहा है. आइये इसके सच को जानने की कोशिश करते हैं. ताकि आपका दिमाग अनावश्यक एवं झूठे दबाव से थोड़ा राहत महसूस कर सके.

सच्चा प्रतियोगी हमें उनको मानना चाहिए जो मैदान में उतरते हैं. न कि उनको, जो मैदान में उतरने के लिए अपना सिर्फ नाम दर्ज कराते हैं. हम यहां एक हजार के मानक आंकड़े को लेकर चलते हैं. चूंकि परीक्षा में बैठने वालों की संख्या इनमें से लगभग 450 की होती है तो अनुपात सीधे-सीधे एक हजार में एक की जगह साढ़े चार सौ में एक का हो जाता है. यह अनुपात काफी ठीक-ठाक है. लेकिन परीक्षार्थियों के सामने इस आंकड़े को न रखकर एक हजार के आंकड़े को पेश करके उन्हें जानबूझकर डराया जाता है.

अब हम इन साढ़े चार सौ परीक्षार्थियों की भी सच्चाई की जांच करना चाहेंगे. इस जांच की कसौटी के रूप में अब मेरे पास सिवाय अनुभव के कुछ भी नहीं है, यदि आप विश्वास कर सकें तो.

इन साढ़े चार सौ में से भी आधे यानी कि लगभग 200-250 परीक्षार्थी ऐसे होते हैं, जो बिना पूरी एवं सही तैयारी के यूं ही कई कारणों से प्री में बैठ जाते हैं. जैसे कि परीक्षा के लिए शहर में ही सेन्टर होने के कारण, दूसरों को दिखाने के लिए, टाइम पास करने के लिए या घर वालों को बताने के लिए आदि-आदि. सच पूछिये तो प्री-परीक्षा में थोड़ी ईमानदारी के साथ बैठने वालों का सही आंकड़ा एक हजार से घटकर केवल दो सौ का रह जाता है.

लेकिन इन दो सौ में से सौ परीक्षार्थी ऐसे होते हैं, जिनकी मुख्य परीक्षा की तैयारी नहीं हुई होती. निश्चित है कि ये इस दूसरे दौर में बाहर हो जायेंगे. इस प्रकार शुद्ध आंकड़ा हमारे पास सौ का ही बचता है. मुझे नहीं लगता कि इस अनुपात को बुरा कहा जाना चाहिए.

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