UPSC Success Story : कॉलेज में अंग्रेजी को लेकर बनता था मजाक, पहले ही प्रयास में बने आईएएस टॉपर

 पेंटर की बेटी बनी आईपीएस ऑफिसर

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UPSC Success Story : यूपीएससी की सिवल सेवा परीक्षा क्वॉलिफाई करने के लिए आमतौर पर अच्छी अंग्रेजी का ज्ञान होना जरूरी माना जाता है. लेकिन हरियाणा के एक छोटे से गांव में जन्मे और पले-बढ़े हिमांशु नागपाल ने पहले ही प्रयास में टॉप करके इस धारणा को ध्वस्त कर दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 1, 2021, 12:06 AM IST
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नई दिल्ली. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में गैर अंग्रेजी भाषी अभ्यर्थियों के लिए अंग्रेजी एक बड़ी चुनौती मानी जाती है. आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि गैर अंग्रेजी भाषी अभ्यर्थियों की सिविल सेवा परीक्षा में संख्या कम हुई है. लेकिन आज एक ऐसे शख्स की कहानी बताने जा रहे हैं जिनकी अंग्रेजी कमजोर होने का लोग मजाक बनाते थे. लेकिन वह पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्रैक करके आईएएस अधिकारी बने.

हरियाणा के हिसार जिले के एक छोटे से गांव भूना में जन्मे हिमाशु नागपाल ने वर्ष 2018 में पहले ही प्रयास में न सिर्फ यूपीएससी क्रैक की बल्कि 26 रैंक के साथ टॉपर भी बने. उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई साधारण से हिंदी मीडियम स्कूल से की. हालांकि वह पढ़ाई में अच्छे थे. 10वीं और 12वीं, दोनों कक्षाओं में उन्होंने टॉप किया था. 12वीं के बाद उन्होंने दिल्ली का रुख किया और दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में कॉमर्स में एडमिशन लिया.

पिता की मृत्यु ने बदल दी दुनिया

हंसराज कॉलेज में एडमिशन के समय दिल्ली छोड़ने उनके पिता साथ आए थे. दोनों लोग कॉलेज में बैठे थे कि वहां रखे एक बोर्ड को देखकर हिमांशु के पिता बोल पड़े कि मैं तुम्हारा नाम इस बोर्ड पर देखना चाहता हूं. दिल्ली से वापसी में सड़क हादसे में उनकी मृत्यु हो गई. इस हादसे ने हिमांशु की दुनिया को हिला दिया और पिता के कहे गए आखिरी शब्द उनेक जीवन का लक्ष्य बन गए. इसके बाद दूसरा बड़ा झटका भाई की मृत्यु का लगा. लेकिन हिमांशु ने संघर्ष करते हुए यूपीएससी की तैयारी जारी रखी.
हिमांशु के सक्सेस मंत्र

-खुद को कभी किसी से कमतर न समझें

-कठिन परिश्रम, सही डायरेक्शन और सही मोटिवेशन जरूरी है



-सतत प्रयास और तैयारी जरूरी है, भले ही धीमी हो

-जीवन में आने वाली परेशानियों को चुनौती की तरह लें

-सच्चा और इमानदार प्रयास करते रहें

कॉलेज में उड़ाया जाता था मजाक

हरियाणा के एक छोटे से गांव से दिल्ली पहुंचे हिमांशु नागपाल कॉलेज के माहौल को लेकर शुरू में काफी परेशान हुए. दूसरे स्टूडेंट्स को देखकर उनके मन में हीन भावना आती थी. हिमांशु एक इंटरव्यू में बताते हैं कि उनकी हालत ऐसी थी कि उन्हें एमपी और एमएलए में फर्क नहीं मालूम था. इस पर भी कॉलेज के साथी छात्र काफी मजाक बनाए थे.

वह कहते हैं कि जरूरी नहीं कि सिविल सेवा पास करने वाले सभी छात्र हमेशा से ही ब्रिलियंट हों. उनके जैसे लोग भी होते हैं जो तैयारी करते हुए स्टेब बाई स्टेप सफलता तक पहुंचते हैं. उनका मानना है कि ग्रेजुएशन का समय किसी भी छात्र के लिए खुद को निखारने का और तैयारी करने का बेस्ट टाइम होता है. इसका सद्उपयोग करना चाहिए.

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