UPSC Preparation Tips: सिविल सर्विस परीक्षा में क्या रोल निभाता है इंटरव्यू, पढ़ें सिविल सर्वेंट का जवाब

इन्‍टरव्‍यू के महत्‍व को जानने के बावजूद अधिकांश युवाओं को यही लगता रहता है कि जब समय आयेगा, तब कर लेंगे. उन्‍हें इस छलावे वाले भ्रम से अपने को बचाना चाहिए. (सांकेतिक फोटो)

अक्‍सर यह देखने में आया है कि मुख्‍य परीक्षा में टॉपर के मार्क्‍स हासिल करने के बाद भी उसकी रैंकिंग सौ से भी नीचे केवल इसलिए चली गई, क्‍योंकि इन्‍टरव्‍यू में उसका प्रदर्शन अच्‍छा नहीं रहा.

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नई दिल्ली. UPSC Preparation Tips: सिविल सर्विस परीक्षा के इन्‍टरव्‍यू अब से कुछ ही दिनों बाद शुरू होने वाले हैं. तीन चरणों में होने वाली परीक्षा का यह दौर इस मायने में सबसे संवेदनशील हो जाता है कि यदि इसमें थोड़ी भी चुक हुई, तो शुरुआत फिर से करनी पड़ेगी. कुवल 25-30 मिनट समय लेने वाला यह चरण जिंदगी में फर्श से अर्श तक का फर्क पैदा करने की ताकत रखता है. ऐसे में स्‍वाभाविक ही है कि इस समय उम्‍मीदवार काफी तनाव महसूस करते हैं.

अधिकतम 206 मार्क्‍स तक मिले हैं
यदि पिछले कुछ सालों के सफल उम्‍मीदवारों की मार्कशीट को देखें, तो यह साफ पता चलता है कि लिस्‍ट में नाम दाखिल कराने के लिए इसमें कम से कम 150 नम्‍बर आने ही चाहिए. हालांकि जहाँ तक मेरी जानकारी है, इसमें अधिकतम 206 मार्क्‍स तक मिले हैं. फिर भी मुझे लगता है कि किसी भी उम्‍मीदवार का लक्ष्‍य किसी भी स्थिति में 160 नम्‍बर से ऊपर ही पाने का होना चाहिए.

275 में 160 नम्‍बर आना बहुत मुश्किल
सुनने में यह भले ही सरल लगता हो कि 275 में 160 नम्‍बर आना बहुत मुश्किल काम नहीं होना चाहिए, लेकिन वस्‍तुत: ऐसा है नहीं. इतने मार्क्‍स लाने के बारे में भी केवल वे ही युवा सोच सकते हैं, जिन्‍होंने इसके लिए अच्‍छी-खासी तैयारी की हो, वह भी लम्‍बे समय तक. लेकिन दुर्भाग्‍य की बात यह है कि इन्‍टरव्‍यू के महत्‍व को जानने के बावजूद अधिकांश युवाओं को यही लगता रहता है कि जब समय आयेगा, तब कर लेंगे. उन्‍हें इस छलावे वाले भ्रम से अपने को बचाना चाहिए.

ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ, क्‍योंकि मैंने इन्‍टरव्‍यू में उम्‍मीदवारों को 80 मार्क्‍स तक पाते हुए देखा है. यहाँ यह बात खासकर गौर करने की है कि जहाँ एक-एक नम्‍बर कई-कई सफल उम्‍मीदवारों द्वारा प्राप्‍त किए जाते हों, तो फिर उसकी भरपाई करने की गुंजाइश रह ही कहाँ जाती है.

इन्‍टरव्‍यू में प्रदर्शन अच्‍छा नहीं तो परीक्षा में टॉपर की रैंकिंग सौ से भी नीचे 
इसके विपरीत अक्‍सर यह देखने में आया है कि मुख्‍य परीक्षा में टॉपर के मार्क्‍स हासिल करने के बाद भी उसकी रैंकिंग सौ से भी नीचे केवल इसलिए चली गई, क्‍योंकि इन्‍टरव्‍यू में उसका प्रदर्शन अच्‍छा नहीं रहा. इसके विपरीत भी देखने को मिलता है. इस तरह के परिणाम अपवादस्‍वरूप नहीं बल्कि अक्सर देखन में आते हैं.

इसलिए मैं यहाँ विशेष रूप से कहना चाहूंगा कि प्‍लीज, इन्‍टरव्‍यू की तैयारी के बारे में जरा भी ढिलाई न बरतें. यदि आपका इन्‍टरव्‍यू कॉल आया है, तो मुख्‍य परीक्षा की सफलता के लिए मेरी ओर से बधाई तथा इन्‍टरव्‍यू में एक्‍सीलेन्‍ट परफारमेंस के लिए शुभकामनाएं स्‍वीकार करें. (लेखक डॉ.विजय अग्रवाल पूर्व सिविल सर्वेंट और afeias के संस्थापक हैं.)

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