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इंटरनेट शटडाउन क्या होता है? भारत में इंटरनेट कैसे बंद होता है, जानिए पूरी प्रोसेस

साल 2017 से पहले जिले के डीएम इंटरनेट बंद करने का आदेश देते थे.

साल 2017 से पहले जिले के डीएम इंटरनेट बंद करने का आदेश देते थे.

लॉकडाउन के बीच वाट्सएप ग्रुपों और अन्य सोशल मीडिया में अफवाह फैल रही है कि सरकार इंटरनेट शटडाउन या इंटरनेट को बैन कर सकती है.

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    नई दिल्ली. देश में लॉकडाउन के बीच वाट्सएप ग्रुपों और अन्य सोशल मीडिया में अफवाह फैल रही है कि सरकार इंटरनेट शटडाउन या इंटरनेट को बैन कर सकती है. ऐसे में हम आपको बता रहें हैं कि इंटरनेट बैन या इंटरनेट शटडाउन क्या होता है? किस स्थिति में सरकार इंटरनेट को बैन कर सकती है. ऐसे करते वक्त किन नियमों का पालन करना होता है.

    इंटरनेट शटडाउन क्या होता है?
    देश या किसी क्षेत्र में बिगड़त हालात के कारण कुछ खास परिस्थितियों में किसी इलाके, राज्य या फिर देश में इंटरनेट सेवा को बंद किया जा सकता है. इसका मुख्य मकसद सूचना के फैलाव को रोकना होता है ताकि अशांत स्थितियों पर काबू किया जा सके. माना जाता है कि इंटरनेट के माध्यम से अफवाहें तेजी से फैलती हैं. इसलिए इसको बंद कर दिया जाता है. जब सरकार को लगता है कि हिंसा भड़क सकती है और उसको काबू करना जरूरी है तो इंटरनेट बंदी का सहारा लेती है.

    इंटरनेट शटडाउन में क्या होता है?
    इंटरनेट बैन आंशिक या पूरी तरह से भी हो सकता है. अधिकतर यह आंशिक होता है, जो किसी इलाके या राज्य तक सीमित होता है. आंशिक बैन उस स्थिति को कहते हैं जब कुछ साइटों को छोड़कर बाकी साइटों तक ऐक्सेस हो सके. पूरी तरह बैन की स्थिति में इंटरनेट सर्विसेज बिल्कुल उपलब्ध ही नहीं होता. कई बार परिस्थितियों के हिसाब से सरकार 4जी और 3जी सर्विसेज को सस्पेंड कर देती है और 2जी सर्विसेज चालू रहने देती है. धारा 370 हटाने के बाद सरकार ने जम्मू-कश्मीर में ऐसा किया था. अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए ऐसा किया जाता है.

    पहली बार कब हुआ इंटरनेट शटडाउन?
    2011 में मिस्र में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था. विरोध प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया था इसके बाद वहां की सरकार ने करीब एक हफ्ते तक इंटरनेट बंद कर दिया था. इंटरनेट शटडाउन ट्रैकर रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद 2016 में 75 बार, 2017 में 106 बार, 2018 में 196 बार दुनिया के अलग-अलग देशों में इंटरनेट पर बैन लग चुका है.

    भारत में क्या है स्थिति है ?
    मौजूदा रुझानों में भारत और पाकिस्तान में सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन की स्थिति पैदा हुई है उसके बाद मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीके के देशों का नंबर है. साल 2019 में इंटरनेट पर बैन लगाने के मामले में भारत दुनिया में शीर्ष पर रहा है. इंटरनेट शटडाउन ट्रैकर रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में भारत में 106 बार इंटरनेट शटडाउन किया जा चुका है.

    कौन कर सकता है इंटरनेट शटडाउन?
    भारत में केंद्र सरकार और राज्य सरकार, दोनों के पास ऐसा करने का अधिकार है. दोनों ही सरकारें टेलिकॉम कंपनियों को इंटरनेट सर्विसेज पूरी तरह बंद करने या कुछ साइटों को बंद करने का निर्देश दे सकती हैं. अब इंटरनेट प्रोवाइटर कंपनियां इसे बंद कर देती हैं.

    इंटरनेट बंद करने का आदेश कौन दे सकता है?
    साल 2017 से पहले जिले के डीएम इंटरनेट बंद करने का आदेश देते थे. 2017 में सरकार ने इंडियन टेलिग्राफ ऐक्ट 1885 के तहत टेम्प्ररी सस्पेंशन ऑफ टेलिकॉम सर्विसेज (पब्लिक इमरजेंसी या पब्लिक सेफ्टी) रूल्स तैयार किए. इसके बाद अब सिर्फ केंद्र या राज्य के गृह सचिव या उनके द्वारा अधिकृत अथॉरिटी इंटरनेट बंद करने का आदेश दे सकते हैं.

    इमर्जेंसी में क्या होता है?
    इमरर्जेंसी की स्थिति में केंद्र या राज्य के गृह सचिव द्वारा अधिकृत किए गए जॉइंट सेक्रेटरी इंटरनेट बैन करने के लिए आदेश दे सकते हैं. हालांकि, इसके लिए उन्हें 24 घंटे के भीतर केंद्र या राज्य के गृह सचिव से इसकी मंजूरी लेनी पड़ेगी.

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