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Success Story: UPSC में 7 साल में हासिल की सफलता, 5वें अटेम्प्ट में मिली 326वीं रैंक

मौहम्मद नूह सिद्दीकी

मौहम्मद नूह सिद्दीकी

सात साल बेहद लंबा वक्त होता है. इस बीच नूह की ज़िंदगी में भी बहुत से उतार-चढ़ाव आए. पर वे आगे बढ़ते रहें. परीक्षा को निकालने के लिए उन्होंने खुद पर से भरोसा टूटने नहीं दिया.

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    Success Story: UPSC यानी संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission) के लिए हर साल लगभग 10 लाख आवेदन किए जाते हैं. जिसमें से लगभग 1 हजार सेलेक्ट होते हैं. देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में शुमार इस एग्जाम को क्लीयर करने वाली हर हस्ती की अपनी एक कहानी है. आज आपको रूबरू कराएंगे साल 2017 में सिविल सर्विस में 326वीं रैंक हासिल करने वाले मौहम्मद नूह सिद्दीकी से. नूह सिद्दीकी ने करीब 7 साल में, पांचवें अटेम्प्ट में सफलता हासिल की.

    यूपीएसी सिविल सर्विस एग्जाम को पास करने के लिए मेहनत और सब्र दोनों की ज़रूरत होती है. बार बार असफल होने पर नूह परेशान तो हुए पर उन्होंने तैयारी करते रहने के लिए खुद को लगातार प्रेरित किया. नूह ने 2011 में बीटेक करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की. तब से तैयारी करते-करते करीब साल में कामयाबी मिली.



    परीक्षा में फेल होने पर वे तनाव में आए लेकिन खुशनसीबी थी कि उनके पास हिम्मत बंधाने वाले दोस्त थे. जब वे बेहद स्ट्रेस में आते तो दोस्तों से बाते करते. दोस्तों से मिली हिम्मत पर नूह कहते हैं कि सफलता हासिल करने के लिए अच्छे दोस्तों का होना भी बेहद जरूरी है. वे दोस्त जो परेशानी को कम करें और हिम्मत को बढ़ाएं.

    नूह पहली बार प्रीलिम्स नहीं निकाल पाए थे. दूसरी बार में मेन्स क्लीयर नहीं हुआ. तीसरे अटेम्प्ट में वे 18 नंबर से चूक गए. दरअसल हर साल यूपीएससी का पैटर्न अलग होता है. इसके लिए सिर्फ अधिक पढ़ने परीक्षा पास नहीं होती, बल्कि प्रैक्टिस भी उतनी ही जरूरी है. फिर उन्होंने पांचवें अटेम्प्ट में परीक्षा क्रैक की.



    सात साल बेहद लंबा वक्त होता है. इस बीच नूह की ज़िंदगी में भी बहुत से उतार-चढ़ाव आए. पर वे आगे बढ़ते रहें. परीक्षा को निकालने के लिए उन्होंने खुद पर से भरोसा टूटने नहीं दिया. डेडलाइन देकर तैयारी की. खुद को स्ट्रेस से दूर रखने के लिए डेली एक्सरसाइज की. तैयारी के दौरान वे समय-समय पर घर भी गए. उनका मानना है कि घर वालों से दूर, अंजान रहकर तैयारी करना ठीक नहीं. घर वालों को पता होना चाहिए आपकी तैयारी कितनी मुश्किल है. असफलता के दौर में वो हमेशा आपको सपोर्ट करेंगे.

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