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UPSC IAS Pre Exam 2020 Preparation Tips: जान‍िये, क‍ितना मुश्‍क‍िल है प्रारंभ‍िक परीक्षा क्‍वाल‍िफाई करना

News18Hindi
Updated: February 11, 2020, 4:58 PM IST
UPSC IAS Pre Exam 2020 Preparation Tips: जान‍िये, क‍ितना मुश्‍क‍िल है प्रारंभ‍िक परीक्षा क्‍वाल‍िफाई करना
यूपीएससी प्रारंभ‍िक परीक्षा के ल‍िये आवेदन की प्रक्र‍िया 12 फरवरी से शुरू हो रही है.

UPSC IAS Pre Exam 2020: यूपीएससी स‍िव‍िल सेवा प्रारंभ‍िक परीक्षा के ल‍िये आवेदन की प्रक्र‍िया शुरू होने जा रही है. मई में इसकी परीक्षा होगी. जान‍िये यह परीक्षा पास करना क‍ितना आसान है या क‍ितना मुश्‍क‍िल है.

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  • Last Updated: February 11, 2020, 4:58 PM IST
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UPSC IAS Pre Exam 2020 Preparation Tips: सिविल सेवा की प्रारम्भिक परीक्षा सरल है या कठिन, इस बारे में दो परस्पर विरोधी विचार हैं. ज्यादातर लोग इसे सरल मानते हैं. जबकि कुछ को यह कठिन मालूम होती है. सरल मानने वालों को लगता है कि प्रश्‍नों के उत्‍तर तो दिये ही रहते हैं और यदि हमने उस विषय को पढ़ा है, तो विकल्पों को देखने के बाद उत्‍तर पकड़ में आ ही जाएंगे. इसमें अपनी ओर से कुछ लिखना भी नहीं होता है. इसलिए यह सरल है. सरल इसलिए भी है कि यदि किसी तरह 55 प्रतिशत स्कोर आ जाए, तो सिलेशन पक्का है और इतना लाना मुश्‍क‍िल नहीं होता. सरल मानने वाले में ये अधिकांश वे लोग होते हैं, जो अभी तक प्री में बैठे नहीं हैं.

लेकिन जो बैठ जाते हैं, वे अब इसे इतना सरल नहीं मानते. सरल होने के लिए पहले वे जो-जो कारण देते थे, अब वे वही-वही कारण इसके कठिन होने के लिए देने लगते हैं. अब उन्हें लगता है कि विकल्प एक-दूसरे से इतने मिलते-जुलते होते हैं कि सही उत्‍तर को पकड़ पाना मुश्‍क‍िल हो जाता है. जिस तरह के विकल्प दिए जाते हैं, वे बड़ी से बड़ी भूल-भुलैया को भी मात दे देते हैं. दिमाग चकरा जाता हैं, उन विकल्पों को पढ़कर.

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एक बड़ी मुश्‍क‍िल है- निगेटिव मार्किंग की. यानी कि अंदाजा लगाकर निशान लगाने का अर्थ होगा-खतरा मोल लेना. जब प्रश्‍न पढ़ते हैं, तो लगता है कि इसके बारे में हमने पढ़ा है. लेकिन जब विकल्पों को देखते हैं, तो गड़बड़ा जाते हैं कि क्या पढ़ा था. लगता तो है कि कुछ-कुछ पढ़ा था, किन्तु यह नहीं लगता कि बिल्कुल यही पढ़ा था. ऐसे में उत्‍तर देना आसान नहीं होता. इसलिए 55 प्रतिशत का स्कोर अपने-आप में लोहे के चने चबाने जैसा बन जाता है.

तो फिर इन दोनों में सच क्या है? मित्रोंं, वस्तुतः सरलता और कठिनता का रहस्य सापेक्षता में छिपा होता है. जब हमारी तैयारी होती है और हम उसके बारे में जानते हैं, तब वह विषय या परीक्षा हमारे लिए सरल हो जाती है- फिर चाहे वह कितनी भी कठिन क्यों न हो. लेकिन जब हमसे वह नहीं बनता, तो सरल होने के बावजूद वह हमारे लिए कठिन हो जाता है.

दूसरी बात है- तैयारी करने की पद्धति की. यदि आप प्रारम्भिक परीक्षा की तैयारी वस्तुनिष्ठ पद्धति से करते हैं, तो निश्‍च‍ित है कि यह परीक्षा आपके लिए बहुत कठिन होगी. परीक्षार्थी इस सत्य को भूल ही जाते हैं कि कम से कम सिविल सेवा की प्रारम्भिक परीक्षा की तैयारी इस तरीके से हो ही नहीं सकती. वे गलती से राज्य सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की पद्धति को ही इस पर लागू कर देते हैं.

प्रारम्भिक परीक्षा की तैयारी के लिए मूलभूत जानकारी रखनी होती है और यह मूलभूत जानकारी आपको मुख्य परीक्षा की तैयारी करने की पद्धति से ही मिल सकती है. आप इस तथ्य को समझें और अपनी तैयारी को इसी के अनुकूल आकार दें.
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निश्‍च‍ित रूप से यदि विकल्प सरल हों, तो प्रश्‍न कोई बहुत कठिन नहीं होते. सारा संकट विकल्पों की जटिलता का संकट होता है. विकल्पों की जटिलता से पार पाने का आपके पास सिर्फ एक ही उपाय है और वह है- आपके विचारों की स्पष्टता. यदि आप पूछे गए प्रश्‍न को लेकर बहुत स्पष्ट नहीं हैं, दिमागी रूप से मजबूत नहीं हैं, तो गलत उत्‍तर की सम्भावना बढ़ जाएगी. विचारों की यह स्पष्टता तभी हो सकती है, जब आप विषय पर बहुत अच्छी पकड़ रखते हों. यह पकड़ केवल तथ्यों की जानकारी ही नहीं है, बल्कि उन तथ्यों की गहरी समझ से भी जुड़ी हुई है.

यहांं तक कि वह आपसे ‘अपडेटेड नाॅलेज‘ की मांग करती है. यदि आप अनसाॅल्व्ड पेपर उठाकर देखें, तो पाएंंगे कि ऐसे बहुत से प्रश्‍न हैं, जो दिखते तो किसी विषय से संबंधित हैं, लेकिन उनका कुछ न कुछ जुड़ाव करेंट अफेयर्स से रहा होता है. यह बात आपको अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र तथा भूगोल जैसे विषयों के साथ सबसे अधिक मिलेगी. वैसे भी करेंट अफेयर्स तो सामान्य ज्ञान का एक महत्वपूर्ण भाग होता ही है.

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First published: February 11, 2020, 4:53 PM IST
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