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ये विधेयक देगा पाक, बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान के प्रवासियों को भारतीय नागरिकता, कांपेटेटिव एग्‍जाम में पूछे जा सकते हैं इससे जुड़े सवाल

News18Hindi
Updated: November 18, 2019, 12:16 PM IST
ये विधेयक देगा पाक, बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान के प्रवासियों को भारतीय नागरिकता, कांपेटेटिव एग्‍जाम में पूछे जा सकते हैं इससे जुड़े सवाल
संसद में आज पेश हो रहे इस ब‍िल के बारे में प्रत‍िस्‍पर्धी परीक्षाओं में भी पूछा जा सकता है.

भारत की नागरिकता पाने के लिये कुछ सख्‍त नियम हैं. उनमें से सबसे महत्‍वपूर्ण है भारत में कम से कम 11 साल रहना और यहां जन्‍म होना. नागरिकता संशोधन विधेयक के आने के बाद नागरिकता प्राप्‍त करने के नियमों में कई बदलाव हो जाएंगे.

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  • Last Updated: November 18, 2019, 12:16 PM IST
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नई दिल्‍ली: देश की संसद में आज से शीतकालीन सत्र शुरू है. इस बार का शीतकालीन सत्र इसलिये भी महत्‍वपूर्ण है, क्‍योंकि इस बाद मोदी सरकार नागरिकता कानून में बदलाव के लिये नागरिकता संशोधन विधेयक पेश कर रही है. मोदी सरकार इसे पेश कर रही है और इसके बाद इस पर चर्चा होगी.

अगर आप क‍िसी कांपेटेटिव एग्‍जाम की तैयारी कर रहे हैं, खासतौर से आईएएस सिव‍िल सेवा (IAS Civil Services Exam) में इस तरह के सवाल पूछे जा सकते हैं. इसलिये, आपका यह जानना बेहद जरूरी है क‍ि नागर‍िकता संशोधन विधेयक क्‍या है और इसके लागू होने से क्‍या बदलाव होंगे.

अगर इस विधेयक को दोनों सदनों में पारित कर दिया जाता है तो अफगानिस्‍तान, पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश के सभी गैरकानूनी प्रवासियों को, जिसमें हिन्‍दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं, उन्‍हें यहां की नागरिकता प्राप्‍त हो जाएगी.

हालांकि इससे पहले नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 को इससे पहले साल 2016 में लोकसभा में पेश किया गया था और इसके बाद अगस्‍त 2016 में इसे संयुक्‍त संसदीय समिति को सौंपा गया था. करीब ढाई साल बाद समिति ने इसी साल जनवरी में इस विधेयक पर अपनी रिपोर्ट सौंपी.

दरअसल, इस विधेयक के जरिये उन सिर्फ छह धमों (हिन्‍दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) के प्रवासियों को ही नागरिकता का लाभ मिल सकेगा. धर्मों का आधार होने के कारण इस विधेयक पर विवाद हो रहा है. इस विधेयक के आने के बाद नागरिकता के नियमों में एक बड़ा बदलाव यह भी होगा कि भारत में छह साल से रह रहे सभी प्रवासियों को नागरिकता मिल जाएगी. इससे पहले 12 साल की अनिवार्यता थी. अ‍ब 6 अल्पसंख्यक समुदायों को 12 साल की बजाय, सिर्फ 6 साल ही भारत में गुजारने के बाद उन्‍हें भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्‍तावेज प्राप्‍त हो जाएंगे.

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First published: November 18, 2019, 12:08 PM IST
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