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UPSC Preparation Tips: IAS बनने के लिये, ऐसी हो परीक्षा की योजना

Vijay Agrawal | News18Hindi
Updated: January 8, 2020, 12:36 PM IST
UPSC Preparation Tips: IAS बनने के लिये, ऐसी हो परीक्षा की योजना
UPSC Preparation Tips: यूपीएससी परीक्षा की तैयारी से पहले व्‍यवस्‍थ‍ित योजना बनाना सबसे जरूरी है, क्‍योंकि योजना के बगैर की गई तैयारी में भटकाव हो सकता है.

UPSC Preparation Tips: यूपीएससी परीक्षा की तैयारी से पहले व्‍यवस्‍थ‍ित योजना बनाना सबसे जरूरी है, क्‍योंकि योजना के बगैर की गई तैयारी में भटकाव हो सकता है.

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  • Last Updated: January 8, 2020, 12:36 PM IST
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UPSC Preparation Tips: किसी भी स्थान पर घूमने जाने के दो तरीके होते हैं. पहला यह कि टिकट कटाकर सीधे वहां पहुंचें और घूमना शुरू कर दें. दूसरा तरीका होता है कि पहले हम उस स्थान के बारे में सब कुछ पता करें, उसका नक्‍शा लेकर वहां के घूमने के स्थानों के बारे में जानें और तब वहां पहुंचकर घूमना शुरू करें. घूमना तो इन दोनों ही तरीकों से होगा, लेकिन घूमने का जो टोटल आउटपुट निकलेगा, वह एक जैसा नहीं होगा. निश्‍च‍ित तौर पर घूमने के दूसरे वाले तरीके से घूमने वाला न केवल अपने समय, पैसे और अपनी क्षमता की ही बचत करेगा, बल्कि उसका अधिक आनन्द भी ले सकेगा. क्योंकि उसने अपने इस काम को एक व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया है.

लगभग यही बात सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के ऊपर भी लागू की जा सकती है. ज्यादातर युवा ताबड़तोड़ ढंग से सिविल सेवा में बैठने का निर्णय ले लेते हैं और बैठना शुरू भी कर देते हैं. सच तो यह है कि दुर्भाग्य से हमारे यहां किसी भी काम की पूर्व योजना बनाने की कार्य-संस्कृति है ही नहीं. छोटे-मोटे मामलों में तो ऐसा चल जाता है, लेकिन बड़े मामलों में नहीं चलता. और यह बताने की जरूरत नहीं है कि सिविल सेवा परीक्षा में सफल होना कोई छोटा मामला नहीं है. आप जानते ही हैं कि इसके तीन चरण होते हैं - प्रारम्भिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और फिर अंतिम चरण में साक्षात्कार. आपको इन तीनों में ही सफल होना पड़ता है और इस चुनौती से पार पाना पड़ता है कि ये तीनों ही चरण एक ही बार के हों. ऐसा नहीं है कि यदि आप इस वर्ष की प्रारम्भिक परीक्षा में सफल हो जाते हैं, तो आपको अगले वर्ष की मुख्य परीक्षा में सीधे बैठने की अनुमति मिल जाएगी.

सिविल सेवा इस बात की इजाज़त नहीं देता और किसी भी एक स्तर पर असफल हो जाने की स्थिति में शुरुआत फिर शून्य से करनी पड़ती है. फिर चाहे भले ही आप साक्षात्कार तक क्यों न पहुंच गए हों. इसकी एक अन्य चुनौती भी है, जो किसी भी मायने में पहली वाली चुनौती से कम नहीं है. और यह छिपी हुई गम्भीर चुनौती ऐसी है, जिसके बारे में तब ही पता चल पाता है, जब विद्यार्थी परीक्षा में बैठता है. हो सकता है कि अब मैं जो बताने जा रहा हूं उस पर विश्‍वास कर पाना आपके लिए इतना आसान न हो, लेकिन सच तो सच ही होता है और आपको चाहिए कि आप इस सच्चाई पर विश्‍वास करके इसे अपनी तैयारी में शामिल कर लें.

यह देखने में आया है कि प्रतियोगी सिविल सेवा परीक्षा में सिलेक्ट हो गया है, लेकिन जब वह अपनी रैंकिंग को सुधारने के लिए अगले साल फिर से परीक्षा में बैठता है, तो प्रारम्भिक परीक्षा को ही क्वालीफाई नहीं कर पाता. बहुत से उम्मीदवार ऐसे भी होते हैं, जो साक्षात्कार में बहुत कम नम्बर पाते हैं और यदि ठीक-ठाक नम्बर मिल भी गए, तो इतने अधिक नम्बर नहीं मिलते कि उनकी रैंकिंग में इतना सुधार आ जाए कि वे अपनी सर्विस को बदल सकें. जाहिर है कि उन्हें फिर से परीक्षा में बैठना होगा, बशर्ते कि उनका अटेम्प्ट बचा हुआ हो.



आप इस चुनौती का सामना तभी कर सकेंगे, जब आपने अपनी परीक्षा का एक व्यवस्थित रोडमैप बना रखा हो. एक अन्य प्रकार का संकट भी देखने में आया है, जो ऑप्‍शनल पेपर से जुड़ा हुआ है. जब तक आप मुख्य परीक्षा में एक बार बैठ नहीं जाते, तब तक सही मायने में आपके लिए यह अनुमान लगाना आसान नहीं होता कि कोई विषय आपके अनुकूल है या नहीं. यद्यपि किसी विषय को लेने के बाद कोशिश यही होनी चाहिए कि उस पर आप संदेह न करें, और यदि बहुत ज़रूरी न हो जाए तो उसे बदलें भी नहीं. लेकिन व्यावहारिकता का तक़ाज़ा कुछ और होता है.

अच्छी तैयारी करने के बावजूद यदि ऑप्‍शनल में बहुत कम नम्बर आते हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि आपको अपना विषय बदलने के बारे में सोचना चाहिए. यदि आप ऐसा करते हैं, तो इसका मतलब यह हुआ कि इससे पहले वाले अटेम्प्ट एक प्रकार से ट्रायल अटेम्प्ट हो गए और इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि अगला अटेम्प्ट भी ट्रायल अटेम्प्ट नहीं होगा.

कुल मिलाकर मेरे कहने का मतलब यह है कि इस परीक्षा में जो चुनौतियां निहित हैं. वे इसे पांच दिवसीय क्रिकेट मैच के बजाय ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच बना देती हैं. यहां बॉल सीमित हैं, विकेट सीमित हैं और इन सीमित बॉल्‍स और सीमित विकेट्स के दम पर रन बनाने का जो लक्ष्य है, वह काफी बड़ा है.

यहां हर बॉल कीमती है और हर विकेट भी. कोई भी कमजोरी हमें खेल से बाहर कर सकती है. यह जरूर है कि तमाम सावधानियों और तैयारियों के बाद भी कोई न कोई कमज़ोरी तो रह ही जाती है, पर चूंकि ऐसा सबके साथ होता है, इसलिए चयन के मामले में हिसाब-किताब बराबर भी हो जाता है. फिर भी हमारी कोशिश यही होनी चाहिए कि हमसे कम से कम चूक हो. ताकि न केवल सफलता ही मिले, बल्कि अपनी पसन्द की सफलता मिले.

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First published: January 7, 2020, 5:50 PM IST
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