Uttarakhand board result 2020: किसान के बेटे मुकेश बने 12वीं में थर्ड टॉपर, UPSC क्रैक करना है मकसद

Uttarakhand board result 2020: किसान के बेटे मुकेश बने 12वीं में थर्ड टॉपर, UPSC क्रैक करना है मकसद
उत्तराखंड बोर्ड के दसवीं और बारहवीं के परिणाम एकसाथ जारी किए गए.

तीसरे स्थान पर राहुल यादव, सार्थक मैठाणी, दीपक सती, मुकेश उपाध्याय और वैभव थपलियाल रहे. चारों के 475 अंक यानी 95 प्रतिशत हैं.

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नई दिल्ली. उत्तराखंड बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (Uttarakhand Board) ने दसवीं और बारहवीं के नतीजों का ऐलान कर दिया. बोर्ड ने दसवीं और बारहवीं के नतीजे एक साथ जारी किए. छात्र उत्तराखंड बोर्ड का 10वीं, 12वीं का रिजल्ट ubse.uk.gov.in पर चेक कर सकते हैं. 12वीं के एग्जाम में कुल 1,19, 164 छात्र सम्मिलित हुए. जिसमें से 95,645 पास हुए. कुल रिजल्ट 80.26 प्रतिशत रहा. लड़के 76.68% पास हुए और लड़कियों का रिजल्ट 83.63 % रहा.

थर्ड टॉपर मुकेश उपाध्याय की कहानी
जसपुर की ब्यूटी वत्सल 500 में से 483 अंक लेकर टॉपर. 96.60 प्रतिशत अंक पाए. नैनीताल के युगल जोशी477 अंकों व 95.40 प्रतिशत के साथ सेकंड टॉपर रहे. तीसरे स्थान पर राहुल यादव, सार्थक मैठाणी, दीपक सती, मुकेश उपाध्याय और वैभव थपलियाल रहे. चारों के 475 अंक यानी 95 प्रतिशत हैं. पढ़िए थर्ड टॉपर मुकेश उपाध्याय की कहानी.
पिता पेशे से किसान 
मुकेश उपाध्याय मूल रूप से बागेशवर जिले के रहने वाले हैं. मुकेश के पिता पेशे से किसान हैं. मुकेश पढ़ाई के लिए बागेशवर जिले से नैनिताल आकर, अपने ताई-ताया के घर रहे. न्यूज18 इंडिया के बातचीत में उन्होंने कहा, उनके पिता ने पढ़ाई के लिए कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी. हमेशा समय पर पूरा स्टडी मैटेरिटल पूरा मिला, कोई कमी नहीं रही.



पढ़ाई के साधन कम 
मुकेश ने अपना गांव बागेशवर पढ़ाई के साधन कम होने की वजह से छोड़ा. वहां शिक्षक नहीं थे. टीचर्स की कमी के चलते किसी भी विषय का टीचर, कोई सा भी विषय पढ़ा देता था.

upsc जॉइन करना मकसद
नैनिताल के स्कूल में शिक्षकों का पूरा सपोर्ट था. वे स्कूल के बाद 3-4 घंटे पढ़ाई करते थे. फिजिक्स फेवरेट सब्जेक्ट रहा. क्योंकि ये नेचर से कनेक्ट करता है. बागेशवर जिसे, नैनिताल आकर पढ़ने वाले मुकेश का आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली जाने का इरादा है. वे upsc जॉइन करना चाहते हैं. उनका मकसद करप्शन कम करना है.

किसान देश का पालनहार 
गांव छोड़कर नैनिताल आना आसान तो नहीं रहा लेकिन दोस्तों का साथ रहा. ताई-ताया ने सपोर्ट किया. पिता के पेशे पर वे कहते हैं, कृषि को बचाना हमारी जिम्मेदारी है. किसान देश का पालनहार है. हालांकि वहां भी खेती करने में पानी की कमी की परेशानी रहती है.

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पहाड़ी इलाकों में तेजी से बढ़ते नशे पर उन्होंने कहा, युवाओं की सेहत मायने रखती है. उन्हें इससे दूस रहना चाहिए. लॉकडाउन के दौरान घर में रहते हुए पढ़ाई करने पर उन्होने कहा, जब मन चाहे तब पढ़ें.
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