नई शिक्षा नीति में क्या है त्रिभाषा फार्मूला, समझिए NEP तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष से

नई शिक्षा नीति में क्या है त्रिभाषा फार्मूला, समझिए NEP तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष से
बच्चा अपनी मातृभाषा और स्थानीय भाषा में चीजों के प्रति अच्छे से समझा बनाता है.

देश की विविधता और स्थानीय संदर्भों को शिक्षा में स्थान देने के लिए, इसमें मातृ भाषा तथा अन्य भाषाओं को सीखने पर ज़ोर दिया गया है.

  • Share this:
नई दिल्ली. नयी शिक्षा नीति तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष एंव वरिष्ठ वैज्ञानिक के कस्तूरीरंगन ने कहा कि नयी शिक्षा नीति में कोई भी भाषा किसी पर थोपी नहीं गई है. त्रिभाषा फार्मूले को लेकर लचीला रूख प्रस्तावित किया गया है. इसरो के पूर्व प्रमुख ने कहा कि पांचवीं कक्षा तक निर्देश का माध्यम स्थनीय भाषा अपनाना शिक्षा के प्रारंभिक चरण में महत्वपूर्ण है. क्योंकि बच्चा अपनी मातृभाषा और स्थानीय भाषा में चीजों के प्रति अच्छे से समझा बनाता है और अपनी रचनात्मकता व्यक्त करता है.

ग्रेड 5 या आठवीं तक अपनी भाषा में पढ़ाई पर जोर
नीति के अनुसार, नीति में कम से कम ग्रेड 5 तक और उससे आगे भी मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा को ही शिक्षा का माध्यम रखने पर विशेष जोर दिया गया है. यह आठवीं कक्षा तक भी हो सकता है. त्रि-भाषा फॉर्मूले में भी यह विकल्‍प शामिल होगा. किसी भी विद्यार्थी पर कोई भी भाषा नहीं थोपी जाएगी. भारत की अन्य पारंपरिक भाषाएं और साहित्य भी विकल्प के रूप में उपलब्ध होंगे.

कोई भाषा किसी पर थोपी नहीं गई
कस्तूरीरंगन ने कहा, कम उम्र में बच्चों में कई भाषाओं को अपनाने की बड़ी क्षमता होती है. नीति में त्रिभाषा फार्मूले के बारे में लचीला रूख है. राज्यों में इसे कैसे लागू किया जायेगा, इस पर उन्हें निर्णय करना है. नीति में कोई भाषा किसी पर थोपी नहीं गई है. उन्होंने कहा कि हमने निर्देश के माध्यम के रूप में मातृ भाषा, क्षेत्रीय भाषा या स्थानीय भाषा का विकल्प सुझाया है.



बता दें कि नई शिक्षा नीति मूलतः विद्यार्थी केंद्रित है, जिसमें शिक्षा को संपूर्णता में देखा गया है. इसमें आवश्यक लचीलापन भी है, जिससे भारत के एक जीवंत नॉलेज सोसायटी के रूप में उभरने की उम्मीद है.

ये भी पढ़ें-
दिल्ली यूनिवर्सिटी का अकादमिक सत्र 10 अगस्त से होगा शुरू, पढ़ें पूरी खबर
COVID-19 ने इस 51 साल के शख्स को दी अच्छी खबर, 33 साल बाद पास की 10वीं क्लास

मातृ भाषा तथा अन्य भाषाओं को सीखने पर ज़ोर
देश की विविधता और स्थानीय संदर्भों को शिक्षा में स्थान देने के लिए, इसमें मातृ भाषा तथा अन्य भाषाओं को सीखने पर ज़ोर दिया गया है. साथ ही भारत की प्राचीन भाषाओं के महत्व को भी स्वीकार किया गया है. नई शिक्षा नीति से प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी. युवा और प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रमों से देश में साक्षरता का विकास होगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading