Upsc Success Story : पिता ने पढ़ाने के लिए छोड़ दिया था घर, तीसरे प्रयास में बने IAS अधिकारी

आईएएस अधिकारी महेंद्र बहादुर आईआईटी से इंजीनियरिंग करना चाहते थे, लेकिन चयन नहीं हुआ था.

आईएएस अधिकारी महेंद्र बहादुर आईआईटी से इंजीनियरिंग करना चाहते थे, लेकिन चयन नहीं हुआ था.

UPSC Success Story : साल 2010 में तीसरे प्रयास में आईएएस अधिकारी बने महेंद्र बहादुर सिंह की सफलता की कहानी जिद, जज्बे और एक पिता के समर्पण की कहानी है. सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी इससे प्रेरणा ले सकते हैं.

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नई दिल्ली. यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता की प्रेरक कहानियों की कड़ी में नई सक्सेस स्टोरी है उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के सुजानपुर गांव निवासी आईएएएस अधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह की. वह 2010 में तीसरे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा क्रैक करके आईएएस अधिकारी बने थे.

बचपन से ही पढ़ाई में तेज

महेंद्र बहादुर सिंह बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे. इसकी वजह से तीसरी क्लास में उनके शिक्षक ने पढ़ाने से ही इनकार कर दिया था. शिक्षक ने उनके पिता को बुलाकर कहा कि आपका बेटा पढ़ाई में काफी होशियार है. इसका एडमिशन शहर के किसी स्कूल में करवाइए. इसका करियर बन जाएगा. महेंद्र बहादुर के पिता ने बात मानी और बेटे का एडमिशन शहर के स्कूल में करवा दिया. फिर एक दिन यह लड़का आईएएस अधिकारी बन गया. उन्होंने यह घटना खुद एक इंटरव्यू में बताई थी.



पिता चकबंदी विभाग में क्लर्क
महेंद्र बताते हैं कि उनके पिता चकबंदी विभाग में क्लर्क थे. स्कूल शिक्षक के कहने के बाद वह घर छोड़कर फतेहपुर शहर में किराए का मकान लेकर रहने लगे. शहर के स्कूल में मिड टर्म में ही एडमिशन तो हो गया लेकिन दो महीने बाद ही हुई अर्धवार्षिक परीक्षा में रिजल्ट बेहद खराब रहा. छह में से पांच विषयों में फेल हो गए. वह बताते हैं कि मैं घर आकर बहुत रोया तब पापा ने मुझे समझाया कि तुम मेहनत करो, सब अच्छा होगा. उसी साल की वार्षिक परीक्षा में पूरी क्लास में दूसरा स्थान आया. इसके बाद हर एक परीक्षा में टॉपर रहने लगे.

पिता बनाने थे खाना

महेंद्र बताते हैं कि उनके पिता सुबह ड्यूटी पर जाने से पहले खाना बनाते थे. वह ही तैयार करके स्कूल भेजते थे. दरअसल, मां और तीन अन्य भाई गांव में थे. इसके अलावा, जूनियर क्लास पिता ही नोट्स भी तैयार करवाते थे. वह खाना बनाने से लेकर कपड़े धोने और साफ-सफाई का सारा काम खुद करते थे.

आईआईटी में नहीं हुआ था सेलेक्शन

महेंद्र बताते हैं कि उन्होंने 12वीं के बाद आईईटी से इंजीनियरिंग के लिए एंट्रेंस टेस्ट दिया था. लेकिन उसमें नहीं हुआ. इसकी बजाए यूपीटीयू में हुआ. उन्होंने यूपीटीयू से बीटेक किया. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी होते ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी. इस दौरान उन्होंने कई कंपनियों में नौकरी लगी. लेकिन उनका सारा फोकस आईएएस अधिकारी बनने पर था. 2010 में तीसरे प्रयास में उन्होंने यह सफलता हासिल कर ली.

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