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UPSC Preparation tips: UPSC की तैयारी के लिए कैसे बढ़ाएं सामान्य ज्ञान, पढ़ें टिप्स

UPSC Preparation tips: UPSC की तैयारी के लिए कैसे बढ़ाएं सामान्य ज्ञान, पढ़ें टिप्स

UPSC Preparation tips in hindi: हम किसे सामान्‍य कहेंगे और किसे विशेष ज्ञान. हमारे पास इसके लिये कौन सा पैमाना है?

UPSC Preparation tips in hindi: हम किसे सामान्‍य कहेंगे और किसे विशेष ज्ञान. हमारे पास इसके लिये कौन सा पैमाना है?

UPSC Preparation tips in hindi: अभी हमारे स्‍कूल-कॉलेज में समसामयिक घटनाओं को किसी विषय के रूप में नहीं रखा गया है, जो सामान्‍य ज्ञान का एक बड़ा हिस्‍सा होता है. इसलिए समसामयिक ज्ञान को भी इसमें जोड़ा जाना चाहिए. हाँ, सामान्‍य ज्ञान की जो सीमा होगी, उसका संबंध उस स्‍थायी ज्ञान से होगा, जो अभी तक पुस्‍तकों के माध्‍यम से जाना गया है.

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UPSC Preparation tips in hindi: सिविल सेवा परीक्षा के बारे में थोड़ी-सी भी जानकारी रखने वाला हर व्‍यक्ति इस एक विषय से परिचित ही होगा, जिसका नाम है – सामान्‍य ज्ञान. वैसे यह सामान्‍य ज्ञान केवल सिविल सेवा परीक्षा का ही एक महत्‍वपूर्ण अंग नहीं है, बल्कि राज्‍य सेवा परीक्षाओं तथा अन्‍य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अब इसकी भूमिका क्रमश: काफी बढ़ती जा रही है.

अलग-अलग विषयों के युवाओं की एक ही परीक्षा लेना एक बहुत कठिन काम होता है. इसमें जो सबसे बड़ी चुनौती आती है, वह है – Same playing field की. यानी कैसे इस तरह का प्रश्‍न-पत्र तैयार किया जाए, जो सभी परीक्षार्थियों के लिए समान मालूम पड़े. जाहिर है कि ऐसे में ध्‍यान जिस एकमात्र विषय पर जाता है, वह है- सामान्‍य ज्ञान.

किसे सामान्‍य कहेंगे और किसे विशेष ज्ञान
लेकिन जब हम ‘सामान्‍य ज्ञान’ शब्‍द का इस्‍तेमाल करते हैं, तब सवाल उठता है कि हम किसे सामान्‍य कहेंगे और किसे विशेष ज्ञान. हमारे पास इसके लिये कौन सा पैमाना है? शिक्षा के स्‍वरूप के आधार पर इसके लिए एक मानक तैयार किया जा सकता है. वर्तमान में कक्षा दसवीं तक सभी विद्यार्थियों को समान रूप से कुछ विषय पढ़ने होते हैं. भूगोल, राजनीतिशास्‍त्र, अर्थशास्‍त्र, मूलभूत विज्ञान, गणित तथा अन्‍य कुछ ऐसे विषय हैं, जिनके बारे में हर स्‍टूडेंट को पढ़ना होता है. दसवीं कक्षा के बाद उन्‍हें अपने लिये एक विशिष्‍ट शाखा का चयन करना पड़ता है. वे विज्ञान लेना चाहते हैं या वाणिज्‍य लेना चाहते हैं या कला के विषय लेना चाहते हैं. इन्‍हीं के आधार पर हमारे यहाँ स्‍नातक की डिग्रियों के नाम में भी अन्‍तर किया गया है; BSc, B.Com तथा B.A.

दसवीं तो सभी के पास होनी ही चाहिए
इससे यह स्‍पष्‍ट होता है कि दसवीं तक के स्‍तर को यह मानकर चला गया है कि इतना ज्ञान तो सभी के पास होना ही चाहिए. साथ ही यह भी कि इस ज्ञान में कौन-कौन से विषय शामिल हैं. इस प्रकार हम इस स्‍तर तक के विषयों और विषयों के स्‍तर को सामान्‍य ज्ञान के रूप में परिभाषित कर सकते हैं.

दसवीं के बाद पाँच साल की पढ़ाई 
लेकिन यहाँ दो बातें और जोड़ी जानी चाहिए. पहली बात यह कि जब स्‍टूडेंट प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने लायक होता है, तब वह दसवीं के बाद पाँच साल की पढ़ाई और कर चुका होता है. चूंकि अब वह स्‍नातक हो गया है, इसलिए उससे दसवीं तक के स्‍तर से थोड़े ऊपर की अपेक्षा की जा सकती है.

सामान्‍य ज्ञान में समसामयिक ज्ञान को जोड़ें
दूसरी बात यह कि अभी हमारे स्‍कूल-कॉलेज में समसामयिक घटनाओं को किसी विषय के रूप में नहीं रखा गया है, जो सामान्‍य ज्ञान का एक बड़ा हिस्‍सा होता है. इसलिए समसामयिक ज्ञान को भी इसमें जोड़ा जाना चाहिए. हाँ, सामान्‍य ज्ञान की जो सीमा होगी, उसका संबंध उस स्‍थायी ज्ञान से होगा, जो अभी तक पुस्‍तकों के माध्‍यम से जाना गया है. इसे एक प्रकार से पढ़े गये ज्ञान का व्‍यावहारिक एवं अद्यतन रूप कह सकते हैं. साथ ही इसके अंतर्गत उन तथ्‍यों को भी शामिल किया जाना चाहिए, जो राष्‍ट्र एवं विश्‍व के स्‍तर पर विकसित हो रहे हैं.

लेकिन दुर्भाग्‍य की बात यह है कि सिविल सेवा प्रारम्भिक परीक्षा में सामान्‍य ज्ञान का जो स्‍वरूप दिखाई दे रहा है, उसका इससे कहीं कोई लेना-देना मालूम नहीं पड़ता. इसे व्‍यवस्थित किये जाने की बहुत ही अधिक आवश्‍यकता है. (लेखक डॉ० विजय अग्रवाल पूर्व सिविल सर्वेन्‍ट एवं AFEIAS के संस्‍थापक हैं)

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Tags: Upsc exam

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